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दो साल में 979 लोगों को सांप ने डसा, अस्पतालों में नहीं है दवाई

दो साल में 979 लोगों को सांप ने डसा, अस्पतालों में नहीं है दवाई

प्रदेशभर में जहरीले सांप हर साल सैकड़ों लोगों को डस रहे हैं. सर्पदंश की बढ़ती घटनाओं के बाद भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी वेनम यानि सर्प-विषरोधी दवाएं ही उपलब्ध नहीं है.

प्रदेशभर में जहरीले सांप हर साल सैकड़ों लोगों को डस रहे हैं. सर्पदंश की बढ़ती घटनाओं के बाद भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी वेनम यानि सर्प-विषरोधी दवाएं ही उपलब्ध नहीं है.

प्रदेशभर में जहरीले सांप हर साल सैकड़ों लोगों को डस रहे हैं. सर्पदंश की बढ़ती घटनाओं के बाद भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी वेनम यानि सर्प-विषरोधी दवाएं ही उपलब्ध नहीं है.

    प्रदेशभर में जहरीले सांप हर साल सैकड़ों लोगों को डस रहे हैं. सर्पदंश की बढ़ती घटनाओं के बाद भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी वेनम यानि सर्प-विषरोधी दवाएं ही उपलब्ध नहीं है.

    सांप डसने के बाद अगर वक्त रहते सर्प विषरोधी उपचार मिल जाए तो अधिकतर मामलों में जान बच जाती है. विशेषज्ञ बताते हैं कि जहरीले सांप जैसे किंग कोबरा के डसने के बाद तो पीड़ित के पास बेहद कम वक्त होता है.

    ऐसे में अगर उसे वक्त से इलाज नहीं मिला तो मौत निश्चित है. यह बात उत्तराखंड के स्वास्थ्य महकमे की समझ में नहीं आती. एक अध्ययन के मुताबिक सर्पदंश से होने वाली 97 फीसदी मौतें ग्रामीण क्षेत्रों में होती हैं. इसमें भी सर्वाधिक घटनाएं मानसून सीजन यानि जून से सितंबर तक दर्ज की जाती हैं. इसके बावजूद प्रदेशभर के समुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सर्प-विषरोधी दवाएं उपलब्ध ही नहीं हैं.

    ऐसे में जहरीले सांप की दवाओं को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के स्तर पर भी उपलब्ध होना चाहिए. सर्पदंश से अगर कोई मरीज दम तोड़ता है तो यकीनन अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजिमी है. दरअसल प्रदेश में भारी संख्या में लोग खेतों में काम करते हैं.  बारिश के मौसम में जब सांपों के रहने के स्थानों पर पानी भर जाता है तो सांप अपने बिलों से बाहर निकाल आते हैं.

    फिलहाल प्रशासनिक व्यवस्था इतनी जटिल है कि सर्पदंश पीड़ितों को समय रहते दवाएं नहीं मिल पाती है. प्रदेश के देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर में सांप के काटने की  ज्यादा घटनाएं सामने आती हैं. पिछले साल 2014 में जहरीले सांपों ने 709 लोगों को अपना निशाना बनाया था.

    सांपों के काटने से हर साल लोग दम तोड रहे हैं. 2015 में भी अभीतक के सात महीनों में 270 लोगों को सांप अपना निशाना बना चुके हैं. मगर हैरत की बात देखिए कि स्वास्थ्य महकमा प्रदेश के अस्पतालों में इंजेक्शन और दवाएं नहीं उपलब्ध करा पा रहा है.

    डीजी हेल्थ डॉ आरपी भट्ट का कहना है कि सभी अस्पतालों में सांप के काटने के इंजेक्शन और दवाओं को भेजने के निर्देश जारी किए गए हैं. डॉ भट्ट ने बताया कि है कि प्रदेश के सभी अस्पतालों को एक सप्ताह पहले ही दवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए गए हैं.

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