केदारनाथ धाम के पास फिर बनी खतरनाक झील, सेटेलाइट तस्वीर में खतरे की आहट!

नई बर्फीली झील मिलने पर जिले के डीएम मंगेश घिल्डियाल ने न्यूज 18 को बताया कि उन्होंने कुछ तस्वीरें वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के साथ साझा की हैं.

News18Hindi
Updated: June 28, 2019, 9:54 PM IST
केदारनाथ धाम के पास फिर बनी खतरनाक झील, सेटेलाइट तस्वीर में खतरे की आहट!
नई बर्फीली झील मिलने पर जिले के डीएम मंगेश घिल्डियाल ने न्यूज 18 को बताया कि उन्होंने कुछ तस्वीरें वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के साथ साझा की हैं.
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Updated: June 28, 2019, 9:54 PM IST
उत्तराखंड में साल 2013 में आई प्राकृतिक आपदा के चलते पूरी केदारनाथ घाटी तहस-नहस हो गई थी. इस आपदा में करीब 5000 लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी. जबकि हजारों लोग विस्थापित हो गए थे. करोड़ों की संपत्ति का नुकसान हुआ था. तब विशेषज्ञों ने इस तबाही का कारण मानसून का जल्दी आ जाना और ग्लेशियरों का पिघलना बताया था. इस तबाही के 6 साल बाद केदारनाथ धाम के पास एक बर्फीली झील बन जाने के कारण अधिकारी और विशेषज्ञों के माथे पर चिंता की लकीरें आ गई हैं. सेटेलाइट तस्वीरों के जरिए पता चला है कि 2013 की तबाही जैसा खतरा फिर से निकट आ रहा है.

बता दें, यह झील केदारनाथ धाम से कुछ ही दूरी पर है. इस झील के देखे जाने के बाद 2013 की भयानक त्रासदी की यादें ताजा हो गई हैं. उस समय भी इसी तरह की एक बर्फीली झील 'चोराबाड़ी' का निर्माण हो गया था. इसी झील में एकाएक उफान आने के कारण भारी मात्रा में पानी केदार घाटी में फैल गया था. यह इलाका रुद्रप्रयाग जिले में पड़ता है.

एक महीने में दो से चार हुए जल समूह
चोराबाड़ी झील की इन सेटेलाइट तस्वीरों में चार महत्वपूर्ण जल समूहों की पहचान की है. ये तस्वीरें लैंडसैट 8 और सेंटीनेल-2B सेटेलाइट से 26 जून, 2019 को ली गई हैं. यह तस्वीरें दिखाती हैं कि पिछले एक महीने में जल समूहों की संख्या दो से बढ़कर चार हो गई है.

सेटेलाइट से ली गई तस्वीर


नई बर्फीली झील मिलने पर जिले के डीएम मंगेश घिल्डियाल ने न्यूज 18 को बताया कि उन्होंने कुछ तस्वीरें वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के साथ साझा की हैं. वाडिया इंस्टीट्यूट से अगले हफ्ते तक विशेषज्ञों की एक टीम आने की संभावना है. हालांकि उन्होंने कहा कि यह झील प्राकृतिक तौर पर बनी है. जिला प्रशासन की तरफ से एहतियाती उपाय शुरू कर दिए हैं.

विशेषज्ञों में दो मत
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इस मामले पर डॉ. प्रदीप भारद्वाज का कहना है कि यह बर्फीली झील छह साल पहले तबाही मचाने वाली झील जैसी ही दिख रही है. वहीं, हिमालयी ग्लेशियरों के विशेषज्ञ डॉ. डीपी डोभाल का कहना है कि यह झील उस तरह की नहीं है. उनके मुताबिक चोराबाड़ी जैसी झील का बनना अब संभव नहीं है क्योंकि यह 2013 में पूरी तरह से नष्ट हो गई थी. अभी जो बर्फीली झील दिखी है, वैसी झीलों का निर्माण प्राकृतिक तौर पर होता रहता है. यह कुछ समय तक दिखती हैं और फिर गायब हो जाती है. इस तरह की सभी झीलें खतरनाक नहीं होती हैं.

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First published: June 28, 2019, 9:45 PM IST
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