रुद्रप्रयाग के इस सरकारी स्कूल के आगे फीके हैं उत्तराखंड के तमाम प्राइवेट स्कूल..

रुद्रप्रयाग जिले में आपदाग्रस्त गांव पांजणा के राजकीय प्राथमिक विद्यालय पांजणा में मौजूद सुविधाओं के आगे प्राइवेट स्कूल भी बौने साबित हो जाते हैं. उत्तराखंड आपदा पुनर्निर्माण योजना के अन्तर्गत वर्ल्ड बैंक की मदद से इस विद्यालय में 55 लाख 65 हजार की लागत से एक सुन्दर इमारत और बच्चों के लिए संसाधन उलब्ध करवाए गए हैं.

Shelendra Rawat | News18 Uttarakhand
Updated: April 16, 2019, 1:27 PM IST
Shelendra Rawat
Shelendra Rawat | News18 Uttarakhand
Updated: April 16, 2019, 1:27 PM IST
उत्तराखंड में सरकारी स्कूलों की खस्ताहाल हालत किसी से छुपी नहीं है, लेकिन आज बात उत्तराखंड के एक ऐसे सरकारी स्कूल की है, जिसके आगे प्राइवेट स्कूल भी फीके नजर आते हैं. इस स्कूल को देखकर हर कोई यही सोचता है कि काश उत्तराखंड का हर स्कूल ऐसा हो जाए.

दरअसल, रुद्रप्रयाग जिले में आपदाग्रस्त गांव पांजणा के राजकीय प्राथमिक विद्यालय पांजणा में मौजूद सुविधाओं के आगे प्राइवेट स्कूल भी बौने साबित हो जाते हैं. पांजणा गांव वर्ष 2007, 2012 और वर्ष 2013 में 3 बार बादल फटने के कारण आपदा का शिकार होने की दृष्टि से विस्थापन को लेकर प्रदेश में पहले नंबर पर है.



उत्तराखंड आपदा पुनर्निर्माण योजना के अन्तर्गत वर्ल्ड बैंक की मदद से इस विद्यालय में 55 लाख 65 हजार की लागत से एक सुन्दर इमारत और बच्चों के लिए संसाधन उलब्ध करवाए गए. यहां बच्चों के लिए स्मार्ट क्लास, साफ टॉयलेट, शिक्षाप्रद बातों के लिए टीवी स्क्रीन, मिड डे मील के लिए अलग से साफ कमरा, पीने के पानी के लिए आरओ के साथ साथ स्कूल का स्वच्छ वातावरण, सुंदर फुलवारी यानी कुल मिलाकर कहा जाए तो पहाड़ की शिक्षा व्यवस्था पर ये स्कूल चार चांद लगा रहा है.



मामले में राजकीय प्राथमिक विद्यालय पांजणा के प्रधानाचार्य हरीश चन्द्र भट्ट ने कहा कि जिस जगह ये स्कूल संचालित है, वो आपदाग्रस्त है. सन् 1945 में जब विद्यालय बना था, तब उसकी स्थिति बेहद खराब थी. इसके बाद तीन बार आई केदारनाथ आपदा के बाद यह स्कूल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी, लेकिन वर्ल्ड बैंक की मदद से अब यहां बच्चों के लिए सारी सुख सुविधा है.

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