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बिना गन के आरटीआई कार्यकर्ताओं की सुरक्षा कर रहें हैं गनर

बिना गन के आरटीआई कार्यकर्ताओं की सुरक्षा कर रहें हैं गनर

आरटीआई कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के मामले में उत्तराखंड पुलिस पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं. लगें भी क्यों न फोन पर धमकी देने वाले आरोपियों की जब शिकायत की जाती है तो पुलिस आरटीआई कार्यकर्ता के घर सिम बेचने वालों को ही भेजना शुरू कर देती है.

आरटीआई कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के मामले में उत्तराखंड पुलिस पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं. लगें भी क्यों न फोन पर धमकी देने वाले आरोपियों की जब शिकायत की जाती है तो पुलिस आरटीआई कार्यकर्ता के घर सिम बेचने वालों को ही भेजना शुरू कर देती है.

आरटीआई कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के मामले में उत्तराखंड पुलिस पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं. लगें भी क्यों न फोन पर धमकी देने वाले आरोपियों की जब शिकायत की जाती है तो पुलिस आरटीआई कार्यकर्ता के घर सिम बेचने वालों को ही भेजना शुरू कर देती है.

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आरटीआई कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के मामले में उत्तराखंड पुलिस पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं. लगें भी क्यों न फोन पर धमकी देने वाले आरोपियों की जब शिकायत की जाती है तो पुलिस आरटीआई कार्यकर्ता के घर सिम बेचने वालों को ही भेजना शुरू कर देती है.

हैरानी तब और होती है जब एक कार्यकर्ता को गनर तो मुहैय्या करा दिया जाता है, लेकिन जब वह बाजपुर से देहरादून आता है तो निहत्था यानि बिना गन लिए ही आता है. ब जरा सोचिये सुरक्षा कैसे होगी. आरटीआई क्लब ने अब मुख्यमंत्री से मदद की गुहार लगाई है.

देवभूमि उत्तराखंड में आरटीआई कार्यकर्ताओं को धमकी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. आरटीआई क्लब ने आरोप लगाया है कि सुरक्षा के मामले में पुलिस की ओर से लापरवाही बरती जा रही है. बाजपुर में रहने वाले शिक्षक देवकुमार जैन को भी लगातार धमकियां मिल रही हैं और अब तो देहरादून में आरटीआई क्लब के अध्यक्ष को भी फोन पर धमकी दी गई है.

इससे पहले हरिद्वार जिले के आरटीआई एक्टिविस्ट जगदीश प्रसाद चौहान और ऊधमसिंह नगर के राजकुमार रहेजा की हत्या भी हो चुकी है. निजी अस्पताल के खिलाफ सूचना मांगने वाले देवकुमार जैन को तो डर है कि अब कहीं नौकरी भी न छोड़नी पड़ जाए. वजह साफ है लगातार मिल रही धमकियां.

ऊधमसिंह नगर के बाजपुर से देहरादून आए देवकुमार जैन के साथ सुरक्षाकर्मी भी हैं, लेकिन उसकी कारबाइन साथ नहीं है. देवकुमार जैन का कहना है कि ऐसी सुरक्षा देने से तो बेहतर है कि सुरक्षा न ही दी जाए.

सुरक्षाकर्मी मनोज कुमार का कहना है कि कोतवाल साहब ने कहा था कि बाजपुर से देहरादून जा रहे कारबाइन की क्या जरूरत है इसलिए नहीं ला सका.

प्रदेश के कई हिस्सों में आरटीआई कार्यकर्ताओं पर हमले हो चुके हैं और लगातार धमकियां भी मिल रही हैं. आहत आरटीआई क्लब ने अब मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर सुरक्षा की मांग की है. क्लब का आरोप है कि जिन फोन नंबरों से धमकियां मिल रही हैं पुलिस उन्हें पकड़ने के बजाए फर्जी सिम बेचने वालों के खिलाफ अभियान चला रही है और दुकानदारों को आरटीआई कार्यकर्ता के घर ये कहकर भेज रही है कि अभियान उसकी शिकायत के बाद चलाया जा रहा है.

आरटीआई क्लब के अध्यक्ष बीपी मैठाणी कहते हैं कि पुलिस और गृह विभाग ही नहीं सरकारी नुमाइंदे भी आरटीआई कार्यकर्ताओं को सुरक्षा के मामले पर गंभीर नहीं हैं अब मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा जा रहा है.

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