केदारनाथ: एक ऐसा गांव जहां आड़े-तिरछे हो गए हैं सभी घर! जानें इस तबाही की वजह

केदारनाथ के सीमी गांव में सभी घर आपदा के बाद आड़े तिरक्षे हो गए हैं.
केदारनाथ के सीमी गांव में सभी घर आपदा के बाद आड़े तिरक्षे हो गए हैं.

उत्तराखंड (Uttarakhand) के केदारनाथ (Kedarnath) आपदा 2013 को 7 साल पूरे हो चुके हैं. आपदा के 7 साल बाद भी इसके परिणाम झेल आज भी खौफ के साये में जी रहे हैं.

  • Share this:
रुद्रप्रयाग. उत्तराखंड (Uttarakhand) के केदारनाथ (Kedarnath) आपदा 2013 को 7 साल पूरे हो चुके हैं. आपदा में जहां कई लोगों को काल के गाल में समा गए. वहीं कई लोग 7 साल बाद भी इसके परिणाम झेल आज भी खौफ के साये में जी रहे हैं. बड़ी बात ये है कि इस गांव की ओर हमारे शासन प्रशासन का ध्यान ही नही गया. ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने उनकी चिंता नहीं की. क्योंकि ऐसा होता तो उनका विस्थापन कहीं किया जा चुका होता. लेकिन आपदा के 7 साल बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं. इस गांव में आज भी लोग आपदा के कारण आड़े-तिरछे हो चुके घरों में ही रहने को मजबूर हैं.

15-16 जून 2013 को केदारनाथ की वो महाजलप्रलय में हजारों लोग काल के गाल में समा गये थे. कई घर, दुकानें पत्तों की तरह मंदाकिनी नदी में बह गए. आपदा के बाद पीड़ितों पर मुआवजे का मरहम भी लगाया गया, लेकिन रूद्रप्रयाग जिले के गुप्तकाशी के पास सीमी भैंसारी ग्राम पंचायत को केदारनाथ आपदा ने ऐसे जख्म दिए जो कि आज भी नासुर बने हुए हैं. सीमी भैंसारी ग्रामपंचायत में ऐसा कोई मकान नहीं जिसपर बड़ी दरारें न हों, गांव में सभी घर आडे-तिरछे हो चुके हैं. तो वहीं पैदल रास्ते, आंगन के अलावा गांव से गुजरने वाला एनएच दिन प्रतिदिन घस रहा है.

भवनों में पड़ रही दरारें



स्थानीय निवासी संगिता सजवाण का कहना है कि गांव में उनकी गैस एजेंसी है, जिसकी दीवारों पर दरारें पड़ी हुई हैं, लेकिन बीते 7 सालों से उनका विस्थापन नहीं किया गया. सीमी गांव की ही उषा बर्तवाल कहती हैं कि केदारनाथ आपदा से सीमी गांव एनएच से जुड़े होने के कारण बड़े-बड़े होटलों और मकानों के लिए जाना जाता था. यात्रा रूट पर होने के कारण यहां लोगों ने लाखों रुपए ऋण लेकर निर्माण करवाया, लेकिन केदारनाथ आपदा के बाद गांव की जमीन घसने लगी और दिन-प्रतिदिन गांव के मकान टूट रहे हैं. गांव का भूगर्भीय सर्वेक्षण भी हो चुका है. विस्थापन की भी लम्बे समय से बात की जा रही है, लेकिन अब तक ऐसा कुछ नही हुआ.
विद्युत परियोजना से 'तबाही'

दरअसल गांव के नीचे मंदाकिनी नदी में एल एण्ड टी कम्पनी का पावर प्रोजक्ट बना है. आपदा के दौरान जलसैलाब जब इस प्रोजेक्ट के बांध से टकरा कर घुमा तो गांव की पहाड़ी इससे हिल गई. उसी दिन से पहाड़ी का धंसना शुरू को गया. सीमी गांव के 70 परिवारों के घर आड़े-तिरछे होकर उनमें दरारें पड़ गईं. जबकि भैंसारी गांव में करीब 11 परिवारों के घरों में दरारें पड़ी हुई हैं. जमीन धंसता देख गांव से गुजरने वाले रुद्रप्रयाग-गौरीकुण्ड़ एनएच को भी डायवर्ट किया जा रहा है.

'विस्थापन की जरूरत नहीं'

केदारनाथ विधायक मनोज रावत का कहना है कि सीमी गांव को विस्थापन नहीं पुनर्वास की जरूरत है, लेकिन सरकार और प्रशासन ने पीड़ित परिवारों से वर्षों से कोई सुध नहीं ली. जबकि गांव के तलहटी में बनी विधुत परियोजना ही गांव के विनाश का कारण बनी है, लेकिन न ही कम्पनी ने अबतक गांववालों की सुध ली न सरकार ने, वो कई बार इस मुद्दे को उठा चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए.

 

ये भी पढ़ें:
राजस्थान: पहली बार कोरोना वारियर के परिवार को मिली 50 लाख की मदद, पढ़ें- राज्य में कोविड-19 Update

राहत: राजस्थान में इस सत्र कॉलेज-यूनिवर्सिटी की नहीं बढ़ेगी फीस, आज से एडमिशन शुरू
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज