बीमार चल रहे बौराड़ी जिला अस्पताल को इलाज की सख्त जरूरत
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बीमार चल रहे बौराड़ी जिला अस्पताल को इलाज की सख्त जरूरत
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रेफर सेंटर के नाम से मशहूर जिला अस्पताल बौराड़ी अब इतना बीमार हो चुका है कि उसे ही रेफर करने की जरूरत महसूस होने लगी है. ये हालात तब है जब जिला अस्पताल को हाल फिलहाल में ही शासन से 100 बैड की अनुमति मिल चुकी है. भले ही बेड बढ़ा दिए जाएं, लेकिन पुरानी बिल्डिंग का क्या होगा जिसकी दुर्दशा किसी बड़ी दुर्घटना को न्यौता दे रही है.

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रेफर सेंटर के नाम से मशहूर जिला अस्पताल बौराड़ी अब इतना बीमार हो चुका है कि उसे ही रेफर करने की जरूरत महसूस होने लगी है. ये हालात तब है जब जिला अस्पताल को हाल फिलहाल में ही शासन से 100 बैड की अनुमति मिल चुकी है. भले ही बेड बढ़ा दिए जाएं, लेकिन पुरानी बिल्डिंग का क्या होगा जिसकी दुर्दशा किसी बड़ी दुर्घटना को न्यौता दे रही है.

नई टिहरी शहर बसाते समय पुनर्वास और टीएचडीसी द्वारा लोगों से कई वायदे किए गए थे, जिसमें से एक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने का भी था. 2002 में अस्तित्व में आए जिला अस्पताल बौराड़ी का बोर्ड तो नरेन्द्रनगर से नई टिहरी आ गया, लेकिन डॉक्टरों सहित अन्य सुविधाएं आज तक जिला अस्पताल में मरीजों को नहीं मिल पा रही है. रेफर सेंटर बनकर रह गए जिला अस्पताल बौराड़ी की पुरानी बिल्डिंग की आज तक मरम्मत नहीं हो पाई है. दीवारों में दरारें आ गई हैं और छतों से बारिश का पानी टपकता है जिससे मरीज को कभी दाएं तो कभी बाएं शिफ्ट किया जाता है. पानी की निकासी नहीं होने के चलते फर्श पर पानी जमा रहता है, जिससे आए दिन छोटी मोटी दुर्घटनाएं होती रहती हैं.

प्रतापनगर से आए तीमारदार मुकेश सेमवाल का कहना है कि मरीज यहां आकर पहले से ज्यादा बीमार हो जाता है .जिसे बाद में रेफर कर दिया जाता है.



भले ही शासन द्वारा 40 बेड के जिला अस्पताल को अब 100 बेड का कर दिया हो, लेकिन मरीजों को बेहतर सुविधाओं के नाम पर सिर्फ यहां कुछ दिन रखकर रेफर टू हायर सेंटर कर दिया जाता है. स्टाफ द्वारा भी कई बार बिल्डिंग की मरम्मत के लिए कहा गया, लेकिन उच्च अधिकारियों द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया गया.
सीएमओ डॉ अर्जुन सिंह सेंगर का कहना है कि बिल्डिंग की दुर्दशा की उन्हें जानकारी है, उनका कहना है कि चिकित्सा प्रबंधन समिति को इसकी मरम्मत की जाए, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.

ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या 40 बेड से 100 बेड कर देने से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल जाएंगी और अस्पताल की बिल्डिंग की दुर्दशा के कारण यदि कोई दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा.
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