मास्टर प्लान से बने टिहरी का ड्रेनेज सिस्टम फ़ेल, बरसात में निचले इलाकों में भर जाता है पानी

नई टिहरी नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी राजेंद्र सिंह सजवाण इसकी सारी जिम्मेदारी पुर्नवास विभाग की बता रहे हैं.

Saurabh Singh | News18 Uttarakhand
Updated: July 4, 2018, 8:22 PM IST
मास्टर प्लान से बने टिहरी का ड्रेनेज सिस्टम फ़ेल, बरसात में निचले इलाकों में भर जाता है पानी
नई टिहरी (फ़ाइल फ़ोटो)
Saurabh Singh | News18 Uttarakhand
Updated: July 4, 2018, 8:22 PM IST
मास्टर प्लान के तहत चंडीगढ़ की तर्ज पर बसाए गए नई टिहरी शहर में योजनाकारों की भूलों का खामियाजा हर वर्ष बरसात में नई टिहरीवासियों को भुगतना पड़ता है जिससे नई टिहरी शहर के मास्टर प्लान पर ही सवाल खड़े होते है. नई टिहरी शहर का ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह से फेल होने के चलते शहर के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है लेकिन किसी का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है.. इसका खामियाजा भविष्य में किसी बड़ी आपदा के रूप में शहरवासियों को चुकाना पड़ सकता है.

नई टिहरी शहर को आधुनिक ढंग से मास्टर प्लान के तहत बसाने का कार्य 1983 से शुरू हुआ और आने वाले कई वर्षों तक किसी प्रकार की कोई समस्या न हो इसके लिए उचित संसाधन विकसित किए गए. लेकिन योजनाकार पानी की निकासी यानी ड्रेनेज सिस्टम को तैयार करने में नाकाम रहे जिसके चलते आज बरसात में नई टिहरीवासियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

आबादी बढ़ने के साथ साथ शहर में निर्माण कार्य भी बढ़े लेकिन किसी ने ड्रेनेज सिस्टम को ओर ध्यान नहीं दिया. इसकी वजह से बरसात में पानी की निकासी न होने के चलते सड़कें पानी से लबालब हो जाती हैं और कॉलोनियों में छोटे-छोटे तालाब बन जाते हैं.

लगातार होने वाली बारिश में पानी अपना रास्ता खुद बनाने लगता है और शहर के निचले हिस्सों में भारी मुश्किलें पैदा होने लगती हैं. सड़कें, पुश्ते टूटने लगते हैं और निचली कॉलोनियों में पानी घुस जाता है.

मास्टर प्लान के तहत नई टिहरी शहर बसाने के लिए 1100 हेक्टेयर ज़मीन का अधिग्रहण किया जाना था लेकिन योजनाकारों की भूल और शहर बसाते समय हुई राजनीति के फलस्वरूप सिर्फ 400 हेक्टेयर ज़मीन पर ही पूरा शहर सिमट कर रह गया. नरेन्द्रनगर से सरकारी दफ्तरों के शिफ्ट होने के बाद बिल्डिगों और आवासीय कॉलोनियों का निर्माण धड़ल्ले से हुआ लेकिन ड्रेनेज सिस्टम को सुधारने और बढ़ाने की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया.

इसकी वजह से नाले और नालियां अतिक्रमण की जद में आ गई. नई टिहरी नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी राजेंद्र सिंह सजवाण इसकी सारी जिम्मेदारी पुर्नवास विभाग की बता रहे हैं और बरसात में नाले और नालियों की सफ़ाई की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं.

जिस शहर को चंडीगढ़ की तर्ज पर बसाने के लिए मास्टर प्लान बनाया गया था, आज उस मास्टर प्लान पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं. यदि समय रहते शहर के ड्रेनेज सिस्टम को सुधारा नहीं गया तो हर बरसात की तरह इस बरसात में भी शहरवासियों को खासी दिक्कतों को सामना करना पड़ सकता है. और ये दिक्कतें भविष्य में किसी बड़ी आपदा का कारण भी बन सकती है.
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