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टिहरी झील किनारे प्यासे हैं लोग

Saurabh Singh | ETV UP/Uttarakhand
Updated: November 12, 2017, 6:59 PM IST
टिहरी झील किनारे प्यासे हैं लोग
टिहरी झील के आसपास के इलाकों में पानी सप्लाई नहीं

एशिया की सबसे बड़ी झीलों में शुमार टिहरी झील, उत्तर प्रदेश और दिल्ली तक के लोगों की प्यास बुझाती है. लेकिन इसके आसपास बसे लोग प्यासे हैं. उन्हें टिहरी झील से पानी नहीं मिलता. ये लोग नदी-नालों और झरनों पर निर्भर हैं. यहां बच्चे तक सिर पर पानी ढो रहे हैं.

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एशिया की सबसे बड़ी झीलों में शुमार टिहरी झील, उत्तर प्रदेश और दिल्ली तक के लोगों की प्यास बुझाती है. लेकिन इसके आसपास बसे लोग प्यासे हैं. उन्हें टिहरी झील से पानी नहीं मिलता. ये लोग नदी-नालों और झरनों पर निर्भर हैं. यहां बच्चे तक सिर पर पानी ढो रहे हैं.

टिहरी झील से सटे जाखणीधार, कोटेश्वर, सारज्यूला, पांगरखाल और नयी टिहरी में लोगों को पीने के लिए साफ पानी नहीं मिल पाता. जीरो प्वाइंट से जल संस्थान ने पेयजल आपूर्ति के लिए प्लांट लगाया है. अफसर कहते हैं कि पानी को फिल्टर कर ड्रिस्ट्रीब्यूट किया जाता है. लेकिन लोगों का मानना है कि झील का पानी पीने योग्य नहीं है. कई बार गंदा पानी सप्लाई कर दिया जाता है और कई बार तो ये हालात रहते हैं कि कई दिन तक पानी ही नहीं सप्लाई किया जाता. इसलिए ये मजबूर हैं मीलों दूर से पानी ढोने के लिए.

टिहरी झील से सटे हुए जाखणीधार में तो पानी की सबसे ज़्यादा दिक्कत है. यहां अब तक पानी सप्लाई की  ठोस व्यवस्था नहीं है. इस पूरे इलाके में छोटे बच्चे तक पानी ढोते देखे जा सकते हैं. ये बच्चे  रोज 4 से 6 किलोमीटर दूर पानी भरने जाते हैं और  फिर स्कूल जाते हैं.

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First published: November 12, 2017, 6:59 PM IST
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