टिहरी: ऐतिहासिक परंपरा और संस्कृति के दम पर है अलग पहचान, वाटर एडवेंचर स्पोर्ट्स का बना हब
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टिहरी: ऐतिहासिक परंपरा और संस्कृति के दम पर है अलग पहचान, वाटर एडवेंचर स्पोर्ट्स का बना हब
टिहरी का धनोल्टी पर्यटकों के लिए बेहद खास है.

उत्‍तराखंड का टिहरी जिला (Tehri District) अपनी ऐतिहासिक परंपरा और संस्कृति (Culture) के लिए खास पहचान रखता है. टिहरी बांध, पयर्टक स्‍थल धनोल्टी और टिहरी की नथ गढ़वाल में अपनी अलग पहचान रखती है.

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टिहरी. गढ़वाल क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखने के साथ टिहरी जिला (Tehri District) अपनी ऐतिहासिक परंपरा और संस्कृति (Culture) के कारण जाना जाता है. हालांकि भले ही आज पुरानी टिहरी देश के विकास के लिए टिहरी डैम की झील में डुबो दिया गया हो, लेकिन टिहरी अभी भी अपनी अलौकिक सुंदरता और रीति-रिवाजों के लिए प्रसिद्ध है. राजा सुदर्शन शाह (Raja Sudarshan Shah) ने टिहरी को अपनी राजधानी बनाया था और उसके बाद उनके उत्तराधिकारी प्रताप शाह, कीर्ति शाह और नरेंद्र शाह के नाम पर प्रताप नगर, कीर्ति नगर और नरेंद्र नगर को स्थापित किया गया. इन तीनों ने 1815 से 1949 तक राज्य किया जिसके बाद टिहरी आजाद भारत में मिल गया.

पर्यटकों को लुभाती है ये बात
टिहरी में धनोल्टी सेम, मुखेम नाग, तिब्बा, देवप्रयाग, बूढ़ा केदार, सुरकंडा देवी ,चंद्रबदनी देवी, कुंजापुरी सिद्ध पीठ स्थित हैं, जहां पर्यटक दूर-दूर से पहुंचते हैं. जबकि टिहरी पहुंचने के लिए जौली ग्रांट सबसे नजदीक का हवाई अड्डा है, जो देहरादून में स्थित है. यही नहीं, जौली ग्रांट से टैक्सी द्वारा टिहरी की दूरी 93 किलोमीटर है, तो वहीं ऋषिकेश सबसे नजदीक का रेलवे स्टेशन है और यहां से टैक्सी या बस द्वारा सड़क मार्ग से टिहरी की दूरी 76 किलोमीटर है. इसके अलावा टिहरी, देहरादून, मसूरी, हरिद्वार, पौड़ी, ऋषिकेश और उत्तरकाशी से जुड़ा हुआ है जहां के लिए आसानी से टैक्सी और बस सर्विस उपलब्ध है.

टिहरी डैम के बाद नए शहर को हुआ उदय
पुरानी टिहरी के टिहरी डैम की झील में डूबने के बाद यहां के बाशिंदे ऋषिकेश, देहरादून और हरिद्वार आकर बस गए. इसके अलावा एक नए शहर (नई टिहरी ) का भी उदय हुआ है, तो टिहरी डैम की झील अब वाटर स्पोर्ट्स का एक बड़ा हब बन चुकी है, जहां हर वर्ष वाटर एडवेंचर स्पोर्ट्स के शौकीन बड़ी संख्या में पहुंचते हैं. टिहरी पहुंचने वाले पर्यटक टिहरी डैम का भी दीदार करते हैं जो उत्तराखंड, यूपी और दिल्ली के कई शहरों को बिजली देने के साथ ही उनकी पानी की जरूरतों को भी पूरा करता है. 42 वर्ग किलोमीटर में फैली टिहरी झील में वाटर एडवेंचर स्पोर्ट्स की सभी गतिविधियां होती हैं. इसके साथ ही यहां पर एरो और लैंड एडवेंचर स्पोर्ट्स की भी ट्रेनिंग होती है.



टिहरी झील में हर वर्ष लाखों की संख्या में लोग पहुंचते हैं और वोटिंग के साथ ही एडवेंचर स्पोर्ट्स का भी आनंद उठाते हैं. टिहरी डैम की झील पर ही प्रतापनगर को जोड़ने वाला डोबरा चांठी सस्पेंशन पुल है, जो अपने आप में तकनीकी का एक बेहतरीन उदाहरण है.


टिहरी की नथ है खास
आपको बता दें कि टिहरी की नथ गढ़वाल में अपनी अलग पहचान रखती है और इसकी डिमांड भी बहुत ज्यादा है. जबकि टिहरी की प्रसिद्ध मिठाई सिंगोरी का भी विशेष महत्व है यहां आने वाले पर्यटक सिंगोरी खाने के साथ ही इसे अपने साथ ले जाना बहुत पसंद करते हैं. यहां धनोल्टी (Dhanaulti) में फरवरी के दिनों दूरदराज से पर्यटक पहुंचते हैं और प्राकृतिक सुंदरता के साथ ही बर्फबारी का भी आनंद उठाते हैं. इसी कारण धनोल्टी को पर्यटन नगरी कहा जाता है.

राजधानी देहरादून के सबसे नजदीक का पहाड़ी जिला भी टिहरी है जिस कारण यहां आने जाने के लिए कई साधन उपलब्ध हैं. वहीं, अब जौली ग्रांट से टिहरी के लिए हवाई सेवा भी शुरू की गई है जो कि सप्ताह में 3 दिन चलती है.


बहरहाल, पुरानी टिहरी के टिहरी डैम की झील में डूबने के बाद जो शहर बसाया गया उसे नई टिहरी नाम दिया गया और मास्टर प्लान के तहत चंडीगढ़ की तर्ज पर इस शहर का निर्माण किया गया. वहीं, यहां मूलभूत सुविधाओं के साथ हर उस चीज का ध्यान रखा गया जो एक मास्टर प्लान सिटी में होती है.
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