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कश्मीर में जल रहे स्कूलों की तपिश से नैनीताल के बच्चे आहत, मांग रहे अमन चैन की दुआ
Pithoragarh News in Hindi

Mukesh Kumar | ETV UP/Uttarakhand
Updated: November 4, 2016, 5:20 PM IST
कश्मीर में जल रहे स्कूलों की तपिश से नैनीताल के बच्चे आहत, मांग रहे अमन चैन की दुआ
नैनीताल में शांति के लिए प्रार्थना करते बच्चे (Photo: ETV)

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर में इन दिनों खून खराबे के साथ स्कूल भी जलाये जा रहे हैं. नफरत और अलगाव की तपिश सिर्फ कश्मीर की शांत वादियों में ही नहीं बल्कि सैकड़ों मील दूर मासूमों को भी महसूस हो रही है. नैनीताल में एक स्कूल के बच्चे भी इस तपिश को महसूस कर रहे हैं और दुआ कर रहे हैं कि देश में अमन रहे.

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धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर में इन दिनों खून खराबे के साथ स्कूल भी जलाये जा रहे हैं. नफरत और अलगाव की तपिश सिर्फ कश्मीर की शांत वादियों में ही नहीं बल्कि सैकड़ों मील दूर मासूमों को भी महसूस हो रही है. नैनीताल में एक स्कूल के बच्चे भी इस तपिश को महसूस कर रहे हैं और दुआ कर रहे हैं कि देश में अमन रहे.

नैनीताल के इस्लामिया स्कूल के बच्चे तिरंगे की शान और देशभक्ति के बोल सुरों में पिरोकर कश्मीर में सुलग रहे स्कूलों की आग को ठंडा करने की कोशिश कर रहे हैं. कश्मीर की शांत वादियों में नफरत और अलगाव की आग से आहत से मासूम बच्चे आपसी सौहार्द और एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं. ये बच्चे आहत हैं सीमा पर चल रहे खूनी खेल से. क्योंकि इन्हें भी पता है कि आतंकी निर्दोष और मासूम लोगों की जान ले रहे हैं. नैनीताल के इस्लामिया स्कूल के बच्चे भारत के वीर सपूतों को सलाम कर रहे हैं तो साथ ही अमन और चैन के लिये दुआ भी कर रहे हैं.
सरोवरनगरी नैनीताल का इस्लामिया स्कूल अपने आप में खास है और शहर में इस तरह का इकलौता स्कूल भी. इस स्कूल में मुस्लिम बच्चों के साथ हिन्दू बच्चे भी पढ़ते हैं. बच्चों को संस्कृत के श्लोक पढ़ाये जाते हैं तो उर्दू भी सिखाई जाती है. आपस में मिल-जुल कर रहना इन्हें बचपन से ही सिखाया जा रहा है जिससे आपसी भेदभाव और दूरियों को मिटाया जा सके.
प्रिंसिपल जमाल सिद्दीकी कहती हैं कि कश्मीर घाटी में स्कूलों को जलाये जाने से ये बच्चे भी आहत हैं. हम इन्हें बचपन से ही आपसी सौहार्द और मेलजोल की तालीम दे रहे हैं. मुस्लिम बच्चे भी संस्कृत के श्लोक पढ़ते हैं तो हिन्दू बच्चे उर्दू सीख रहे हैं.

ये मासूम बच्चे सबक़ हैं उन लोगों के लिये जो धर्म की आड़ में नफरत का ज़हर घोलते हैं. क्योंकि इन बच्चों को सिर्फ यही पता है मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना. हिन्दी हैं हम वतन हैं हिन्दोस्तां हमारा.

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First published: November 4, 2016, 5:20 PM IST
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