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Uttarakhand: मंदाकिनी नदी में गिरी कार, मच गई चीख-पुकार; ड्राइवर की मौत

मंदाकिनी नदी में डूबने से एक व्यक्ति की मौत हो गई.

मंदाकिनी नदी में डूबने से एक व्यक्ति की मौत हो गई.

Uttarakhand Flood 2021 Monsoon Weather Update: उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग (Rudraprayag) में मंदाकिनी नदी में एक कार गिर गई. हादसे में कार चालक की मौत हो गई. तो वहीं पिथौरागढ़ (Pithoragarh) में भी धारचूला के गलाती नाले में गिरने से एक शख्स की जान चली गई.

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रुद्रप्रयाग/पिथौरागढ़. उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग (Rudraprayag) के अगस्त्यमुनि गंगानगर इलाके में बड़ा हादसा हुआ. गुरुवार सुबह एक कार मंदाकिनी नदी (Mandakini River) में जा गिरी. हादसे के दौरान कार में एक व्यक्ति सवार था. हादसे की जानकारी मिलते ही मौके पर स्थानीय पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीम पहुंची. काफी मशक्कत के बाद भी कार सवार शख्स को बचाया न जा सका. लोगों की मदद से शव को मंदाकिनी में गिरी कार से निकाल लिया गया. बताया जा रहा है कि गंगानगर में पठालीधार-बसूकेदार को जोड़ने वाले पुल के पास कार को मोड़ने के समय ये हादसा हुआ. मंदाकिनी नदी में जलस्तर बढ़ा होने के कारण रेस्क्यू में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा.

मिली जानकारी के मुताबिक, अगस्त्यमुनि के गंगानगर में गुरुवार सुबह एक कार मंदाकिनी नदी में गिर गई. बताया जा रहा है कि कार मोड़ने के दौरान ये हादसा हुआ. काफी मशक्कत के बाद पुलिस और एसडीआरएफ की टीम ने रस्सियों की मदद से नदी में उतरी और शव को बरामद किया.

पिथौरागढ़ में बड़ा हादसा

बरसात के दिनों पहाड़ों में हर तरफ आसमानी आफत बरस रही है. लगातार हो रही भारी बारिश के कारण धारचूला में गलाती नाला भी पूरे ऊफान पर है. इस नाले में एक कच्चा पुल मौजूद था. इसी कच्चे पुल की मदद से गोपाल सिंह अपने घर लौट रहा था. लेकिन पुल ने साथ नहीं दिया और गोपाल ऊफनते नाले में समा गया. देऱ शाम भी एसडीआरएफ ने गोपाल को तलाशने के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया. मगर अंधेरा काफी होने के चलते ऑफरेशन रोकना पड़ा. सुबह होने पर एसडीआऱएफ ने फिर मोर्चा संभाला. लेकिन पानी के बहाव तेज होने के कारण शव तक पहुंचना मुश्किल हो रहा था.  आखिरकार रस्सियों की मदद से एसडीआऱएफ के जवान शव तक पहुंचे. तेज बहाव के बीच  शव को निकालना भी किसी चुनौती से कम नहीं था. लेकिन पूरी तरह ट्रेंड जवानों ने शव को पानी से निकाला.

शव को पार पहुंचाने के लिए एक बार फिर एसडीआऱएफ  ने रस्सियों की मदद ली. रस्सियों में लटकाकर शव का दूसरे छोर पर पहुंचाया गया. करीब 6 घंटे तक चले सर्च ऑपरेशन ने देखने वालों की धड़कनों को थाम सा दिया था. घटना के बाद नाराज ग्रामीणों ने घंटों एसडीएम धारचूला का घेराव किया. ग्रामीणों ने गोपाल के शव का अंतिम संस्कार भी नहीं किया. गलाती से क्षेत्र पंचायत सदस्य देवेन्द्र बिष्ट का कहना है कि गांव के लोग सालों से पक्का पुल बनाने की मांग कर रहे हैं. लेकिन शासन-प्रशासन को कोई परवाह नहीं है.

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रंग लाई महिलाओं की मेहनत, बंजर जमीन पर उगा दिए रोजमेरी और डेंडिलियन के पौधे

रोजमेरी और डेंडिलियन औषधीय पौधे हैं.

रुद्रप्रयाग के कोट मल्ला गांव को पर्यावरणविद जगत सिंह चौधरी 'जंगली' की वजह से देशभर में पहचान मिली है.

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रुद्रप्रयाग जिले के कोट मल्ला गांव में पर्यावरणविद जगत सिंह जंगली और कृषि विभाग की मदद से महिलाओं की कोशिश रंग लाई है. महिलाओं ने 50 नाली बंजर भूमि पर रोजमेरी और डेंडिलियन के औषधीय पौधों की खेती शुरू कर दी है. इस पहल से उनकी आय का जरिया तलाशा गया है.

कृषि विभाग ने कोट मल्ला में इस कार्य की शुरूआत की है. 10 लाख 97 हजार रुपये की लागत से कृषि एवं मनरेगा के तहत कोट मल्ला में रोजमेरी और डेंडिलियन का पौधारोपण किया गया.

बता दें कि रुद्रप्रयाग के कोट मल्ला गांव को पर्यावरणविद जगत सिंह चौधरी \’जंगली\’ की वजह से देशभर में पहचान मिली है. उन्होंने 40 वर्षों में करीब 60 से ज्यादा प्रजातियों के डेढ़ लाख से अधिक पेड़ उगाकर कोट मल्ला के अंतर्गत पड़ी बंजर भूमि को हरा-भरा कर दिया.

सीमा सुरक्षा बल से सेवानिवृत्त जगत सिंह ने 1974 में अपने गांव कोट मल्ला में बांज, बुरांश, आंवला, रिंगाल, पान, देवदार, आर्किड प्रजाति के कई पौधे लगाकर न सिर्फ गांव में चारा, ईंधन आदि की समस्या को दूर किया बल्कि उनकी मुहिम के कारण गांव में सूखे पड़े जलस्रोत भी पानी से भर गए. जब जलस्रोत में फिर से पानी भरने लगा तो इसका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा था, तब जगत सिंह ने इस समस्या को रुद्रप्रयाग के तत्कालीन जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल से साझा किया. जिलाधिकारी ने 30 हजार लीटर की क्षमता वाला पानी का टैंकर बनाने की स्वीकृति दी. मार्च 2021 में टैंक का निर्माण पूरा हो गया.

जगत सिंह जंगली ने इस जमीन को रोजगार से जोड़ने के लिए प्रशासन से निवेदन किया. जिसके बाद कृषि विभाग की मदद से यहां रोजमेरी और डेंडिलियन के पौधे लगाए गए, जिनकी कीमत बाजार में 300 रुपये से लेकर 400 रुपये प्रति किलो तक होती है.

उत्तराखंड का स्विट्जरलैंड है तुंगनाथ-चोपता, धर्म और खूबसूरती का बेजोड़ संगम

तुंगनाथ मंदिर पंचकेदारों में से एक है.

चोपता 12 से 14 हजार फीट की ऊंचाई पर बसा हुआ है और यह गढ़वाल-हिमालय के सबसे सुंदर स्थानों में से एक है.

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उत्तराखंड वैसे तो धार्मिक और कई खूबसूरत जगहों के लिए जाना जाता है, मगर राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में ऊखीमठ से लगभग 45 किलोमीटर दूर तुंगनाथ और चोपता में धर्म और खूबसूरती का ऐसा संगम है, जो हर किसी का मन मोह लेता है. चोपता 12 से 14 हजार फीट की ऊंचाई पर बसा हुआ है और यह गढ़वाल-हिमालय के सबसे सुंदर स्थानों में से एक है.

जनवरी-फरवरी के महीनों में आमतौर पर बर्फ की चादर ओढ़े इस जगह की सुंदरता जुलाई-अगस्त के महीनों में देखते ही बनती है. इन महीनों में यहां मीलों तक फैले मखमली घास के मैदान और उनमें खिले फूलों की सुंदरता हर किसी का दिल जीत लेती है. यही वजह है कि पर्यटक इसकी तुलना स्विट्जरलैंड से भी करते हैं.

तुंगनाथ मंदिर पहुंचने के लिए चोपता से तीन किलोमीटर की चढ़ाई पर पैदल चलकर पहुंचा जाता है. तुंगनाथ मंदिर पंचकेदारों में से एक है और दुनिया का सबसे ज्यादा ऊंचाई (3600 मीटर) पर बना शिव मंदिर है. यहां भगवान भोलेनाथ की भुजाओं की विशेष पूजा की जाती हैं क्योंकि इस स्थान पर शिवजी भुजा के रूप में विद्यमान हैं.

ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण पांडवों द्वारा भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया गया था. बताया जाता है कि महाभारत में हुए नरसंहार की वजह से भोलेनाथ पांडवों से नाराज हो गए थे. पार्वती माता ने विवाह से पहले भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए यहां तपस्या भी की थी.

उत्तराखंड में दुनिया का इकलौता ऐसा मंदिर

ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में स्थित है.

धारत्तुर परकोटा शैली में बने होने के चलते इस भव्य मंदिर के गर्भ गृह पर बाहर से 16 कोने हैं और भीतर से 8 कोने हैं.

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ओंकारेश्वर मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के ऊखीमठ में स्थित एक प्रमुख तीर्थ स्थल है. पुरातात्विक सर्वेक्षणों के अनुसार, प्राचीन धारत्तुर परकोटा शैली में निर्मित विश्व का यह एकमात्र मंदिर है, हालांकि पहले काशी विश्वनाथ और सोमनाथ मंदिर में भी धारत्तुर परकोटा शैली उपस्थित थी लेकिन बाद में आक्रमणकारियों ने इन मंदिरों को नष्ट कर दिया था.

धारत्तुर परकोटा शैली में बने होने के चलते इस भव्य मंदिर के गर्भ गृह पर बाहर से 16 कोने हैं और भीतर से 8 कोने हैं. यह मंदिर चारों ओर से प्राचीन भव्य भवनों से घिरा हुआ है, जिनकी छत पठाल निर्मित है. मंदिर में प्रवेश करने के लिए बाहरी भवन पर एक विशाल सिंहद्वार बना हुआ है, जो मंदिर में प्रवेश का एकमात्र मार्ग है.

1300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस मंदिर में सर्दियों के दौरान केदारनाथ और मध्यमहेश्वर की डोली को रखा जाता है और छह माह तक ऊखीमठ में ही इनकी पूजा की जाती है. हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, माना जाता है कि इस मंदिर में बाणासुर की बेटी उषा और भगवान कृष्ण के पोते अनिरुद्ध  का विवाह हुआ था.

मंदिर से जुड़ी एक अन्य पौराणिक कथा है कि मंधाता, एक सम्राट और भगवान राम के पूर्वज, जिन्होंने सभी सांसारिक सुखों को त्याग दिया था और एक पैर पर खड़े होकर 12 वर्षों तक तपस्या की थी. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें ओमकार यानी ओम की ध्वनि के रूप में दर्शन दिए और उन्हें आशीर्वाद दिया. तब से मंदिर को ओंकारेश्वर मंदिर के रूप में जाना जाता है.

बता दें कि ओंकारेश्वर अकेला मंदिर न होकर मंदिरों का समूह है. इस समूह में वाराही देवी मंदिर, पंचकेदार लिंग दर्शन मंदिर, पंचकेदार गद्दी स्थल, भैरवनाथ मंदिर, चंडिका मंदिर, हिमवंत केदार वैराग्य पीठ, विवाह वेदिका और अन्य मंदिरों समेत संपूर्ण कोठा भवन शामिल हैं. वहीं ऊखीमठ मंदिर पंच केदारों का गद्दी स्थल भी है, जहां पंच केदारों की दिव्य मूर्तियां एवं शिवलिंग स्थापित हैं.

उत्तराखंड में भी है काशी विश्वनाथ मंदिर, जानिए क्यों पड़ा इस जगह का नाम गुप्तकाशी?

यह मंदिर रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है.

दोषों से मुक्ति पाने के लिए पांडवों ने पूजा-अर्चना की और भगवान शंकर के दर्शन के लिए निकल पड़े.

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उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में 1319 मीटर की ऊंचाई पर विख्यात काशी विश्वनाथ मंदिर, पवित्र धाम केदारनाथ मार्ग पर गुप्तकाशी कस्बे में स्थित है. यह केदारनाथ यात्रा का मुख्य पड़ाव भी है. यह तीन प्रमुख काशियों उत्तरकाशी, काशी (वाराणसी) और गुप्तकाशी में से एक है. मान्यता है कि कौरवों और पांडवों में जब युद्ध हुआ तो पांडवों ने कई व्यक्तियों और अपने भाइयों का भी वध कर दिया था तो उसी वध के कारण उन्हें बहुत सारे दोष लग गए थे.

पांडवों को उन्हीं दोषों के निवारण करने के लिए भगवान शिव से माफी मांगते हुए उनका आशीर्वाद लेना था, लेकिन भोलेनाथ पांडवों से रुष्ट हो गए थे क्योंकि उस युद्ध के दौरान पांडवों ने भगवान शिव के भी भक्तों का वध कर दिया था.

उन्हीं दोषों से मुक्ति पाने के लिए पांडवों ने पूजा-अर्चना की और भगवान शंकर के दर्शन के लिए निकल पड़े. भगवान शिव हिमालय के इसी स्थान पर ध्यान मग्न थे और जब भगवान को पता चला कि पांडव इसी स्थान पर आ रहे हैं तो वह यहीं नंदी का रूप धारण कर अंतर्ध्यान हो गए या यूं कहें गुप्त हो गए, इसलिए इस जगह का नाम गुप्तकाशी पड़ा.

वहीं यहां शिव-पार्वती को समर्पित अर्द्ध नारीश्वर मंदिर भी स्थित है. गुप्तकाशी में मणिकर्णिका कुंड भी है. माना जाता है कि मणिकर्णिका कुंड में गिरने वालीं दो जलधाराएं गंगा और यमुना के रूप में विराजमान होती हैं.

उत्तराखंड में इस जगह है भगवान कार्तिकेय का मंदिर, जानिए इसके इतिहास से जुड़ी कहानी

यह मंदिर रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है.

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित कार्तिक स्वामी मंदिर भगवान शिव के बड़े पुत्र, कार्तिकेय को समर्पित है.

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कार्तिक स्वामी मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में रुद्रप्रयाग-पोखरी मार्ग पर कनक चौरी गांव के पास 3050 मीटर की ऊंचाई पर एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है. कार्तिक स्वामी मंदिर भगवान शिव के बड़े पुत्र, कार्तिकेय को समर्पित है, जिन्होंने अपने पिता भगवान शंकर के प्रति समर्पण के प्रमाण के रूप में अपनी अस्थियों की पेशकश की थी. माना जाता है कि यह घटना यहीं हुई थी.

चमोली : जानवरों में तेजी से फैल रहा खुरपका, अब तक कई पशुओं की मौत

खुरपका एक संक्रामक बीमारी है.

चमोली जिले के गौचर में खुरपका नामक संक्रामक बीमारी की वजह से पशुओं की मौत हो रही है. 

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चमोली जिले के गौचर में खुरपका नामक संक्रामक बीमारी की वजह से पशुओं की मौत हो रही है. गौचर के श्री कृष्णा गौ सदन की गायों में तो यह रोग बीते एक सफ्ताह से काफी तेजी से फैल रहा है. यहां लगभग 100 से अधिक जानवरों को रखा गया है, जिसमें से इस बीमारी के कारण हर रोज किसी न किसी पशु की मौत हो रही है. पशुओं के शवों को सदन में ही जेसीबी द्वारा गड्ढा खोदकर दफनाया जा रहा है.

कैसे मिलेगा बेहतर इलाज? 1 अदद ट्रामा सेंटर को तरस रहा रुद्रप्रयाग

आपदा के लिहाज से रुद्रप्रयाग काफी संवेदनशील जिला है.

रुद्रप्रयाग चारधाम यात्रा का मुख्य पड़ाव होने के साथ ही आपदा के लिहाज से भी बेहद संवेदनशील है.

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विडम्बना तो देखिए रुद्रप्रयाग जिले को बने हुए 23 वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन आज तक जिला मुख्यालय में ट्रामा सेंटर स्थापित नहीं हो सका है. जिसके कारण दुर्घटना में घायल मरीजों का उपचार जिला चिकित्सालय में किया जाता है. यहां घायलों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, कई बार तो घायल मरीजों को काफी दूर श्रीनगर-गढ़वाल ले जाने की भी नौबत आ जाती है. रुद्रप्रयाग चारधाम यात्रा का मुख्य पड़ाव होने के साथ ही आपदा के लिहाज से भी बेहद संवेदनशील है.

त्रियुगीनारायण में हुआ था शिव-पार्वती का विवाह, मंदिर में त्रेतायुग से जल रही दिव्य लौ

इस मंदिर में चार कुंड हैं.

मंदिर के अंदर प्रज्वलित अग्नि कई युगों से जल रही है, इसलिए इस स्थल का नाम त्रियुगी हो गया यानी अग्नि जो तीन युगों से जल रही है.

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त्रियुगीनारायण मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के त्रियुगीनारायण गांव में स्थित पवित्र और विशेष पौराणिक मंदिर है. मंदिर के अंदर प्रज्वलित अग्नि कई युगों से जल रही है, इसलिए इस स्थल का नाम त्रियुगी हो गया यानी अग्नि जो तीन युगों से जल रही है. इस स्थान को विष्णु द्वारा त्रेतायुग में देवी पार्वती के शिव से विवाह के स्थल के रूप में जाना जाता है और इस प्रकार यह एक लोकप्रिय तीर्थस्थल है. विष्णु ने इस दिव्य विवाह में पार्वती के भ्राता का कर्तव्य निभाया था, जबकि ब्रह्मा इस विवाहयज्ञ के पुरोहित बने थे. उस समय सभी संत-मुनियों ने इस समारोह में भाग लिया था. विवाह स्थल के नियत स्थान को ब्रहम शिला कहा जाता है, जो कि मंदिर के ठीक सामने स्थित है. इस मंदिर के महात्म्य का वर्णन स्थल पुराण में भी मिलता है. इस मंदिर की एक विशेष विशेषता एक सतत आग है, जो मंदिर के सामने जलती है. माना जाता है कि लौ दिव्य विवाह के समय से जलती आ रही है. इस प्रकार, मंदिर को अखंड धूनी मंदिर भी कहा जाता है. आने वाले यात्री इस हवनकुण्ड की राख को अपने साथ ले जाते हैं और मानते हैं कि यह उनके वैवाहिक जीवन को सुखी बनाएगी. मंदिर के सामने ब्रह्मशिला को दिव्य विवाह का वास्तविक स्थल माना जाता है. मन्दिर के अहाते में सरस्वती गङ्गा नाम की एक धारा का उद्गम हुआ है. इससे इसके पास के सारे पवित्र सरोवर भरते हैं. सरोवरों के नाम रुद्रकुंड, विष्णुकुंड, ब्रह्मकुंड व सरस्वती कुंड हैं. रुद्रकुंड में स्नान, विष्णुकुंड में मार्जन, ब्रह्मकुंड में आचमन और सरस्वती कुंड में तर्पण किया जाता है.

चमोली में मिठाई की दुकान में लगी आग, एक के बाद एक फटे 9 सिलेंडर

आग ने कई और दुकानों को भी अपनी चपेट में ले लिया.

आग की चपेट में 11 अन्य दुकानें भी आ गईं. दुकानों में आग लगने से चमोली बाजार में अफरा-तफरी का माहौल बन गया.

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बद्रीनाथ हाइवे पर चमोली मुख्य बाजार में मिठाई की दुकान में अचानक आग लग गई. आग की चपेट में 11 अन्य दुकानें भी आ गईं. दुकानों में आग लगने से चमोली बाजार में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. वहीं मिठाई की दुकान में रखे करीब 9 सिलेंडरों में एक के बाद एक विस्फोट होने से आग और विकराल हो गई, जिसके कारण दुकान में रखा लाखों का सामान जलकर खाक हो गया.

कोरोना महामारी की वजह से पिछले दो साल से चारधाम यात्रा बंद पड़ी हुई है, जिससे स्थानीय कारोबारियों और होटल व्यवसाय से जुड़े लोगों के सामने परिवार पालने की समस्या खड़ी हो चुकी है. यात्रा बंद होने से लोगों के सामने अब भुखमरी तक की नौबत आ गई है. ऐसे में केदारघाटी की जनता में सरकार के खिलाफ आक्रोश बना हुआ है.

VIDEO: उत्तराखंड में भीड़ ने BJP नेता को दौड़ाया, जान बचाने को गाड़ी छोड़ी, फांदी दीवार

देवस्‍थानम एक्ट का विरोध कर रहे लोगों ने बीजेपी नेता को घेर लिया और उनके साथ अभद्रता की.

Rudraprayag में देवस्‍थानम एक्ट का विरोध कर रहे लोगों ने बीजेपी के नेता पंकज भट्ट को घेर लिया और धक्का-मुक्की के साथ ही मारपीट भी की. पंकज किसी तरह से बच कर वहां से भागे और दीवार फांद कर भीड़ से अपनी जान बचाई.

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रुद्रप्रयाग. देवस्‍थानम एक्‍ट का विरोध कर रहे कुछ लोगों ने रुद्रप्रयाग स्थित उखीमठ में बुधवार को बवाल कर दिया. भीड़ ने बीजेपी के नेता पंकज भट्ट को घेर लिया और इस दौरान उनके साथ धक्का-मुक्की करते हुए मारपीट की. पंकज किसी तरह से अपनी जान बचाते हुए कार में बैठे लेकिन लोगों ने उनकी कार को आगे नहीं बढ़ने दिया. सुरक्षाकर्मियों ने भीड़ को संभालने का प्रयास किया लेकिन वो भी नाकाफी दिखा. बाद में पंकज ने किसी तरह गाड़ी आगे बढ़ाई तो वो ऐसी जगह पर अटक गए जहां पर गाड़ी ले जाने का रास्ता नहीं था.
किसी तरह से पंकज अपनी कार से निकले और भाग कर पास की एक ऊंची दीवार को फांदा. बाद में वे वहां मौजूद घरों में होते हुए बच कर निकले. इस दौरान लगातार भीड़ उनके पीछे भागती रही और अपशब्द कहती रही. इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने बना लिया और सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया. जिसके बाद ये वीडियो तेजी से वायरल हो गया.

जानकारी के अनुसार पंकज ऊखीमठ में देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की मांग को लेकर तीर्थपुरोहितों की रैली का समर्थन करने पहुंचे थे. ऊखीमठ बाजार से तहसील तक तीर्थपुरोहितों की आक्रोश रैली थी, बताया जा रहा है कि तीर्थपुरोहितों की रैली का समर्थन करने पहुचे बीजेपी नेता पंकज भट्ट को देख तीर्थपुरोहित आग बबूला हो गए, दरअसल भाजपा नेता पंकज भट्ट पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के काफी करीबी माने जाते हैं. ऐसे में जैसे ही तीर्थपुरोहितों को इसकी भनक लगी, उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया, पूरे मामले में तीर्थपुरोहितों का कहना है कि भाजपा नेता ने तहसील गेट में जानबूझ कर गलत ढंग से गाड़ी लगाई थी ताकि रैली तहसील में न जा सके. वहीं भट्ट का कहना है कि बीते 2 सालों से कोरोना के चलते तीर्थपुरोहित यात्रा न होने से भी आक्रोशित हैं, साथ ही उन्होंने सरकार से देवस्थानम बोर्ड भंग करने की भी मांग की.



पुजारी कर रहे हैं विरोध
गौरतलब है कि देवस्थानम अधिनियम को त्रिवेंद्र रावत सरकार की ओर से केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री मंदिरों को एक आईएएस अधिकारी द्वारा शासित देवस्थानम बोर्ड के दायरे में लाने के लिए पेश किया गया था. अब उत्तराखंड के पुजारी इस अधिनियम का विरोध कर रहे हैं और इसे वापस लेने की बात कह रहे हैं. गौरतलब है कि त्रिवेंद्र रावत ने सभी पुजारियों ने इस मामले को देखने का भी वादा किया था लेकिन बाद में मुख्यमंत्री बदल गए.
देवस्‍थानम एक्ट को भंग करने के लिए लगातार पुजारी विरोध कर रहे हैं और प्रदर्शनों का दौर भी जारी है. गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के पुजारी इसका विरोध करते हुए धरने पर भी बैठ गए हैं. वहीं काली पट्टी बांध कर भी पुजारी इसका विरोध कर रहे हैं. मामले में केदार सभा व गंगोत्री के पंडा पुरोहितों ने भी याचिका दाखिल कर सरकार के फैसले का कोर्ट में विरोध किया, तो देहरादून की रुलेक संस्था ने सरकार के बचाव में अपनी याचिका दाखिल की.

अलर्ट : उत्तराखंड में उफान पर नदियां, खिसक रही ज़मीन तो दरक रही हैं चट्टानें

ऋषिकेश और पिथौरागढ़ में नदियां उफान पर हैं.

Uttarakhand Weather Alert : ​ऋषिकेश में गंगा के किनारों को लेकर अलर्ट जारी कर दिया गया है, तो पिथौरागढ़ और चमोली जैसे इलाकों में हालात मुश्किल हो रहे हैं. कई रास्ते बंद पड़े हैं, तो कई खतरनाक बने हुए हैं.

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देहरादून. उत्तराखंड राज्य के पहाड़ी इलाकों में मानसून के शुरुआती तेवरों ने ही मुश्किलें खड़ी कर दी हैं. पिथौरागढ़ और चमोली जैसे सीमांत ज़िलों के साथ ही ऋषिकेश जैसे इलाकों में भी नदियां उफान पर बह रही हैं. भारी बारिश के चलते पिछले कुछ दिनों से लगातार मुश्किलों का दौर बना हुआ है. पिथौरागढ़ में शुक्रवार को घाट नेशनल हाईवे ठप रहने की खबर थी, तो चमोली में बद्रीनाथ नेशनल हाईवे पर यातायात प्रभावित होने की. राज्य की कई नदियों में जलस्तर बढ़ जाने की भी खबरें थीं, ताज़ा खबर यह है कि राज्य के कंट्रोल रूम ने ऋषिकेश में गंगा नदी के किनारों पर अलर्ट जारी किया है.

पिथौरागढ़ की बंगापनी तहसील से जोखिम और खतरे की बानगी देती तस्वीरें सामने आ रही हैं. पिछले 48 घंटों से हो रही भारी बारिश के चलते यहां नदियां उफान पर हैं. इसके साथ ही, भू कटाव हो रहा है, तो कहीं भूस्खलन. नदियों के उफान पर बहने के वीडियो जो वायरल हो रहे हैं, उनमें कहीं पेड़ तो कहीं दुकानें ज़द में दिख रही हैं. बता दें कि पिछले साल भी यहां इसी तरह तबाही मची थी, जब 11 लोग की मौत हुई थी.

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दूसरी तरफ, समाचार एजेंसी एएनआई ने खबर दी है कि अलकनंदा नदी में जलस्तर बढ़ जाने के बाद स्टेट कंट्रोल रूम ने अलर्ट जारी करते हुए ऋषिकेश में गंगा नदी के किनारों पर अतिरिक्त सतर्कता बढ़ाने की हिदायतें दीं. पिथौरोढ़ में धौलीगंगा समेत सरयू और काली नदियों के उफान पर होने के बारे में न्यूज़18 ने शुक्रवार को विस्तार से खबर दी थी.

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वहीं, अल्मोड़ा में भी भारी बारिश के चलते आधा दर्जन से ज़्यादा सड़कें टूट जाने से ग्रामीण इलाकों से संपर्क कट गया है. बिजली कई गांवों में गुल बताई गई. इसके साथ ही, घाट-पिथौरागढ़, धारचूला लिपुलेख, कोटा मलोन, मदकोट बोना, मदकोट दारमा, रायाबजेता बंगापानी-जाराजिबली जैसे कई मार्गों पर ट्रैफिक लगातार प्रभावित बताया जा रहा है. टनकपुर पिथौरागढ़ जैसे कुछ रास्तों पर मलबा बहकर आ रहा है, तो कुछ रास्तों पहाड़ों से पत्थर गिर रहे हैं. कुल मिलाकर यात्रियों और स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दी जा रही है.

केदारनाथ आपदा की बरसी: एक अंधे की आंखों देखी, जिसने खुद के साथ बचाई दूसरे की जान

केदारनाथ आपदा में 4000 से अधिक लोग मारे गए थे. (PTI)

2013 की 16-17 जून की रात को उत्‍तराखंड के इतिहास में सबसे भयावह आपदा आया था. इसमें सैकड़ों की लोगों की जान चली गई और व्‍यापक पैमाने पर संपत्तियों का भी नुकसान हुआ.

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रुद्रप्रयाग. वर्ष 2013 की केदारनाथ (Kedarnath) आपदा की आखों देखी आप बीते 8 वषों से सुनते आ रहे हैं, लेकिन इस बार आपको केदारनाथ त्रासदी की आखों देखी ऐसे शख्स की आखों से दिखाने की कोशिश करेंगे जो जन्मजात अंधा है. ताज्‍जुब की बात यह है कि उस शख्स ने आपदा के दिन केदारनाथ में खुद के साथ दूसरे की भी जान बचाई. वर्ष 2013 की 16-17 जून की काली रात ने उत्तराखंड के इतिहास में वो काला दिन दिखाया जिसे भुलाया नहीं जा सकता है.

देवभूमि में हजारों लोग काल की भेंट चढ़ गये, तो कई लोग जिन्दगी और मौत के बीच हुए इस युद्ध में जीत कर आज भी अपनी जिन्दगी जी रहे रहे हैं. उस भयानक मंजर की आखों देखी बयां करते रहते हैं, लेकिन आपदा के दौरान केदारनाथ धाम में एक शख्स ऐसा भी था जो जन्मजात दिव्यांग था. उनका नाम धर्मा राणा है और उस दिन केदारनाथ में ही मौजूद थे. आखों से भले ही इस शख्स ने कभी जिन्दगी में कुछ न देखा हो, लेकिन उन्‍होंने जो महसूस किया वह आज भी उन्‍हें डरा देता है.

खुद के साथ दूसरे की भी बचाई जान
धर्मा ने आपदा के दौरान केवल खुद को नहीं बचाया, बल्कि अपने साथ एक और व्यक्ति को भी जीवनदान दिलवाया. धर्मा बताते हैं कि आप खुद अहसास कर सकते हैं कि बिना आखों के इन्सान ने कैसे उस घड़ी में उस महाआपदा में खुद और अपने साथी को जीवित बाहर निकाला होगा. धर्मा उस मंजर को याद करते हुए कहते हैं कि जिसको ईश्वर का साथ मिल जाए उसे कोई भी नहीं मार सकता. केदारनाथ आपदा के बाद धर्मा की बाबा के प्रति आस्था और बढ़ गई और आज कोरोना महामारी के दौर में भह धर्मा की आस्था बाबा केदार पर बनी हुई है. धर्मा आज भी कोरेाना महामारी से निजात पाने के लिए बाबा के भजन गाते हैं.

केदारनाथ आपदा 8वीं बरसी: पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के पुर्ननिर्माण का पहला चरण पूरा, लेकिन रोंगटे खड़े कर देती हैं यादें

केदारनाथ आपदा में 4000 से अधिक लोग मारे गए थे. (PTI)

Kedarnath tragedy 8th anniversary: वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद केदार नगरी को दोबारा स्थापित करने के लिए युद्धस्तर पर कार्य किये गये. परिणाम स्वरूप आज आपदा के आठ साल बाद केदारनाथ की तस्वीर बदली हुई नजर आ रही है. लेकिन आज की कुछ ऐसे विषय हैं, जिनको दरकिनार कर गौंण कर दिया गया है.

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रूद्रप्रयाग. बीते 8 सालों में केदारनाथ धाम (Kedarnath Dham) की तस्वीर बदल गई है. आज केदारनाथ धाम में पुर्ननिर्माण कार्य युद्धस्तर पर चल रहे हैं. पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल केदारनाथ में पुर्ननिर्माण का प्रथम चरण का कार्य पूर्ण हो चुके हैं और द्वितीय चरण के कार्य केदारनाथ धाम में चल रहे हैं, जिसमें धाम में आदिगुरू शंकराचार्य समाधी पुर्ननिर्माण के साथ ही शंकराचार्य की विशाल मूर्ति, तीर्थ पुरोहित आवास और घाटों के निर्माण का कार्य भी चल रहा है. यही नहीं, यात्रा की दृष्टि से देखा जाए तो तीर्थयात्रियों के खाने, ठहरने जैसी सुविधाओं को व्यवस्थाओं में सुधार हुआ. इससे साफ है कि बीते वर्षों में यात्रा पटरी पर लौटी, लेकिन कोरोना की मार से धाम में बीते दो वर्षों से सन्नाटा पसरा हुआ है.

एक और जहां तेजी से पुर्ननिर्माण कार्य हो रहे हैं, तो वहीं दूसरी और कई बड़े मुद्दे दबकर रह गये हैं. केदारनाथ धाम में पुर्ननिर्माण कार्य बीते कई सालों से चल रहे हैं, लेकिन 360 नाली के सबसे बड़े भूमिधर श्री केदारनाथ मंदिर को एक नाली भूमि पर भी अब तक जिला प्रशासन द्वारा कब्जा नहीं दिया गया है. यही नहीं, पीढ़ि‍यों से केदारनाथ धाम में रह रहे लोगों के भी अब तक भूमि नाम नहीं की गयी है. इस बारे में केदारनाथ विधायक मनोज रावत का कहना है कि जब तक जमीन का मामला नहीं सुलझता तब तक सब शून्य ही है.

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इस समय ऐसा दिखता है केदारनाथ बाबा का मंदिर.


मंत्री धन सिंह रावत ने कही ये बात
इसके अलावा जिला प्रशासन केदारनाथ धाम में पुर्ननिर्माण कार्यों में तेजी के दावे कर रहा है. रूद्रप्रयाग के डीएम मनुज गोयल का कहना है कि धाम में पुर्ननिर्माण को लेकर कार्य तेजी से चल रहे हैं और कई कार्य गतिमान हैं. वहीं, जिले के प्रभारी मंत्री धन सिंह रावत ने भी अधिकारियों को पुर्ननिर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए. उनका कहना है कि धाम में मास्टर प्लान की ड्रांइग के अनुसार 70 से 85 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है.

बहरहाल, इसमें कोई शंका नहीं है कि 2013 की आपदा के बाद केदारनाथ धाम में पुर्ननिर्माण के कार्य तेजी से चल रहे हैं, लेकिन कोरोना के कारण जरूर बीते दो वर्षों में पुर्ननिर्माण कार्य भी प्रभावित हुए है. इसके अलावा स्थानीय भूमि स्वामित्व जैसे मुद्दों के हल निकालना भी प्रशासन के लिए जरूरी है जिस पर अभी पुर्ननिर्माण कार्य के साथ ही बहुत कुछ किया जाना बाकी है. वैसे इस आपदा में 4000 से अधिक लोग मारे गए थे और इसकी यादभर से रोंगटे खड़े हो जाते हैं.

बड़ी खबर : उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला, तीन जिलों के लोगों के लिए चारधाम यात्रा खोलने का आदेश स्थगित

बद्रीनाथ चारों धामों में प्रमुख हैं.

Chardham Yatra: उत्तराखंड सरकार ने राज्‍य के तीन जिले के लोगों के लिए चारधाम यात्रा खोलने के अपने आदेश को स्थगित कर दिया है. इससे पहले सरकार ने चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी के लोगों के लिए यात्रा शुरू करने का ऐलान किया था.

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देहरादून. उत्तराखंड सरकार ने चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी के लोगों के लिए चारधाम यात्रा (Char Dham Yatra) खोलने के अपने आदेश को स्थगित कर दिया है. इस बाबत तीरथ सिंह रावत सरकार के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा, 'चारधाम यात्रा को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट (Nainital High Court) में सुनवाई चल रही है. 16 जून के बाद राज्य सरकार यात्रा खोलने पर फिर से विचार करेगी.

बता दें कि इससे पहले सरकार द्वारा चारधाम यात्रा को जिलास्तर पर अनुमति दी गई थी, लेकिन आरटी-पीसीआर निगेटिव रिपोर्ट जरूरी थी. सरकार ने जिन जिलों को यात्रा की अनुमति दी थी उनमें चमोली जिले के यात्री बद्रीनाथ धाम के दर्शन, रुद्रप्रयाग जिले की केदारनाथ धाम के दर्शन और उत्तरकाशी जिले के यात्री गंगोत्री यमुनोत्री धाम के दर्शन करने का नियम बनाया था. हालांकि सरकार ने अब आदेश स्थगित कर दिया है. फिलहाल केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में ​केवल पुजारियों को पूजा अर्चना संबंधी गतिविधियां कर पाने की अनुमति है.

उत्तराखंड में रियायतों के साथ 22 जून तक बढ़ा कोरोना कर्फ्यू
कोरोना संक्रमण के मामलों में कमी देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने 15 से 22 जून तक कुछ छूट के साथ कोरोना कर्फ्यू को बढ़ाने का ऐलान किया है. सरकार द्वारा दी गई छूट के तहत राजस्व कोर्ट में 20 केस तक की सुनवाई हो सकेगी. इसके अलावा, शादी और अंत्येष्टि में 50 लोगों की संख्या को अनुमति दी गई है. विक्रम ऑटो को चलाने की अनुमति दी गई है. 16, 18 और 21 जून को परचून, जनरल मर्चेंट की दुकानों के साथ ही शराब समेत अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठान भी खोले जाएंगे. इन दुकानों को खोलने का समय सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे तक रखा गया है. इसके अलावा, फल, सब्जी डेयरी और मिठाई की दुकानें रोज खुल सकेंगी. इन दुकानों की टाइमिंग भी सुबह आठ बजे से लेकर शाम पांच बजे तक होगी. इसके अतिरिक्त 16 और 21 जून को स्टेशनरी और किताबों की दुकानें भी खुली रहेंगी.

कोरोना पर ग्रामीण महिला ने गाया मार्मिक गढ़वाली गीत, खूब हो रहा है वायरल

रुद्रप्रयाग की सीमा गुसांई, जिनका वीडियो सॉंग वायरल हो रहा है.

सोशल मीडिया के ज़माने में किसी की भी प्रतिभा छुपी नहीं रह सकती. ऐसा ही हुआ रुद्रप्रयाग की सीमा गुसांई के साथ, जब उन्होंने एक गीत तैयार किया तो लोगों के बीच जाने का सबसे कारगर रास्ता उनके हाथ में ही था.

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रुद्रप्रयाग. कोरोना महामारी के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर कई तरह के अभियान चलाए गए और चल भी रहे हैं, लेकिन अब भी जागरूकता की ज़रूरत बनी हुई है. इस बीच, रुद्रप्रयाग ज़िले की एक ग्रामीण महिला ने कोरोना महामारी से जुड़ी स्थितियों पर एक मार्मिक गढ़वाली गीत गाया है, जो कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. इस गीत के बोल ऐसे हैं कि श्रोता भावुक हो रहे हैं.

रूद्रप्रयाग जनपद की छिनका गांव निवासी सीमा गुसांई ने कोरोना के इस दौर पर अपने गीत में बताती हैं कि कैसे कोरोना महामारी के कारण इन्सानों में दूरी बढ़ गई है, बच्चे अपने मां-बाप से दूर हो गए हैं, गांव में लोगों के बीच दूरियां बढ़ गई हैं और सभी लोगों ने अपने मुंह ढ़क लिये हैं. यही नहीं गीत में यह भी ज़िक्र है कि देवी-देवता भी महामारी के सामने बेबस दिख रहे हैं.

(यहां सुनिए और देखिए सीमा गुसांई का वायरल हो रहा गढ़वाली गीत)



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कैसे सोशल मीडिया तक आया यह गाना?
ग्रामीण महिला सीमा गुसांई का यह गाना सोशल मीडिया में सनसनी बन गया है. अब तक हज़ारों लोग इस गीत को देखने के बाद लाइक व शेयर कर चुके हैं. गीत के अन्त में सीमा ने लोगों को जागरूक करते हुए इस महामारी से लड़ने के लिए सोशल डिस्टेंन्स का पालन करने की अपील भी की है.

सीमा ने बताया कि उन्होंने गीत लिखा तो सबसे पहले उनके परिजनों को खूब भाया. सबकी सलाह पर रिकॉर्डिंग की गई और सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया. कुछ समय में ही लोगों ने उसे खासा पसंद किया. इससे सीमा का उत्साहवर्धन हुआ.

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न्यूज़18 क्रिएटिव


सीमा ने अपील करते हुए कहा कि कोरोना के खिलाफ सभी को एकजुट होना है. घबराना नहीं है बल्कि बचाव एवं जागरूकता से डटकर मुकाबला करना है. उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि ज़िम्मेदार नागरिकों का सहयोग प्राप्त होगा तो जल्द ही इस बीमारी से हम सभी उबर सकते हैं.

उत्तराखंड : रुद्रप्रयाग जिले में दो जगहों पर बादल फटे, कई घरों और दुकानों में मलबा भरा

बादल फटने से आई तबाही का एक नजारा.

सीएम तीरथ सिंह ने दोनों जिलाधिकारियों से कहा है कि वे स्थिति पर लगातार नजर रखें. लोक निर्माण विभाग, एनएच व बीआरओ को आदेश दिए गए हैं कि जो मार्ग बंद हो गए हों, उन्हें तत्काल खुलवाया जाए.

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रुद्रप्रयाग. रुद्रप्रयाग जिले से बड़ी खबर आ रही है. यहां भारी बारिश से नरकोटा समेत कई स्थानों पर बादल फटने की घटनाएं हुई हैं. बद्रीनाथ एनएच पर नरकोटा में बादल फटने से जहां राष्ट्रीय राजमार्ग बाधित हो गया, वहीं मार्ग में एक वाहन 4 सवारियों समेत मलबे में फंस गया. हालांकि इन चारों लोगों को स्थानीय लोगों ने मलबे से सुरक्षित निकाल लिया है. खबर है कि कई घरों और दुकानों में भी मलबा भर गया है. ग्रामीणों की खेती व बिजली, पानी की व्यवस्था को भारी नुकसान हुआ है. बताया जा रहा है कि एक बाइक इस मलबे में बह गई. दूसरी ओर फतेपुर, गैरसारी और कोटली से भी भारी बारिश व अतिवृष्टि से भारी नुकसान की खबरें आ रही हैं, लेकिन राहत वाली बात यह है कि फिलहाल जनहानि की कोई सूचना नहीं है.

मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश

इस बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने ट्वीट कर बताया कि रुद्रप्रयाग व उत्तरकाशी जिलों में बादल फट जाने की खबर का तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित जिलाधिकारियों से फोन पर जानकारी ली गई है. उन्हें प्रभावितों को तुरंत राहत और सहायता राशि अविलंब देने का निर्देश दिया गया है. सीएम तीरथ सिंह ने अपने दूसरे ट्वीट में जानकारी दी कि दोनों जिलाधिकारियों से कहा गया है कि वे स्थिति पर लगातार नजर रखें. लोक निर्माण विभाग, एनएच व बीआरओ को आदेश दिए गए हैं कि जो मार्ग बंद हो गए हों, उन्हें तत्काल खुलवाया जाए ताकि जनता को परेशानी न हो.

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के पहले ट्वीट का स्क्रीनशॉट.
मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के पहले ट्वीट का स्क्रीनशॉट.


उत्तरकाशी में कई मकान क्षतिग्रस्त

इस बीच समाचार एजेंसी एएनआई ने अपने ट्विटर हैंडल पर कुछ तस्वीरें साझा करते हुए बताया कि उत्तरकाशी के चिन्यालीसौड़ ब्लॉक के कुमारदा गांव में बादल फटने से कई मकान और सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं हैं. स्थानीय प्रशासन के अधिकारी मौके पर हैं.

VIDEO: बिजली के पोल के अंदर फंस गई थी ये 'खास' चिड़िया, 24 घंटे बाद किया गया रेस्क्यू

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में स्थानीय लोगों ने मैना को 24 घंटे बाद बिजली के पोल से जीवित बचा लिया.

रुद्रप्रयाग जिले के मक्कूमठ का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक पक्षी मैना को स्थानीय लोगों ने अपनी सूझबूझ से बिजली के खंभे से सुरक्षित निकाल लिया.

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रुद्रप्रयाग. आपने हाथी, शेर, भैंस या घोड़े के रेस्क्यू होते सुना होगा, लेकिन यहां पर हम आपको बता रहे हैं एक चिड़िया के रेस्क्यू के बारे में. मामला रुद्रप्रयाग जिले के मक्कूमठ में. जहां पर बिजली के खंभे में फंसी मैना चिड़िया (Myna bird) को 24 घंटे बाद जीवित निकाल लिया गया. मैना को बचाने का वीडियो वायरल हो गया है और ये वीडियो न्यूज 18 आपके लिए लाया है. इसमें एक पक्षी मैना 6 अप्रैल को बिजली के खंभे के अंदर गिर गई थी. पहले तो इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया. लेकिन 7 अप्रैल को भी जब खंबे के अंदर से  मैना के चीखने की आवाज आई तो लोगों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी. लेकिन विभागीय अधिकारियों ने भी एक चिड़िया के लिए कोई एक्शन लेना जरूरी नहीं समझा.



वन विभाग की ओर से जब पक्षी को रेस्क्यू करने कोई नहीं पहुंचा तो स्थानीय निवासी भुवन चन्द्र मैठाणी ने खुद पहल की और कटर की मदद से खंबे पर एक छोटी खिड़की काटी गई. ताज्जुब देखिए कि मैना कुछ ही देर बाद इस खिड़की पर आ गई. कुछ देर मैना खिड़की पर बैठकर ही इधर-उधर देखती रही और फिर रोज की तरह खुले आसमान में उड़ गई. शायद उसको भी विश्वास नहीं था कि वो बचा ली जाएगी.

उत्तराखंड वन विभाग यूं तो संकट में फंसी वाइल्ड लाइफ के लिए कई रेस्क्यू अभियान चलाता रहता है, लेकिन शायद इस मामले में उसे भी उम्मीद नहीं रही होगी कि ऐसा भी हो सकता है. एक चिड़िया को बचाने के इस प्रयास की फारेस्ट अफसर भी सराहना कर रहे हैं. उत्तराखंड वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट के चीफ जेएस सुहाग, फारेस्ट चीफ राजीव भरतरी ने वाइल्ड लाइफ को लेकर स्थानीय लोगों की इस संवेदनशीलता की सराहना की है.

उत्तराखंड इस समय भीषण फारेस्ट फ़ायर का सामना कर रहा है. फॉरेस्ट फायर से अभी तक 17 जानवरों की मौत हो चुकी है.इसमें वाइल्ड लाइफ का तो कोई आंकड़ा ही नहीं है. करीब 19 सौ हेक्टेयर क्षेत्रफल अभी तक आग की चपेट में आ चुका है.

रुद्रप्रयाग में नाबालिग बेटी से देह व्यापार कराने की दोषी मां समेत पांच अभियुक्तों को 10 वर्ष की कैद

नाबालिग से देह व्यापार कराने के पांच दोषियों को कोर्ट ने 10-10 साल की सजा सुनाई है.

सांकेतिक फोटो.

रुद्रप्रयाग (Rudraprayag) कि जिला अदालत ने नाबालिग बेटी से जबरन देह व्यापार कराने के एक मामले में पीड़ि‍ता की मां और शहर के एक होटल मालिक समेत पांच लोगों को दस साल की सजा (Punishment) सुनाई है. साथ ही अदालत ने सभी के ऊपर जुर्माना भी लगाया है.

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रुद्रप्रयाग. नाबालिग बेटी से जबरन देह व्यापार कराने के एक मामले में पीड़ि‍ता की मां और शहर के एक होटल मालिक समेत पांच लोगों को जिला न्यायालय (Court) ने दस वर्ष की कठोर कैद की सजा सुनाई है. साथ ही अर्थदंड की सजा भी लगाया है. 25 जून 2019 को कोतवाली रुद्रप्रयाग (Rudraprayag) में एक नाबालिग की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था.

नाबालिग पीड़ि‍ता ने पुलिस को बताया था कि उसकी मां अन्य लोगों के साथ मिलकर उससे जबरन देह व्यापार कराती है और इसकी एवज में पैसे लेती है. रुद्रप्रयाग शहर के एक होटल में यह काम पिछले कई समय से कराया जा रहा है. पीड़िता की तहरीर के आधार पर पुलिस ने पोस्को अधिनियम के तहत मामला पंजीकृत किया था. जांच के दौरान आरोपितों से पूछताछ की गई, जिसमें आरोपों की पुष्टि हुई थी.

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अब इस मामले में जिला न्यायाधीश हरीश गोयल की अदालत ने गुरुवार को होटल व्यापारी महेश खन्ना को पोस्को व अनैतिक कार्य कराने के मामले में दस वर्ष की कैद और दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है. पीड़ि‍ता की मां सरला देवी को पोस्को व अनैतिक कार्य करने के आरोप में दस-दस वर्ष की कठोर कारावास की सजा तथा पांच सौ व एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है.

इस मामले में शामिल बीना देवी को भी दस वर्ष की कैद व पंद्रह सौ रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है. कृत में शामिल प्रकाश राणा व राजेंद्र भंडारी को भी दस वर्ष की सजा व अर्थदंड की सजा सुनाई गई है. सभी सजा साथ-साथ चलेंगी. सरकार की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता सुदर्शन चैधरी ने मामले की पैरवी की थी.

उत्तराखंड: 17 मई से खुलेंगे बाबा केदारनाथ के कपाट, 25 मार्च से शुरू होगा घोडे़-खच्चरों का पंजीकरण

केदारनाथ धाम में दर्शन कराने लेकर जाने वाल घोड़े- खच्चरों का पंजीकरण 25 मार्च से शुरू होगा. (फाइल फोटो)

केदारनाथ (Kedarnath) धाम के कपाट 17 मई से खुल जाएंगे. इसके पहले 25 मार्च से घोडे-खच्चरों का पंजीकरण और लाइसेंस (License) की प्रक्रिया शुरू हो जाएगा. इसके साथ ही इस साल पैदल दर्शन करने जाने वालों को खास सहूलियत मिलेगी.

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रूद्रप्रयाग. ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग केदारनाथ (Kedarnath) के कपाट दो महीने बाद 17 मई को देश-विदेश के भक्तों के लिए खोल दिए जायेंगे. ऐसे में केदारनाथ यात्रा के लिए मात्र दो महीने बचे हैं. इसके लिए प्रशासन ने भी केदारनाथ यात्रा की तैयारी शुरू कर दी है. डीएम रूद्रप्रयाग (Rudraprayag) जहां यात्रा की तैयारियों को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं, वहीं आगामी 25 मार्च से यात्रियों को ढोने वाले घोडे और खच्चरों का पंजीकरण होगा और लाइसेंस प्रक्रिया शुरू की जायेगी.

यात्रा मार्ग में बढ़ेंगी सुविधाएं

केदारनाथ यात्रा के पैदल मार्ग का डीएम मनुज गोयल बीते दिनों पैदल निरीक्षण कर चुके हैं. निरीक्षण के दौरान डीएम ने गौरिकुंड से केदारनाथ तक पैदल मार्ग का निरीक्षण किया था, जिसमें डीएम ने पैदल मार्ग में पहली बार वाटर एटीएम लगाने के निर्देश दिए हैं. वहीं पैदल मार्ग को सुगम बनाने के साथ ही दुकानों और शौचालयों की संख्या बढ़ाने के भी निर्देश दिए हैं, ताकि पैदल मार्ग में तीर्थयात्रियों को सुविधा देकर उनकी यात्रा को सुगम बनाया जा सके.

चारधाम सड़क मार्ग में होगा सुधार

चारधामों को जाने वाले एनएच पर केन्द्र सरकार की महत्वकांक्षी योजना चारधाम सड़क परियोजना में भी कार्य समाप्ति की ओर है. केदारनाथ जाने वाले रूद्रप्रयाग-गौरिकुण्ड एचएच में रूद्रप्रयाग से लेकर कुंड तक कार्य 90 प्रतिशत हो चुका है. इसके कारण सड़क काफी चैड़ी और गुणवक्तापूर्ण बन चुकी है, वहीं कुण्ड से गौरिकुंड तक की सड़क में अभी कार्य चल रहा है, ऐसे में वाहन से भी पिछले वर्षों की अपेक्षा इस वर्ष यात्रा सुगम होगी.

CM तीरथ के फटी जींस वाले बयान पर उनकी पत्नी रश्मि त्यागी रावत ने दिया ये रिएक्शन

घोडे-खच्चरों का पंजीकरण व लाइसेंस प्रक्रिया होगी शुरू 

केदारनाथ धाम यात्रा के सफल संचालन हेतु पशुपालन और पंचायत विभाग द्वारा 25 मार्च से विभिन्न स्थानों पर शिविर आयोजित कर घोड़े-खच्चर मालिकों, हाॅकरों व श्रमिकों के पंजीकरण व लाइसेंस निर्गत किए जाएंगे. मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डाॅ. रमेश सिंह नितवाल ने बताया कि घोड़े-खच्चर मालिकों, हाॅकरों व श्रमिकों के पंजीकरण व लाइसेंस निर्गत करने सहित यात्रा के दृष्टिगत घोड़े-खच्चरों के स्वास्थ्य परीक्षण एवं बीमा हेतु विकास खंड ऊखीमठ के राऊंलेक, मैखंडा व छेनागाड़ में गुरुवार (25 मार्च) को शिविर आयोजित किए जाएंगे.

इसी तरह 31 मार्च को मनसूना, गौरीकुंड, जखोली बड़मा में 3 अप्रैल को सिरसौली, बड़ासू, चंद्रापुरी 6 अप्रैल को जालमल्ला, खुमेरा व नैनी पौंडार में यात्रा मार्ग पर चलने वाले घोड़े-खच्चर मालिकों, हाॅकरों व श्रमिकों के लाइसेंस पंजीकरण हेतु शिविर आयोजित किए जाएंगे. उन्होंने बताया कि कालीमठ, नारायणकोटी व नागजगई में 9 अप्रैल को, जाखधार व त्रियुगीनारायण में 16 अप्रैल को, ल्वारा व बांसवाड़ा में 19 अप्रैल तथा साल्या व बड़ेथ में 22 अप्रैल को शिविर आयोजित किए जाएंगे.
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