बदली परंपरा: ऋषिकेश में इस बार नहीं होगा रावण के पुतले का दहन, गंगा में किया जाएगा विसर्जित 

इस बार रावण क पुतला जलाने की बजाय गंगा में प्रवाहित किया जाएगा.
इस बार रावण क पुतला जलाने की बजाय गंगा में प्रवाहित किया जाएगा.

ऋषिकेश (Rishikesh) में 26 साल से रावण (Rawan) और मेघनाथ के पुतले का दाहन होता आ रहा है, लेकिन कोरोना संक्रमण (Corona infection) के कारण इस बार यह परंपरा टूट रही है. इस बार दोनों पुतलों को जलाने की जगह गंगा नदी (River Ganga) में प्रवाहित किया जाएगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 25, 2020, 12:48 PM IST
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ऋषिकेश. ऋषिकेश (Rishikesh) में इस बार 26 साल बाद दशहरे की परंपरा बदल गई है. इस बार यहां दशहरे में रावण (Rawan) और मेघनाथ के पुतले का दहन नहीं होगा. बल्कि इस बार रावण का मेघनाद दोनों के पुतले को बनाकर गंगा (Ganga) में प्रवाहित किया जाएगा. देश में रावण के पुतले के दहन को रोकने लिए आवाज उठती रहती है. इस दिशा में इस कदम को पहल माना जा सकता है.

ऋषिकेश में मनाया जाने वाला दशहरे का पर्व देश-विदेश में मशहूर है. बड़ी संख्या में विदेशी सैलानी भी यहां रावण दहन देखने के लिए त्रिवेणी संगम के तट पर इकट्ठा होते हैं. लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के चलते भीड़ जुटाने के लिए प्रशासन से अनुमति नहीं मिली है, जिसके चलते यह कार्यक्रम पिछले साल की तरह और भव्य नहीं होगा.

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इस वजह से सुभाष दशहरा कमेटी ने निर्णय लिया है कि त्योहार में प्रतीकात्मक रूप से रावण का पुतला बनाया जाएगा, जिसे गंगाजल में प्रभावित कर दिया जाएगा. इस बार पुतला दहन का कार्यक्रम नहीं होगा. दशहरे के कार्यक्रम में शासन के द्वारा दारी कि गई सभी गाइड लाइनों का पालन किया जाएगा. कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस बार यह फैसला लिया गया है, लेकिन भक्ति और आस्था में कोरोना के कारण लोगों का उतसाह जरा भी कम नहीं होगा.
आज देशभर में दशहरा मनाया जाएगा. रात में खास तरह की पूजा करने का विधान है. वहीं रावण दहन की परंपरा भी है, लेकिन देश में सभी जगहों पर भीड़ इक्टठी ना करने की सरकार की दिहादयत है. इसलिए पिछले साल के जैसे दशहरे का आयोजन नहीं हो रहा है. कोरोना संक्रमण के कारण ही इस बार रामलीलाओं का मंचन डिजिटल हो गया. यहां तक की अयोध्या में होने वाली रामलीला भी वर्चुअल थी. लोगों को कोरोना से बचाने के लिए सरकार ने देश भर में कड़ाई कर रखी है.
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