मरीज़ों को लेकर टिहरी झील के बीच अटक जाती है 108 बोट एंबुलेंस... सांसें रुक जाती हैं सवारों की

शुरुआती दौर में मरीज़ों को इस बोट एंबुलेंस सेवा का लाभ भी मिला लेकिन समय बीतने के साथ और एंबुलेंस बोट सेवा की मेन्टेन्स नहीं होने के चलते उसमें कई तकनीकि दिक्कतें सामने आने लगीं.

मेंटेंनेंस के अभाव में हुई खचाड़ा... कई बार तो रास्ते में हो गया है फ़्यूल ख़त्म

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टिहरी झील से सटे गांवों से मरीज़ों को झील के आर-पार ले जाने वाली 108 बोट एंबुलेंस सेवा ही मरीजों की जान पर आफत बनी हुई है. शासन प्रशासन की अनदेखी के चलते कई बार मरीज़, तीमारदार और 108 कर्मचारी अपनी जान गंवाते-गंवाते बचे हैं. दरअसल मेंटेंनेंस की कमी के चलते यह एंबुलेंस बोट कई बार मरीज़ को ले जाते समय रास्ते में ही खराब हो चुकी है. लेकिन ऐसे कई मामले सामने आने के बाद भी प्रशासन ने इसका समाधान नहीं ढूंढा है और अब फिर 108 एंबुलेंस सेवा चलाने वाली कंपनी के सिर ठीकरा फोड़ा जा रहा है.

फ़्यूल ख़त्म, बोट थमी 

बता दें कि टिहरी डैम की झील से सटे करीब 127 गांवों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के लिए झील के रास्ते भी बुलेंस सेवा शुरु की गई थी. 2 दिसंबर 2011 में राज्य की पहली 108 बोट एंबुलेंस सेवा टिहरी झील में शुरू की गई थी ताकि मरीज़ों को जल्द से जल्द स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाया जा सके.

शुरुआती दौर में मरीज़ों को इस बोट एंबुलेंस सेवा का लाभ भी मिला लेकिन समय बीतने के साथ और एंबुलेंस बोट सेवा की मेन्टेन्स नहीं होने के चलते उसमें कई तकनीकि दिक्कतें सामने आने लगीं. कई बार ऐसा हुआ कि तकनीकी दिक्कत या फ्यूल खत्म होने की वजह से से बोट एंबुलेंस सेवा बीच झील में खड़ी हो गई और मरीज़ के साथ-साथ तीमारदार, कर्मचारियों की सांसें अटक गईं.

टैक्सी कर मरीज़ को ले जाते हैं अस्पताल 

टिहरी झील से सटे थौलधार निवासी कुलदीप पंवार का कहना है कि शुरुआती दौर में 108 बोट एंबुलेंस सेवा से मरीजों को ख़ासा फ़ायदा मिला लेकिन बाद में देखरेख के अभाव में बोट एंबुलेंस सेवा खराब हो गई. हालत इतनी ख़राब है कि कई बार तो फ्यूल नहीं होने से बोट एंबुलेंस सेवा मरीजों को लाते-लाते बीच झील में रुक गई है. ऐसे में अन्य बोट से फ्यूल मंगाकर किसी तरह मरीज को कोटी पहुंचाया गया.

टिहरी झील में संचालित 108 बोट एबुंलेंस सेवा में ज़रूरी इक्विपमेंट्स न होने के चलते बोट एबुलेंस से मरीज़ को लाना खतरे से खाली नहीं होता है. दूसरी तरफ़ अब विभाग ने कोटी में भी कार एंबुलेंस सेवा को बंद कर दिया गया है जिससे मरीज़ों को अपने संसाधनों से टैक्सी कर मरीज़ को अस्पताल तक पहुंचाया पड़ता है.

अब 108 के प्रबंधन से बात करेंगी सीएमओ 

इस बाबत सीएमओ डॉक्टर सुमन आर्य से पूछा गया तो उन्होंने ठीकरा 108 एंबुलेंस सेवा संचालित करने वाली कंपनी के सिर फोड़ दिया. सीएमओ ने कहा कि वह इस संबंध में जल्द 108 के अधिकारियों के साथ वार्ता करेंगीं और 108 बोट एंबुलेंस सेवा को लेकर जो भी शिकायतें आ रही है उनका समाधान किया जाएगा.

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