जंगली जानवरों के आतंक से किसान खेती छोड़ने को हुए मजबूर

Saurabh Singh | ETV UP/Uttarakhand
Updated: December 1, 2015, 3:11 PM IST
जंगली जानवरों के आतंक से किसान खेती छोड़ने को हुए मजबूर
जहां एक तरफ राज्य सरकार खेती को बढ़ावा देने के लिए नई-नई योजनाएं बना रही है और किसानों को हरसंभव मदद देने की बात कह रही है, वहीं दूसरी ओर जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठा रही है.

जहां एक तरफ राज्य सरकार खेती को बढ़ावा देने के लिए नई-नई योजनाएं बना रही है और किसानों को हरसंभव मदद देने की बात कह रही है, वहीं दूसरी ओर जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठा रही है.

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जहां एक तरफ राज्य सरकार खेती को बढ़ावा देने के लिए नई-नई योजनाएं बना रही है और किसानों को हरसंभव मदद देने की बात कह रही है, वहीं दूसरी ओर जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठा रही है.

टिहरी गढ़वाल में तो जंगली जानवरों का आतंक इतना बढ़ गया है कि लोग खेती छोड़कर अन्य व्यवसाय करने को मजबूर हो गए हैं. चंबा काणाताल फलपट्टी क्षेत्र अपनी खेती के लिए मशहूर है, जहां मटर, गोभी, आलू, हरी सब्जियां और सेब, आड़ू की बड़े पैमाने पर खेती की जाती है और करीब 95 प्रतिशत लोग खेती के सहारे ही अपना पेट भरते हैं.

यहां की मटर और हरी सब्जियों की सप्लाई टिहरी गढ़वाल में ही नहीं बाहर भी की जाती है, लेकिन पिछले कुछ महीने से इस क्षेत्र में जंगली जानवरों का आतंक इतना बढ़ गया है कि लोग अब खेती करना छोड़ रहे हैं और अन्य व्यवसाय कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं.

जंगली जानवरों द्वारा खड़ी फसलों को पहुंचाए जा रहे नुकसान से किसानों को भारी आर्थिकी संकट से गुजरना पड़ रहा है. सिलोगी, चोपड़ियाल, गुनोगी, सिलकोटी, कखवाड़ी गांव तो ऐसे हैं जहां लोगों ने अब खेती करना पूरी तरह बंद कर दिया है और खेत बंजर पड़े हुए हैं. स्थानीय निवासी कुशाल सिंह का कहना है सबसे अधिक सुअर द्वारा खड़ी फसलों को बर्बाद कर दिया जाता है और बंदरों द्वारा बीज निकालकर खा लिए जाते हैं, जिससे किसान परेशान हैं.

चंबा काणाताल फलपट्टी क्षेत्र के किसान जंगली जानवरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए कई बार वन विभाग से गुहार लगा चुके हैं. परेशान किसानों और ग्रामीण महिलाओं द्वारा 14 अक्टूबर को नई टिहरी जिला कलेक्ट्रेट भी कूच की गई और प्रदर्शन किया गया था और जंगली जानवरों से फसलों को हो रहे नुकसान का मुआवजा और वन विभाग से क्षेत्र में ताड़बाड़ कर जंगली जानवरों से निजात दिलाने की मांग की गई, लेकिन विभाग द्वारा ग्रामीणों को सिर्फ आश्वासन मिला धरातल पर कोई काम नहीं हुआ.

डीएफओ डॉ आरपी मिश्रा भी जंगली जानवरों के आतंक की बात मान रहे हैं और दीवार बनाने का 4 करोड़ का एस्टीमेट शासन में भेजे जाने की बात कह रहे हैं. अब देखने वाली बात ये होगी कि शासन से कब पैसा मिलेगा और कब वन विभाग धरातल पर इस ओर कोई कदम उठाएगा.

यदि हालात ऐसी ही रहे तो वो दिन दूर नहीं जब अपनी मटर और हरी सब्जियों से एक अलग पहचान रखने वाला चंबा काणाताल फलपट्टी क्षेत्र अपनी पहचान खो चुका होगा और यहां के हरे भरे खेत बंजर हो जाएंगे.

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First published: December 1, 2015, 3:11 PM IST
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