Home /News /uttarakhand /

तय समयसीमा खत्‍म होने के बावजदू अबतक आधा भी नहीं हुआ पुल का निर्माण

तय समयसीमा खत्‍म होने के बावजदू अबतक आधा भी नहीं हुआ पुल का निर्माण

रुद्रप्रयाग जिले में लोक निर्माण विभाग (पीडब्‍लयूडी) की कार्यशैली से जनता की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं. खासकर मंदाकिनी नदी में बनने वाले पैदल पुलों के निर्माण में विभाग का रवैया बेहद लापरवाही का बना हुआ है.

एक ओर तो विभाग एक ही स्थान पर दो-दो पुलों का निर्माण कर चर्चा में बना हुआ है. वहीं जहां सबसे अधिक आवश्यकता है वहां अभी तक दस प्रतिशत भी कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है. ऐसे में जनपद की अधिकांश जनता को आगामी बरसात में भी ट्रॉलियों से ही सफर करना होगा.

वर्ष 2013 में केदारघाटी में आई भीषण बाढ़ में मंदाकिनी नदी पर बने कई पुल बह गए थे. सिल्ली, विजयनगर, चन्द्रापुरी आदि स्थानों पर स्थित ये पैदल पुल जनता की लाइफ लाइन थे. इन पुलों के माध्यम से पुल पार की आबादी न केवल मुख्य मार्ग से जुड़ी थी, बल्कि उनके रोजगार भी जुड़े हुए थे. अगस्त्यमुनि, चन्द्रापुरी विकसित बाजार पुल पार के ग्रामीणों के विपणन के मुख्य केन्द्र थे. इन बाजारों में ग्रामीण दूध, सब्जी इत्यादि बेचकर न केवल बाजार वालों की जरूरतों को पूरा करते थे, बल्कि यह उनकी आजीविका का भी मुख्य स्रोत थे, लेकिन आपदा में पुलों के बहने से ये ग्रामीण न केवल मुख्य बाजारों से कट गए, बल्कि इनकी आजीविका पर भी गहरा असर पड़ा.

आपदा के बाद से सरकार ने केदारनाथ यात्रा पर अपना पूरा ध्यान केन्द्रित कर दिया, मगर इन ग्रामीणों की कोई सुध नहीं ली. ग्रामीण कई माह तक इंतजार करते रहे कि सरकार उनकी समस्याओं को हल करेगी. आखिर कई माह तक इंतजार करने के बाद ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट गया और वे सड़कों पर उतर कर आंदोलन करने लगे. नवम्बर 2013 में सिल्ली में ग्रामीणों ने पुल की मांग को लेकर राजमार्ग पर जाम लगाया. नवम्बर 2014 में विजयनगर में पुल की मांग को लेकर अभिभावकों ने स्कूली विद्यार्थियों के साथ आन्दोलन प्रारम्भ किया.

दिसम्बर 2014 को चन्द्रापुरी में जनता ने आन्दोलन चलाया. जनता के आंदोलनों के बाद सरकार हरकत में आई तथा इन स्थानों पर पुलों के निर्माण के लिए कार्रवाई प्रारम्भ हुई. कुछ स्थानों पर तो त्वरित गति से कार्य हुआ और सिल्ली में तो विभाग ने एक के बाद एक लगातार दो पुलों का निर्माण एक ही स्थान पर कर दिया. जिसमें से एक 60 लाख से अधिक का अस्थाई पुल तथा दूसरे स्थाई पुल पर डेढ़ करोड़ रुपए बहाए गए हैं, लेकिन कई स्थानों पर आपदा के ढाई वर्ष बाद भी स्थिति में खास फर्क नहीं आया है. इनमें से एक विजयनगर का भी पुल है, जो कि डेढ़ वर्ष से भी अधिक समय से कछुआ गति से बन रहा है. अभी तक इसका एक भी पिलर तक नहीं बन पाया है. जबकि ठेकेदार के बॉण्ड की अवधि पूर्ण हो चुकी है, लेकिन पीडब्‍ल्‍यूडी इस ओर से चुप्पी साधे हुए है.

जनता ने जताई भ्रष्‍टाचार की आशंका

इस पुल से दो दर्जन से भी अधिक ग्राम पंचायतें मुख्य धारा से जुड़ती हैं तथा सैकड़ों छात्र हर रोज नदी पार कर विद्यालयों तक पहुंचते हैं. जनता इन पुलों के निर्माण में होने वाली देरी के लिए विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को जिम्मेदार मान रही है. जनता का कहना है कि यदि पुल का निर्माण शीघ्र हो जाएगा तो अस्थाई पुलों में खर्च होने वाली धनराशि का वारा-न्यारा कैसे होगा. क्योंकि पुल न बनने की दशा में हर साल बरसात के बाद अस्थाई पुल का निर्माण किया जाता है जो बरसात आते ही हटा दिया जाता है. यह अस्थाई पुल भी कई लाख रुपए का होता है.

सिल्ला वार्ड की जिला पंचायत सदस्य श्रीमती सुलोचना देवी का कहना है कि विभाग इस क्षेत्र की जनता की अनदेखी कर रहा है. ठेकेदार के प्रति नरमी बरती जा रही है, इसलिए ठेकेदार धीमी गति से कार्य कर रहा है. यदि पुल के निर्माण में तेजी नहीं आई तो ग्रामीण एक बार फिर आन्दोलन करेंगे.

पुल निर्माण संघर्ष समिति के अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह रावत का कहना है कि क्षेत्रीय जनता ने पुल का निर्माण कराने के लिए लम्बा आन्दोलन चलाया है, लेकिन विभाग की लापरवाही से जनता अभी तक ट्रॉली में सफर करने को मजबूर है. यदि पुल निर्माण में तेजी नहीं आई तो जनता के सब्र का बांध कभी भी टूट सकता है.

वहीं रुद्रप्रयाग एसडीएम चतर सिंह चौहान विजयनगर पुल के बॉन्‍ड की अवधि नवंबर 2015 में पूर्ण हो चुकी है, जिसके बाद ठेकेदार की ओर से कार्य पूर्ण करने के लिए जून माह तक का समय मांगा गया है. ग्रामीणों की समस्याओं को देखते हुए जल्द कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं. यदि ठेकेदार ने लापरवाही बरती तो कार्रवाई अमल में लाई जाएगी.

Tags: Rudraprayag news

विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर