स्टाफ की कमी के चलते जंगल की आग बुझाने में फेल हो रहा वन विभाग

वन विभाग वनाग्नि रोकने के नए- नए एक्सपेरिमेंट तो कर रहा है, लेकिन कर्मचारियों की कमी का भी रोना रो रहा है.

Saurabh Singh | News18 Uttarakhand
Updated: May 23, 2018, 4:26 PM IST
स्टाफ की कमी के चलते जंगल की आग बुझाने में फेल हो रहा वन विभाग
टिहरी जिले में अभी तक जंगलों में आग की 54 घटनाएं सामने आ चुकी हैं.
Saurabh Singh | News18 Uttarakhand
Updated: May 23, 2018, 4:26 PM IST
फायर सीजन में जंगलों की रोकने के वन विभाग के सभी दावे फेल होते नजर आ रहे हैं. लाखों की वन सम्पदा जलकर खाक हो गई है, लेकिन वन विभाग वनाग्नि रोकने के सिर्फ हवाई दावे कर रहा है. अकेले टिहरी जिले में अभी तक 54 घटनाएं हो चुकी हैं. जिसमें कई हेक्टेयर जंगल राख हो चुके हैं. वन विभाग वनाग्नि रोकने के नए- नए एक्सपेरिमेंट तो कर रहा है, लेकिन कर्मचारियों की कमी का भी रोना रो रहा है.

टिहरी जिले में 2 लाख 31 हजार 517 हेक्टेयर क्षेत्र रिजर्व फोरेस्ट और 1लाख 5 हजार 127 हेक्टेयर क्षेत्र सिविल फोरेस्ट के अंतर्गत आता है. जिसमें करीब 80 हजार हेक्टेयर से अधिक चीड़ का जंगल शामिल है जो कि वनाग्नि का मुख्य कारण माना जाता है.



चीड़ के पेड़ से गिरने वाला पीरूल हल्की चिंगारी को भी तेजी से पकड़ता है और जंगल के जंगल तबाह कर देता है. पिछले सात सालों के डाटा के अनुसार इस साल पीरूल की मात्रा बढ़ी है. जिससे जंगलों में आग की घटनाएं भी बढ़ रही है.

जिले में सबसे अधिक जाखणीधार, प्रतापनगर और घनसाली में जंगलों में आग धधक रही है और कई हेक्टेयर भूमि जलकर खाक हो चुकी है. विभाग का कहना है कि इस वर्ष पीरूल अधिक है जिस कारण आग की घटनाएं बढ़ रही है, लेकिन कर्मचारियों की कमी के चलते विभाग को और अधिक परेशानी हो रही है.

वन विभाग द्वारा हर वर्ष जंगलों को आग से बचाने के लिए नए-नए एक्सपेरिमेंट तो किए जाते हैं, लेकिन फायर सीजन में वो कारगर साबित नहीं हो पाते हैं. वनाग्नि के कारण जहां जंगल धूं-धूं कर जल रहे हैं, वहीं इसका नुकसान जंगली जानवरों सहित पर्यावरण को भी हो रहा है. जिससे पर्यावरण में प्रदूषण बढ़ रहा है. लोगों में भी सांस की बीमारी, आंखों में जल और बच्चों में एलर्जी की शिकायत मिल रही है. जिससे अस्पतालों में भी मरीजों की संख्या बढ़ रही है.
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...