नक्शे और अभिलेखों से गुम है केदारनाथ का ये भू-भाग, अब की जा रही बंदोबस्ती
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नक्शे और अभिलेखों से गुम है केदारनाथ का ये भू-भाग, अब की जा रही बंदोबस्ती
उत्तराखंड के सैकड़ों हेक्टेयर का भू-भाग किसी नक्शे पर नहीं. (सांकेतिक तस्वीर)

गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग में रामबाड़ा पुल की दायीं तरफ से केदारनाथ धाम में मंदाकिनी-सरस्वती नदी के संगम तक का पूरा भू-भाग भू-लेखों से गायब है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 11, 2020, 5:47 PM IST
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रुद्रप्रयाग. वर्ष 2013 की आपदा के बाद केदारनाथ यात्रा (Kedarnath Yatra) शुरू करना संभव नहीं होता, अगर केदारनाथ (Kedarnath) के इस बड़े भू-भाग का उपयोग नहीं किया जाता. इस बड़े भू-भाग का किसी के पास कोई विवरण नहीं है. ये हिस्सा भारत के अंदर तो है, लेकिन किसी भी सरकारी मानचित्र (Official map) में आज तक दर्ज नहीं है. यह न ही किसी की निजी भूमि है, न राजस्व विभाग की भूमि और न ही वन विभाग की. ऐसे में ये भूमि बंदोबस्त से कैसे छूट गई - यह आज भी रहस्य है. स्थानीय विधायक का कहना है कि भविष्य में कोई तकनीकी परेशानी न आए, इसके लिए केदारनाथ में बंदोबस्त से छूटी भूमि का राजस्व परिषद को नक्शा जल्द से जल्द बनाना चाहिए.

जानें इस भू-भाग को
आइए सबसे पहले आपको इस भू-भाग के बारे में बताते हैं. गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग में रामबाड़ा पुल की दायीं तरफ से केदारनाथ धाम में मंदाकिनी-सरस्वती नदी के संगम तक का पूरा भू-भाग भू-लेखों से गायब है. लेकिन आपदा के बाद ये पूरा सैकड़ों हेक्टेयर का भू-भाग बड़ा महत्वपूर्ण साबित हुआ है. आपदा के बाद भीमबली से लेकर केदारनाथ तक पूरा नया पैदल मार्ग इसी भू-भाग पर बनाया गया है. इसके साथ ही छोटी लिम्चोली, बड़ी लिम्चोली, छानी कैम्प, रूद्रा पाइंट, नया घोड़ा पड़ाव जैसे आबादी वाले क्षेत्र भी इसी भू-भाग में बसाए गए हैं. वही स्थानीय तीर्थपुरोहितों का कहना है कि इस पूरे भू-भाग को बंदोबस्त करने के बाद राजस्व गांव बना तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए उपयोग में लाया जाना चाहिए.

अब महत्त्वपूर्ण है ये हिस्सा
पुराने समय में रामाबाड़ा-गरूड़चट्टी होते हुए पैदल यात्रा मार्ग था. उस समय ये भू-भाग विपरीत दिशा में होने के कारण यात्रा के लिहाज से महत्वपूर्ण नहीं था. और मुमकिन है कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों में बंदोबस्त करते समय संसाधनों के अभाव में इस भू-भाग को छोड़ दिया गया हो, लेकिन आज ये भू-भाग काफी महत्वपूर्ण हो गया है. ऐसे में नियम-कानूनों को ताक पर रख खुद प्रशासन ही इस सैकड़ों हेक्टयेर भू-भाग पर पैदल मार्ग से लेकर दुकानों, आवासों से लेकर हर तरह का निर्माण कार्य कर रहा है. डीएम वंदना सिंह का कहना है कि जो भू-भाग बंदोबस्त से छूट गया है, उसका राजस्व परिषद द्वारा सर्वे किया जा रहा है और नक्शा बनाने का काम किया जा रहा है.
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