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टिहरी के विस्थापित, ना इधर के रहे ना उधर के

ETV UP/Uttarakhand
Updated: January 19, 2018, 12:21 PM IST
टिहरी के विस्थापित, ना इधर के रहे ना उधर के
टिहरी के विस्थापित

टिहरी बांध के 18 हजार विस्तापित अपने ही प्रदेश में दोहरे मापदंड के शिकार हो गए हैं. उन्हें वोट देने के अधिकार तक से वंचित कर दिया गया है.

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टिहरी बांध के 18 हजार विस्थापित अपने ही प्रदेश में दोहरे मापदंड के शिकार हो गए हैं. उन्हें वोट देने के अधिकार तक से वंचित कर दिया गया है.

विस्थापन के बाद दोहरी मार

80 के दशक में सरकार ने टिहरी बांध निर्माण के लिए हजारों लोगों को यहां से हटाया. ऋषिकेश के आस-पास के वन क्षेत्र में उनके पैतृक गांव के नाम पर ही गांव बना कर वन भूमि पर बसाया गया था. इनमें अब करीब 18 हजार विस्तापित रह रहे हैं. लेकिन ये बस्ती नगर निगम में शामिल नहीं की गयी.

मूल अधिकार भी नहीं मिले

इसके चारों ओर की बस्तियों मंशा देवी, गीतानगर, गुज्जर बस्ती, अमित ग्राम, मालवीयनगर बापू ग्राम, मीरानगर, बीस बीघा और नंदू प्लॉट को नगर निगम में शामिल कर लिया गया. लेकिन पशुलोक, आमबाग, श्यामपुर, डोबरा, असेना लक्कड़घाट अब भी बेसहारा हैं. अब ना इनका कोई प्रतिनिधि है ना ही कहीं कोई सुनवाई. हालत ये है कि टिहरी के ये विस्तापित अपने मूल अधिकारों से वंचित हो चुके हैं.

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First published: January 19, 2018, 12:21 PM IST
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