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हिल टॉप व्हिस्की प्लांटः स्थानीय लोगों को न रोज़गार मिला, न पानी... शराब प्लांट के लिए खींची पाइप लाइन

मुख्यमंत्री दावा कर रहे हैं कि शराब की बॉटलिंग के इस प्लांट से स्थानीय लोगों का भला होगा, उन्हें रोज़गार मिलेगा और स्थानीय उत्पादों की यहां खपत होगी. लेकिन ये दावे ज़मीन पर सही नज़र नहीं आते.

मुख्यमंत्री दावा कर रहे हैं कि शराब की बॉटलिंग के इस प्लांट से स्थानीय लोगों का भला होगा, उन्हें रोज़गार मिलेगा और स्थानीय उत्पादों की यहां खपत होगी. लेकिन ये दावे ज़मीन पर सही नज़र नहीं आते.

मुख्यमंत्री दावा कर रहे हैं कि शराब की बॉटलिंग के इस प्लांट से स्थानीय लोगों का भला होगा, उन्हें रोज़गार मिलेगा और स्थानीय उत्पादों की यहां खपत होगी. लेकिन ये दावे ज़मीन पर सही नज़र नहीं आते.

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Devprayag whisky plant, रोज़गार तो छोड़िए स्थानीय लोगों को पानी तक उपलब्ध नहीं हुआ जबकि शराब प्लांट के लिए नदी से अलग पाइप लाइन खींची गई है.
देवप्रयाग में शराब प्लांट की अनुमति कब और किसने दी इस पर सियासत जारी है. बीजेपी कह रही है कि कांग्रेस के समय में इसकी अनुमति दी गई और कांग्रेस कर रही है कि बीजेपी सरकार ने इसे रिन्यू किया है. मुख्यमंत्री दावा कर रहे हैं कि शराब की बॉटलिंग के इस प्लांट से स्थानीय लोगों का भला होगा, उन्हें रोज़गार मिलेगा और स्थानीय उत्पादों की यहां खपत होगी. लेकिन ये दावे ज़मीन पर सही नज़र नहीं आते. रोज़गार तो छोड़िए स्थानीय लोगों को पानी तक उपलब्ध नहीं हुआ जबकि शराब प्लांट के लिए नदी से अलग पाइप लाइन खींची गई है.


Devprayag whisky plant, रोज़गार तो छोड़िए स्थानीय लोगों को पानी तक उपलब्ध नहीं हुआ जबकि शराब प्लांट के लिए नदी से अलग पाइप लाइन खींची गई है.
देवप्रयाग विधानसभा के डडुवा ग्रामसभा में पानी की इतनी कमी है कि इसकी कमी से खेत बंजर हो रहे हैं और लोगों को पानी के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है.


Devprayag whisky plant, रोज़गार तो छोड़िए स्थानीय लोगों को पानी तक उपलब्ध नहीं हुआ जबकि शराब प्लांट के लिए नदी से अलग पाइप लाइन खींची गई है.
लोगों को गांव से दो-ढाई किलोमीटर की दूरी पर स्थित प्राकृतिक स्रोत से पानी लाना पड़ता है या फिर इतनी ही दूरी तय कर हैंडपंप से.


Devprayag whisky plant, रोज़गार तो छोड़िए स्थानीय लोगों को पानी तक उपलब्ध नहीं हुआ जबकि शराब प्लांट के लिए नदी से अलग पाइप लाइन खींची गई है.
हरीश रावत सरकार में एक निजी कम्पनी को डडुवा गांव में औद्योगिक प्रयोजन से लगभग 4 हैक्टेयर ज़मीन दी गई थी. कहा तो यह गया था कि यहां मिनरल वॉटर और बीयर की बॉटलिंग की जाएगी लेकिन हो रही है ह्विस्की और रम की बॉटलिंग की. स्थानीय ग्रामीणों के विपरीत प्लांट को पानी की कोई कमी नहीं है.


Devprayag whisky plant, रोज़गार तो छोड़िए स्थानीय लोगों को पानी तक उपलब्ध नहीं हुआ जबकि शराब प्लांट के लिए नदी से अलग पाइप लाइन खींची गई है.
प्लांट को पानी की सप्लाई के लिए नदी से एक पाइप लाइन डालकर पानी खींचा जा रहा है. यही नहीं जिन पहाड़ी क्षेत्रों से शराब नहीं रोज़गार दो और शराब नहीं पानी दो के नारों पर आंदोलन बुलंद हुए उसी पहाड़ में अपनी सरकारें इसके उलट चलकर पानी नहीं शराब देंगे की तर्ज पर चल रही हैं.


Devprayag whisky plant, रोज़गार तो छोड़िए स्थानीय लोगों को पानी तक उपलब्ध नहीं हुआ जबकि शराब प्लांट के लिए नदी से अलग पाइप लाइन खींची गई है.
मुख्यमंत्री दावा कर रहे हैं कि इस प्लांट से स्थानीय लोगों को रोज़गार मिलेगा लेकिन ज़मीन पर यह भी झूठा साबित हो रहा है. प्लांट में काम करने वाले लोग स्थानीय बाहरी हैं. यह त्रासदी ही है कि विपक्ष में रहकर विरोध और सत्ता में आने पर समर्थन बीजेपी-कांग्रेस का चरित्र उत्तराखंडियों को हाशिए पर धकेलता जा रहा है और देवभूमि का दोहन करने वालों के लिए रेड कार्पेट बिछा रहा है.

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सीएम धामी ने कहा - उत्तराखंड को बनाया जाएगा आध्यामिक और सांस्कृतिक राजधानी

टिहरी दौरे पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी.

सीएम ने कहा कि टिहरी झील में सी-प्लेन उतारने के लिए सरकार योजना बना रही है. देहरादून से टिहरी तक टनल बनाने के प्रस्ताव को केंद्र सरकार से सहमति मिल गई है और आने वाले समय में इससे पर्यटन को और बढ़ावा मिलेगा.

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टिहरी गढ़वाल. टिहरी दौरे पर पहुंचे सीएम पुष्कर सिंह धामी ने टिहरीवासियों को कई बड़ी सौगात दी और कहा कि उत्तराखंड को आर्थिक रूप से विकसित करते हुए आध्यात्मिक और सांस्कृतिक राजधानी बनाएंगे. उन्होंने बताया कि टिहरी झील को पर्यटन की दृष्टि से डेवलेप करते हुए विश्व मानचित्र पर अलग पहचान दिलाने के लिए केंद्र सरकार मेगा प्रोजेक्ट पर काम कर रही है और जल्द ही इसका परिणाम सभी के सामने होगा.

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने सबसे पहले टिहरी झील पहुंचकर बोटिंग का लुत्फ उठाया, फिर झील पर बने डोबरा चांठी पुल और फ्लोटिंग हट्स का निरीक्षण किया. नई टिहरी में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने 1 अरब 64 करोड़ की योजनाओं को लोकार्पण और शिलान्यास किया. सीएम धामी ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि लगातार जिलों का दौरा कर रहा हूं, जनता की समस्याएं सुन रहा हूं और उन समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास कर रहा हूं. टिहरी डैम बनने के समय में भी मैं यहां आया था और अब सीएम बनने पर आया हूं. देश के विकास के लिए टिहरी डैम का निर्माण हुआ और टिहरीवासियों ने इसमें सबसे बड़ा योगदान दिया, जिसे भुलाया नहीं जा सकता है. टिहरी डैम की झील से प्रभावित लोगों की समस्याओं के लिए सरकार गंभीर है और टिहरी झील से प्रभावित लोगों के पुनर्वास की कार्रवाई की जा रही है.

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टिहरी झील में सी-प्लेन की योजना

सीएम ने कहा टिहरी झील में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, जिसके लिए प्लानिंग के तहत काम किया जा रहा है. केंद्र सरकार के मेगा प्रोजेक्ट के तहत 1200 करोड़ से टिहरी झील और आसपास के क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को डेवलेप किया जा रहा है, जिससे टिहरी झील पर्यटन की दृष्टि से विश्व मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बनाएगी. टिहरी झील में सी-प्लेन उतारने के लिए सरकार योजना बना रही है. देहरादून से टिहरी तक टनल बनाने के प्रस्ताव को केंद्र सरकार से सहमति मिल गई है और आने वाले समय में इससे पर्यटन को और बढ़ावा मिलेगा. अब सरकार जो योजनाएं बना रही है उसे आगे 10 वर्षों को देखकर तैयार किया जा रहा है, जिससे जनता को इसका ज्यादा से ज्यादा लाभ मिल सके.

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सीएम से मुलाकात के बाद चारधाम के पुरोहितों धरना स्थगित

चारों धाम के तीर्थपुरोहितों से मैंने आज मुलाकात की है और कमेटी द्वारा उनकी मांगों पर विचार किया जा रहा है. मेरे आश्वासन पर उन्होंने अपना धरना स्थगित कर दिया है. चारधाम यात्रा को लेकर अब हाईकोर्ट में सुनवाई होने वाली है. हमें उम्मीद है जल्द चारधाम यात्रा शुरू हो जाएगी. सीएम धामी ने कहा कि साधु-संत समाज और जनता के सहयोग से सरकार द्वारा प्रयास किया जा रहा है कि उत्तराखंड को आध्यामिक और सांस्कृतिक राजधानी बनाया जाए.

Uttarakhand: टिहरी डैम का जलस्तर बढ़ने के साथ बीमारियों की आशंकाएं भी बढ़ीं

टिहरी का जलस्तर बढ़ चुका है और उसकी सफाई भी नहीं हुई है.

टिहरी डैम की झील का जलस्तर बढ़ने से टिहरी झील से सटे गांवों में बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. टिहरी झील से सटे प्रतापनगर, थौलधार, मदननेगी क्षेत्र में इन दिनों वायरल का प्रकोप देखा जा रहा है. वायरल और कोविड का सिमटम एक होने के चलते भी लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है.

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टिहरी. लगातार हो रही बारिश से टिहरी डैम की झील का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. इससे बाढ़ का खतरा तो है ही, झील से सटे गांवों में संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ने लगा है. टिहरी झील की सफाई नहीं होने से झील किनारे झाड़ियां बढ़ने से कई तरह के बैक्टरियां पनप रहे हैं और दूषित पीने के पानी से लोगों में कई तरह की बीमारियां बढ़ रही हैं. इसका सबसे अधिक असर बच्चों में देखा जा रहा है. टिहरी झील से सटे प्रतापनगर, थौलधार और मदननेगी क्षेत्र के अधिकतर गांवों में स्थिति नाजुक बनी है और कोरोना महामारी के चलते भी ग्रामीणों में दहशत का माहौल है. सीजनल वायरल में लोगों को कोराना का डर दिख रहा है. लेकिन टीएचडीसी और स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

प्रताप नगर के रहनेवाले प्रदीप रमोला और थौलधार के रहनेवाले खेमसिंह चौहान भी संक्रामक बीमारियों की आशंका जता रहे हैं. वे कहते हैं कि उनके इलाके में कई लोग बीमार हैं. उनकी शिकायत है कि टिहरी झील की सफाई और झील के किनारे दवाओं का छिड़काव कुछ वर्षों पहले तक टीएचडीसी द्वारा कराया जाता और स्वास्थ्य विभाग को भी दवाओं के लिए बजट मुहैया कराया जाता था, लेकिन अब टीएचडीसी ने हाथ खड़े कर दिए हैं और स्वास्थ्य विभाग ने भी सीमित संसाधनों का हवाला दे क्षेत्र में छिड़काव और दवाएं सीमित कर दिया है. सीएमओ संजय जैन का कहना है कि बच्चों की लगातार स्क्रिनिंग कराई जा रही है और कोविड टेस्ट भी कराया जा रहा है. अभी तक स्थिति सामान्य बनी हुई है.

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टिहरी डैम की झील का जलस्तर बढ़ने के साथ-साथ टिहरी झील से सटे गांवों में परेशानियां बढ़ने लगती हैं और अब वायरल फीवर के चलते लोग दहशत में हैं. ऐसे में कोरोना काल में स्वास्थ्य विभाग और टीएचडीसी की लापरवाही भविष्य में ग्रामीणों पर भारी पड़ सकती है.

VIDEO में देखिए कैसे सड़क वॉश आउट होकर बन गई झरना, टिहरी में दो नेशनल हाईवे बंद

यह झरना नहीं, टिहरी के हाईवे की हालत है.

Uttarakhand Rainfall : आसमान से बरसी आफत ने प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों के दावों की पोल खोलने के साथ ही ऑल वेदर प्रोजेक्ट के तहत हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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सौरभ सिंह
टिहरी. ये तस्वीर जो आप देख रहे हैं, यह झरना नहीं है बल्कि ऑल वेदर रोड है जो बारिश के चलते बीच से टूट गई है. सड़क का इतना बड़ा हिस्सा इस तरह टूट गया है कि यह झरने में तब्दील हो गई है. लोगों को अब सड़क किनारे बनी दीवार और उसके पीछे से गीले पत्थरों से होकर जाना पड़ रहा है. एक तरफ करोड़ों रुपये के ऑल वेदर प्रोजेक्ट की क्वालिटी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं तो दूसरी तरफ कई जगह रूट डायवर्ट किए जाने के साथ ही, टिहरी में दो नेशनल हाईवे को बंद किए जाने तक की नौबत आ गई है. टिहरी में भारी बारिश के कारण बने हालात पर पढ़िए पूरी रिपोर्ट.

एनएच-58 और एनएच-94 बंद
उत्तराखंड में पुलों और सड़कों पर भारी बारिश का कहर टूटने की खबरें थम नहीं रही हैं. देहरादून में पुल और सड़कें टूट जाने की खबरों के बाद टिहरी ज़िले में भी भारी बारिश से आफत की खबरें आई हैं. एनएच-58 और एनएच-94 पर भारी लैंडस्लाइड होने से दोनों नेशनल हाईवे ठप हो गए.

वहीं एनएच-94 पर फकोट में रोड का एक बड़ा हिस्सा वॉश आउट हो जाने से लोगों को पहाड़ियों और पगडंडियों के सहारे जान जोखिम में डालकर सड़क पार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. प्रशासन यात्रियों को बेवजह यात्रा न करने के निर्देश जारी करते हुए हाईवे बंद कर दिए हैं.

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टिहरी में गुरुवार से हो रही भारी बारिश से जनजीवन अस्त व्यस्त होग गया. तोताघाटी शिवपुरी के पास भारी मलबा आने से एनएच-58 बंद चल रहा है, तो एनएच-94 पर फकोट के पास रोड का एक बड़ा हिस्सा वॉश आउट हो चुका है. आसपास की सड़क पर भी दरारें पड़ गई हैं, जिससे लगातार रोड टूट रही है. नागणी, खाड़ी और नरेन्द्रनगर के पास कई जगहों पर भारी मलबा और बोल्डर आ गए हैं, जिन्हें मशीनों से हटाने की कोशिश जारी है.

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हाईवे पर सड़क बीच में से टूट जाने पर टिहरी में लोग रास्ते में फंस गए हैं और पैदल यात्री किसी तरह सड़क पार कर पा रहे हैं.

निर्माण की क्वालिटी पर उठे सवाल
चंबा-मसूरी रोड पर ट्रैफिक लोड ज्यादा होने से जाम की स्थिति बनी हुई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि बीआरओ और कार्यदाई संस्था की लापरवाही सामने आई है. टिहरी ही नहीं, पूरे उत्तराखंड में बारिश के चलते जिस तरह सड़कें उखड़ी और टूटी हैं, उससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं. इधर, ऋषिकेश-चंबा एनएच-94 पर लोग जान जोखिम में डालकर पथरीली और फिसलन भरी पगडंडियों से पहाड़ी से होते हुए रास्ता पार कर रहे हैं. डीएम इवा आशीष श्रीवास्तव का कहना है कि सुरक्षा के मद्देनज़र एनएच-58 और 94 पर आवागमन पूरी तरह से बंद कर दिया गया है.

टिहरी झील में आखिर कब उतरेगा सी प्लेन? सिर्फ फाइलों में है महत्वाकांक्षी योजना

टिहरी की झील पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन चु​की है.

उत्तराखंड के कई अंचलों में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें अब तक पूरी तरह से खंगाला नहीं गया है, उन्हीं में से एक है टिहरी की आकर्षक झील. एडवेंचर हब बन रही इस झील की महत्वाकांक्षी योजना पर एक पूरी रिपोर्ट.

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सौरभ सिंह
टिहरी. उत्तराखंड पर्यटन ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के पर्यटन मानचित्र पर टिहरी की खूबसूरत और प्रसिद्ध झील को पहचान दिलाने के लिए सरकार ने यहां सी प्लेन उतारने की योजना बनाई थी. इस योजना के लिए 2019 में सर्वे भी हुआ लेकिन अभी तक यह योजना परवान नहीं चढ़ पाई है और बस फाइलों तक ही सिमटी हुई है. वास्तव में इस योजना से न केवल पर्यटन को पहचान बल्कि स्थानीय लोगों को रोज़गार मिलने की भी उम्मीद जताई जा चुकी है. यह पूरी योजना क्या है, इसकी रफ्तार धीमी क्यों है और कबसे यह कवायद चल रही है, तमाम पहुलओं पर खास रिपोर्ट.

टूरिज़्म हब बन रही है झील
टिहरी डैम की 42 वर्ग किलोमीटर में फैली झील में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं और अब तो यह झील वॉटर एडवेंचर स्पोर्ट्स का हब बन रही है. दूरदराज़ से पर्यटक टिहरी झील में लहरों का रोमांच उठाने आने लगे हैं. सरकार द्वारा यहां नए नए एक्सपेरिमेंट्स किए जा रहे हैं और उन्हीं में से एक है सी प्लेन उतारने की योजना. करीब चार सालों से टिहरी झील में सी प्लेन उतारने के लिए कवायद चल रही है लेकिन अब तक यह योजना कागज़ों में कितनी बढ़ी है?

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टिहरी झील में सी प्लेन उतारने की योजना चार साल बाद भी फाइलों में ही है.

क्यों अटका हुआ है मामला?
डीएम इवा आशीष श्रीवास्तव का कहना है कि टिहरी झील में पुराने टिहरी शहर की कई इमारतें और पहाड़ियां हैं, जो वॉटर लेवल कम होने पर उभरकर दिखाई देने लगती हैं. सी प्लेन के रन वे में एक बहुत बड़ी अड़चन इसे माना जा रहा है, जिसके लिए हाइड्रोलिक सर्वे भी करवाया जा चुका है. श्रीवास्तव ने कहा हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन पता चला है कि भूमि चयन को लेकर कार्रवाई पूरी हो चुकी है. यानी मामला यह है कि सर्वे रिपोर्ट कहीं फाइलों में धूल फांक रही है.

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क्या हैं लोगों की शिकायतें?
एक बोट व्यवसायी कुलदीप पंवार ने न्य़ू18 से कहा कि टिहरी झील का वॉटर लेवल कम होने पर उभरने वाली इमारतों और पहाड़ियों के बीच बोटिंग करना बड़ा जोखिम होता है इसलिए हाइड्रोलिक सर्वे दोबारा करवाया जाना चाहिए. हालांकि पंवार ने कहा कि बोटिंग गतिविधियों का संचालन करने वाले विशेष क्षेत्र पर्यटन विकास प्राधिकरण यानी टाडा द्वारा भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. वहीं, स्थानीय बोट व्यवसायियों का मानना है कि झील में सी प्लेन उतरने से पर्यटन ही नहीं, रोज़गार को भी बढ़ावा मिलेगा.

All Weather Project: चंबा में टनल को जोड़ने वाली एप्रोच रोड में बढ़ रही दरारें, हादसे का खतरा

बारिश के बाद अब मकानों में भी दरारें पड़ने लगी है.

Uttarakhand News: एनएच - 94 (NH-94) पर चंबा में टनल को जोड़ने वाली एप्रोच रोड का एक बड़ा हिस्सा पिछले दिनों हुई बारिश में टूट गया. इस वजह से अब आस-पास के मकानों पर खतरा मंडराने लगा है.

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टिहरी गढ़वाल. उत्तराखंड के टिहरी में एनएच – 94 पर चंबा में टनल को जोड़ने वाली एप्रोच रोड का एक बड़ा हिस्सा पिछले दिनों हुई बारिश से टूट गया था. अब रोड में दरारें बढ़ रही है जिससे गुल्डी गांव के मकानों को भी खतरा बना हुआ है और पुश्ते भी लगातार टूट रहे हैं. स्थानीय निवासियों का आरोप है कि प्रशासन और कार्यदायी संस्था द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है जिससे आने वाले समय में कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है. ऑल वेदर प्रोजेक्ट के तहत ऋषिकेश- गंगोत्री एनएच – 94 (Rishikesh- Gangotri NH – 94) पर चंबा में 440 मीटर टनल का निर्माण किया गया. टनल को जोड़ने के लिए दिखोल और गुल्डी गांव की ओर से एप्रोच रोड बनाई गई जिससे चंबा बाजार में ट्रैफिक को कम किया जा सके.

लेकिन अभी टनल का विधिवत उद्घाटन भी नहीं हुआ था और पिछले दिनों हुई बारिश से गुल्डी गांव की ओर एप्रोच रोड का एक बड़ा हिस्सा टूट गया और पुश्ते भी ढह गए जिससे कार्यदायी संस्था के निर्माण कार्य और गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे है. टनल को जोड़ने वाली एप्रोच रोड पहली ही बरसात नहीं झेल पाई और बारिश में टूट गई. अब लगातार रोड में दरारें  बढ़ रही हैं. रोड का हिस्सा टूट रहा है जिससे आसपास के मकानों को भी खतरा बन गया है.

एप्रोच रोड के ऊपर के पुश्ते ढहने से करीब आधा दर्जन मकानों में भी दरारें दिखनी शुरू हो गई है. हालांकि बीआरओ के अधिकारियों द्वारा इसका निरीक्षण किया गया. लेकिन अभी तक मेन्टेन्स का काम शुरू नहीं होने से लोगों पर खतरा बना हुआ है. वहीं कार्यदाई संस्था द्वारा अभी तक एक बार फिर इसका निरीक्षण नहीं किया गया है जिससे गुल्डी के गांव के लोगों में कार्यदाई संस्था के खिलाफ भारी आक्रोश है.

लोगों ने प्रशासन पर लगाया बड़ा आरोप

स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी तो टनल का विधिवत उद्घाटन भी नहीं हुआ और पहली ही बारिश में रोड टूट गई और पुश्ते ढहने लगे है. जब इस रोड पर ट्रैफिक चलेगा तो क्या हाल होगा. स्थानीय निवासी भगवान सिंह के मकान में दरारें बढ़ने लगी है और पुश्ते टूटने और रोड में बढ़ रही दरारों से अब उनका परिवार खतरे के साए में जीने को मजबूर है. बारिश होने पर रात भर ये लोग जागते हैं. परिवार ने बताया कि प्रशासन से कई बार कहा गया लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. वहीं एसडीएम रविन्द्र जुवांठा का कहना है कि बीआरओ के साथ मिलकर निरीक्षण किया गया है और कार्रवाई संस्था को भी इसके ट्रीटमेंट के लिए बोला गया है. लेकिन लगातार हो रही बारिश से अभी काम शुरू नहीं हो पाया है. बारिश रूकने के बाद काम शुरू कर दिया जाएगा और सुरक्षा की दृष्टि से अगर किसी को खतरा होता है तो उन्हें सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जाएगा.

स्वतंत्रता दिवस पर टिहरी में मंत्री हरक सिंह रावत ने दी आधे-अधूरे राष्ट्रीय ध्वज को सलामी

टिहरी में मंत्री हरक सिंह रावत ने आधू अधूरे राष्ट्रध्वज को ही दी सलामी.

Independence Day 2021: देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर टिहरी में उत्तराखंड सरकार के मंत्री हरक सिंह रावत की मौजूदगी में सही तरीके से नहीं हो सका झंडोरोहण. गलती पता चली तो आनन-फानन में राष्ट्रध्वज को उतार कर फिर से फहराया गया.

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टिहरी. आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर टिहरी में जिले के प्रभारी मंत्री हरक सिंह रावत ने पीआईसी मैदान में आयोजित ध्वजारोहण कार्यक्रम में आधे-अधूरे राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दे दी. सही तरीके से तिरंगा झंडा न फहराए जाने की तरफ जब लोगों का ध्यान गया, तब आनन-फानन में वहां मौजूद सरकारी अधिकारियों ने झंडे को उतारा, तब जाकर ध्वजारोहण हो सका. बाद में इस बाबत जब मीडिया ने मंत्री से इस बात को लेकर सवाल किया, तो पहले उन्होंने टालने की कोशिश की. बाद में इसे कर्मचारियों की गलती बताकर पल्ला झाड़ लिया.

इससे पहले सुबह करीब साढ़े 10 बजे प्रदेश के मंत्री हरक सिंह रावत टिहरी पहुंचे. स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जिला मुख्यालय नई टिहरी में पीआईसी मैदान में ध्वजारोहण कार्यक्रम था. मंत्री जब ध्वजारोहण के लिए पहुंचे, उस समय वहां टिहरी विधायक धन सिंह नेगी समेत डीएम-एसपी व प्रशासन का पूरा अमला मौजूद था. तय समयानुसार मंत्री रावत ने ध्वजारोहण किया, लेकिन तिरंगा झंडा पूरी तरह से फहराया नहीं जा सका.

मंत्री समेत तमाम लोगों ने इस गलती की तरफ ध्यान नहीं दिया और आधू-अधूरे फहराए गए झंडे को ही सलामी दे दी गई. सलामी के बाद जब राष्ट्रध्वज झुका ही रहा तब लोगों की नजर गई. इसके बाद आनन फानन में नगर पालिका और प्रशासनिक अधिकारियों ने राष्ट्रीय ध्वज को फिर से नीचे उतारा और इसे ठीक से फहराया गया.

प्रभारी मंत्री हरक सिंह रावत ने इस मौके पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित भी किया. इस मौके पर उन्होंने कहा कि कोविड महामारी की वजह से इस साल स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम बड़े स्तर पर नहीं हो पाया, लेकिन हम सभी उन शहीदों को नमन करते है और शहीदों के परिजनों को उनके घर पर जाकर सम्मानित करेंगे. इसी बीच मीडिया ने जब मंत्री हरक सिंह रावत का ध्यान आधे अधूरे ध्वजारोहण की तरफ दिलाया तो पहले वह इस सवाल को टालते रहे. लेकिन बाद में कहा कि यह कर्मचारियों की गलती है और गलती किसी से भी हो सकती है. स्वतंत्रता दिवस के इस मौके पर हमें इन छोटी-मोटी गलतियों को इग्नोर करना चाहिए.

उत्तराखंड : टिहरी में इंसानों और तेंदुओं के बीच बना तालमेल, जानिए कैसे कम हुए खूनी संघर्ष

टिहरी में लिविंग विद लेपर्ड प्रोग्राम के सकारात्मक नतीजे मिले.

Uttarakhand Wildlife : टिहरी गढ़वाल में वाइल्ड लाइफ से जुड़ी एक पहल की गई. लिविंग विद लेपर्ड प्रोग्राम चलाया गया और बच्चों तक बात पहुंची तो नतीजा यह निकला कि गुलदार और इंसानों के बीच संघर्ष की घटनाएं कम हुईं.

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टिहरी गढ़वाल. गुलदार यानी तेंदुए और आदमी के बीच संघर्ष की घटनाएं पहाड़ों में लगातार बढ़ीं तो इनकी रोकथाम के लिए वन विभाग ने एक पहल की थी. लिविंग विद लेपर्ड प्रोग्राम को शुरू किए चार साल हो चुके हैं और अब इसका असर देखने को मिल रहा है. टिहरी क्षेत्र में 2017 में शुरू किए गए इस प्रोग्राम से गुलदार और आदमी के बीच संघर्ष की घटनाओं में कमी तो देखी ही गई है, लोगों में भी अवेयरनेस देखी जा रही है. टिहरी ज़िले में वन विभाग ने अपने इस कार्यक्रम के बारे में कुछ आंकड़े साझा किए हैं, ​जो बताते हैं कि यह कार्यक्रम किस तरह स्थानीय लोगों के लिए फायदेमंद रहा.

टिहरी में वर्ष 2000 से आंकड़े देखे जाएं तो गुलदार और मनुष्यों के बीच संघर्ष की कुल 161 घटनाएं हुईं, जिनमें 35 लोग अपनी जान गंवा चुके और 126 लोग घायल हुए. सबसे ज़्यादा घटनाएं वर्ष 2002 में कुल 16 थी, जिसमें 14 घायल जबकि 2 मौतें हुई थीं. वन विभाग ने वर्ष 2017 में महाराष्ट्र फोरेस्ट डिपार्टमेंट और एक निजी संस्था के साथ मिलकर लिविंग विद लेपर्ड प्रोग्राम चलाया. यह कार्यक्रम क्या है और इसका कैसे असर हुआ, जानिए.

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फॉरेस्ट विभाग ने लिविंग विद लेपर्ड कार्यक्रम के दौरान स्कूली बच्चों को पोस्टरों, नुक्कड़ सभाओं व अन्य तरीकों से तेंदुओं के बारे में जागरूक किया.

क्या है लिविंग विद लेपर्ड प्रोग्राम?
मनुष्यों को अपने व्यवहार में चेंज लाने के साथ ही वन विभाग कर्मचारियों को रेस्क्यू ट्रेनिंग, एडवांस इक्विपमेंट्स ट्रेनिंग और स्कूलों में बच्चों को जागरूक किया गया, जिसका मुख्य फोकस लोगों को जागरूक करके संघर्ष की घटनाओं को कम करना रहा. इस प्रोग्राम के तहत स्कूली बच्चों पर विभाग ने विशेष फोकस रखा. डॉक्युमेंट्री, सीरियल, नुक्कड़ सभाओं के ज़रिए स्कूलों में जाकर बच्चों को गुलदार के नेचर के बारे में जागरूक किया गया, जिससे बच्चे ज्यादा से ज्यादा इसका प्रचार प्रसार करें.

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कैसे फायदेमंद साबित हुआ प्रोग्राम?
2017 के बाद से गुलदार और मनुष्यों के बीच संघर्ष की घटनाओं में कमी देखी गई. 2018 में कुल 8 घटनाएं हुईं, तो 2019 में 0, 2020 में 4 घटनाएं और 2021 में अभी तक सिर्फ एक ही घटना सामने आई है. ध्यान रखें कि ये आंकड़े टिहरी क्षेत्र के हैं, जबकि उत्तराखंड के अन्य पहाड़ी ज़िलों में भी गुलदार संबंधी घटनाएं होती रही हैं. ​वन विभाग का दावा है कि टिहरी में लिविंग विद लेपर्ड प्रोग्राम से लोगों ने गुलदार को समझना सीखा, जिससे संघर्ष कम हुआ.

Uttarakhand: टिहरी SSP तृप्ति भट्ट ने पति संग लगाए जबरदस्‍त ठुमके, Video वायरल

आईपीएस अधिकारी तृप्ति भट्ट इस वक्‍त हिटरी में तैनात हैं.

उत्तराखंड (Uttarakhand) की तेजतर्रार महिला आईपीएस अधिकारी तृप्ति भट्ट (IPS officer Tripti Bhatt) इन दिनों अपने डांस वीडियो की वजह से सुर्खियों बटोर रही हैं. हालांकि काफी सख्‍त अधिकारी के रूप में पहचान वाली ये आईपीएस अपनी खूबसूरती के अलावा लोकगीतों से जुड़ाव भी रखती है.

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देहरादून. उत्तराखंड (Uttarakhand) की महिला आईपीएस अधिकारी तृप्ति भट्ट (IPS officer Tripti Bhatt) इन दिनों काफी चर्चा में हैं. हालांकि तेजतर्रार आईपीएस इस समय अपने काम की वजह से नहीं बल्कि अपने शानदार डांस के कारण चर्चा में हैं. दरअसल सोशल मीडिया (Social Media) में इन दिनों एक वीडियो खासी चर्चा में है. इस वीडियो में तृप्ति अपने पति के साथ उत्तराखंड के लोकगीतों की धुनों पर डांस कर रही हैं.

बता दें कि तृप्ति भट्ट इस समय उत्तराखंड की टिहरी जिले की सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस यानी पुलिस कप्तान हैं. हालांकि मंच पर उनका लोकनृत्य देखकर आप अनुमान नहीं लगा सकते कि ये कोई आईपीएस अधिकारी हैं बल्कि वो एक मंझी हुई लोक कलाकार दिखती हैं. यही नहीं, उनकी ताल गाने के एक-एक बोल से मिल रही है. आईपीएस तृप्ति भट्ट गायक बीके सामंत के द्वारा गाए गए प्रसिद्ध कुमाऊंनी लोकगीत ‘थल की बाजार…पर अपने पति के साथ थिरकती दिख रही हैं. आईपीएस अधिकारी तृप्ति भट्ट के पति रितेश भट्ट भारतीय राजस्‍व सेवा में कार्यरत हैं.

न्‍यूज़ 18 से कही ये बात
न्यूज़ 18 से इस वीडियो की हकीकत जानने के लिए टिहरी की एसएसपी तृप्ति भट्ट को फोन किया, तो उन्होंने बताया कि इस वीडियो में लोकगीतों की धुनों पर जो महिला लोकनृत्य कर रही है वो वही हैं. आईपीएस तृप्ति भट्ट ने बताया कि ये वीडियो पांच महीने पहले हुए एक कार्यक्रम का है, जो पुलिस विभाग ने देहरादून में कराया था. इसी कार्यक्रम में तृप्ति ने लोकनृत्य पेश किया था और इसी लोकनृत्य का ये वीडियो इन दिनों खूब वायरल हो रहा है.

लोक संस्कृति के प्रति है खास जुड़ाव
मूलत: अल्मोड़ा की रहने वाली तृप्ति भट्ट 2013 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं. उन्होंने गोविंद बल्लभ पंत यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. फिलहाल टिहरी गढ़वाल जिले की एसएसपी तृप्ति भट्ट के सोशल मीडिया अकाउंट पर कई ऐसी तस्वीरें मौजूद हैं, जिनसे आसानी से अनुमान लगाया जा सकता है कि वह जितनी स्टाइलिश हैं उतना ही उनका अपनी लोक संस्कृति के प्रति भी जुड़ाव रहा है. तृप्ति बताती हैं कि लोक गीत उन्हें खूब भाते हैं और बचपन से लेकर कॉलेज की पढ़ाई तक उन्होंने लोकगीतों को सुनना नहीं छोड़ा. यही नहीं, आईपीएस रहते हुए जब भी मौका मिलता है वो इन लोकगीतों को गुनगुनाकर इनका लुत्फ लेती हैं.

उत्तराखंड में दो महिलाओं का शिकार करने वाला गुलदार बना गोली का निशाना

वन विभाग ने किया नरभक्षी तेंदुए का शिकार.

वन विभाग ने इस नरभक्षी को मारने के लिए जो शिकारी तैनात किए थे, जब उनकी मौजूदगी के बीच गुलदार ने शिकार किया तो पूरे इलाके में दहशत पसर गई थी. जानिए कैसे जानवर ने शिकार किए और कैसे खुद शिकार बना.

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देवप्रयाग. पिछले एक हफ्ते में एक आदमखोर गुलदार ने विधानसभा क्षेत्र के हिंडोलाखाल ब्लॉक में आतंक मचाया था. दो लोगों को शिकार बनाने के साथ ही एक व्यक्ति को घायल कर देने वाले आदमखोर गुलदार को आखिरकार शिकारियों ने मौत की नींद सुला दिया. बताया जाता है कि आदमखोर गुलदार हिंडोलाखाल ब्लॉक के छाम और दुरोगी गांव में दो महिलाओं को शिकार बना चुका था. इस गुलदार से निपटने के लिए वन विभाग ने शिकारियों की तैनाती की थी, लेकिन दहशत उस वक्त और बढ़ गई थी, जब इस दस्ते की मौजूदगी के बीच गुलदार ने दूसरा शिकार किया था.

क्षेत्र में आतंक का पर्याय बने आदमखोर गुलदार ने विगत 18 जुलाई की शाम को छाम गांव में एक महिला को अपना शिकार बना लिया था जबकि 15 जुलाई को दुरोगी में भी एक महिला को हमलाकर घायल कर दिया था. क्षेत्र में खौफ का कारण बने नरभक्षी ने मंगलवार सुबह भी दुरोगी गांव में 50 वर्षीय महिला को अपना शिकार बना लिया था. स्थानीय लोग बताते हैं कि इस घटना के बाद क्षेत्र में लोग घरों से बाहर निकलने से भी डरने लगे थे.

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जब गुलदार ने किया दूसरा शिकार
एक महिला को शिकार और एक को जख्मी कर देने की घटनाओं के बाद वन विभाग ने एक शिकारी दल को तैनात किया था, लेकिन दल की मुसीबत उस वक्त बढ़ गई थी जबकि इलाके में उनके होते हुए आदमखोर गुलदार ने एक और महिला का शिकार कर लिया. क्षेत्र में आदमखोर गुलदार को ढेर करने के लिए तैनात शिकारी जहीर बख्श और के.एस. चौहान गश्त कर रहे थे, तभी जहीर बख्श ने नरभक्षी गुलदार को देखते ही गोली दागकर उसे ढेर कर दिया.

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हालांकि पोस्टमार्टम के बाद पुष्टि हो सकेगी कि मारा गया गुलदार आदमखोर था या नहीं, लेकिन फिलहाल ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है. गुलदार के आदमखोर प्रमाणित होने तक शिकारी दल क्षेत्र में तैनात रहेगा. वहीं वनविभाग ने इलाके में और भी गुलदारों की मौजूदगी के कारण ग्रामीणों से आवाजाही के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है. बता दें कि पहाड़ों में तेंदुए को गुलदार कहा जाता है.

Tehri Garhwal Cloud Burst: टिहरी गढ़वाल के भिलंगना ब्लॉक में बादल फटने से 4-5 घर तबाह, रेस्क्यू टीम रवाना

उत्तरकाशी में बादल फटने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है, इस बीच टिहरी गढ़वाल से बुरी खबर सामने आई है.

Tehri Garhwal Cloud Burst: उत्तराखंड के उत्तरकाशी में रविवार देर रात बादल फटने से 3 लोगों की मौत के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. इस बीच टिहरी गढ़वाल के भिलंगना ब्लॉक में बादल फटने से 4-5 घर तबाह होने से हड़कंप मच गया है. बता दें कि उत्तराखंड के अधिकांश जिलों में भारी बारिश (Heavy Rain) हो रही है.

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टिहरी गढ़वाल. उत्तराखंड में पिछले काफी दिनों से भारी बारिश (Heavy Rain) का दौर जारी है. इस वजह से न सिर्फ गंगा, यमुना, भागीरथी, अलकनंदा, मंदाकिनी, पिंडर, नंदाकिनी, टोंस, सरयू, गोरी, काली, रामगंगा आदि सभी नदियां उफान पर हैं बल्कि बादल फटने की भी घटनाएं लगातार हो रही हैं. यही नहीं, अभी उत्तरकाशी में कल देर रात बादल फटने के बाद शुरू किया गया रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. इस बीच टिहरी गढ़वाल के भिलंगना ब्लॉक में बादल फटने (Tehri Garhwal Cloud Burst) से 4-5 घर तबाह होने की खबर से दहशत फैल गई है. फिलहाल रेस्क्यू टीम मौके के लिए रवाना हो गई है. जबकि जानमाल के नुकसान को लेकर प्रतीक्षा है.

इससे पहले उत्तरकाशी में कल देर रात बादल फटने के कारण तीन लोगों की मौत हो चुकी है, तो अभी चार लोग लापता बताए जा रहे हैं. हालांकि अभी रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है.

उत्तराखंड में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट
मौसम विभाग के मुताबिक, अगले 24 घंटे में देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और पौड़ी जैसे जिलों में अत्यंत भारी बारिश की संभावना है. वहीं, उत्तरकाशी समेत राज्य के बाकी हिस्सों में भी भारी से बहुत भारी बारिश के आसार है. इस बाबत मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. वहीं, लगातार हो रही बारिश की वजह से नदियां उफान पर हैं, जिसकी प्रशासन सतत निगरानी कर रहा है. वहीं, राज्‍य में काफी स्थानों पर भारी बारिश से भूस्खलन होने से मार्ग यातायात के लिए अवरूद्ध हैं जिन्हें खोलने के प्रयास जारी हैं. जबकि कई स्थानों पर अतिवृष्टि से मकानों और खेतों में मलबा भी घुस आया है.

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बता दें कि उत्तराखंड के सीएम पुष्‍कर सिंह धामी ने बारिश और बादल फटने की घटनाओं के बीच सभी जिलों के अधिकारियों को राहत और बचाव कार्य शीर्ष प्राथमिकता पर करने के निर्देश दिए हैं, ताकि कम से कम समय में प्रभावित लोगों तक मदद पहुंच सके. यही नहीं, जितनी जल्‍दी मदद पहुंचेगी उतना नुकसान भी कम होगा.

मसूरी में पाबंदी: झरने के आस-पास एक साथ 50 पर्यटकों को ही इजाजत, 30 मिनट से ज्यादा नहीं रुक पाएगा 1 टूरिस्ट

मसूरी में पर्यटकों के एक झरने के नीचे नहाने का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह बिना मास्क लगाए हैं.

UK News: उत्तराखंड के मशहूर टूरिस्ट स्पॉट मसूरी (Famous tourist spot Mussoorie) में अब पर्यटकों पर पाबंदी लगा दी गई है. कोरोना प्रोटोकॉल के तहत ये पाबंदी लगाई गई.

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मसूरी. उत्तराखंड के मशहूर टूरिस्ट स्पॉट मसूरी में अब पर्यटकों पर पाबंदी लगा दी गई है. कोरोना प्रोटोकॉल के तहत ये पाबंदी लगाई गई. प्रशासन के नए दिशा निर्देश के मुताबिक अब मसूरी के केम्प्टी फॉल्स (झरना) में एक बार में केवल 50 पर्यटकों को जाने की अनुमति होगी. इतना ही नहीं एक पर्यटक आधे घंटे से ज्यादा वहां नहीं रुक पाएगा. बीते दिनों मसूरी के केम्प्टी झरने के पास बड़ी संख्या में पर्यटकों की मौजूदगी के बाद ये निर्णय लिया गया है. टिहरी गढ़वाल के जिलाधिकारी इवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि कोरोना संक्रमण फैलने की आशंका को देखते हुए ये निर्णय लिया गया है.

बता दें कि उत्तराखंड के मशहूर पर्यटन स्थल और पहाड़ों की रानी मंसूरी में गर्मी से निजात पाने के लिए मैदानी इलाकों से पहुंच रहे पर्यटकों की भीड़ जुट रही है. कोरोना प्रतिबंधों में ढील मिलने के बाद लोग गर्मी से राहत पाने के लिए पहाड़ी इलाकों का रुख कर रहे हैं, मसूरी भी हजारों की संख्या में लोग छुट्टियां मनाने पहुंचे हैं. वहां गाड़ियों की कतारें लगी हैं और वहां के होटल फुल हो चुके हैं. मैदानी इलाकों लोग पहाड़ों का रूख तो कर रहे हैं, लेकिन मसूरी पहुंचकर वह कोरोना और उसके प्रोटोकाल भूल गए हैं.

वीडियो वायरल होने के बाद पाबंदी
मसूरी के ऐसे तमाम वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें लोग बिना मास्क घूम रहे हैं और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी नहीं कर रहे हैं. मंसूरी का ऐसा ही एक वीडियाे सोशल मीडिया पर वायरल (Viral Video on social media) हो रहा है. इसमें सैकड़ों की संख्या में लोग एक झरने के नीचे नहाते हुए दिख रहे हैं. लेकिन इस भीड़ को कोरोना का जरा खौफ नहीं दिखाई दे रहा है. भीड़ में मौजूद किसी एक व्यक्ति ने भी मास्क नहीं पहना है. सोशल मीडिया पर इस वीडियो की आलोचना भी हो रही है. इस वीडियो के वायरल होने के बाद ही प्रशासन ने अब पाबंदी शुरू की है.

टिहरी डैम की झील में बढ़ा पानी, तो झील से सटे गांवों में दहशत भी बढ़ने लगी

जलस्तर बढ़ने से टिहरी डैम से सटे गांवों पर खतरा मंडरा रहा है.

Uttarakhand News : हर साल की कहानी यही है कि बारिश ज़्यादा हो जाती है तो सैकड़ों परिवार खतरे की ज़द में आ जाते हैं. शासन प्रशासन की सुस्त कार्यप्रणाली ग्रामीणों पर भारी पड़ रही है और किसी भी समय बड़ी दुर्घटना की आशंका लगातार बनी हुई है.

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सौरभ सिंह

टिहरी गढ़वाल. टिहरी डैम की झील से सटे गांवों में इस बार फिर दहशत का माहौल बन गया है. बारिश के चलते झील का जलस्तर बढ़ने लगा है, तो गांवों में भूस्खलन और भूधंसाव की घटनाएं भी बढ़ रही हैं. लोग रात भर सो नहीं पा रहे हैं क्योंकि उनके मकान जर्जर और खतरनाक हो चुके हैं. 17 गांवों के 415 परिवार दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं, लगातार अफसरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन सालों से विस्थापन के नाम पर ग्रामीणों को सिर्फ आश्वासन ही मिल रहे हैं.

हर साल टिहरी डैम की झील के पानी के उतार चढ़ाव के चलते झील के आसपास के गांवों में भूस्खलन और भूधंसाव लगातार बढ़ रहा है. इस साल फिर लगातार हो रही बारिश से टिहरी डैम की झील का जलस्तर 759.95 मीटर पहुंच गया है, जिससे झील से सटे रामगांव, तिवाड़गांव, उप्पू, भटकंडा, सिराई में भूस्खलन और भूधंसाव हो रहा है. मकानों में दरारें आ गई हैं, तो कई मकान पूरी तरह से टूट चुके हैं. वहीं खेती योग्य भूमि में भी धंसाव के चलते लोग खेती छोड़ने पर मजबूर हैं.

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भूस्खलन और धंसाव से जर्जर हो चुके हैं टिहरी डैम से सटे इलाकों के मकान.


कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
प्रभावित ग्रामीण हर साल मकानों की रिपेयरिंग करवाते हैं, लेकिन एक ही बारिश के बाद फिर वही हाल हो जाता है. कई मकानों में दरारें पड़ चुकी हैं, तो कई जगह फर्श उखड़ चुका है. कई मकान तो ऐसे हैं जो बल्लियों के सहारे टिके हुए हैं. इस पूरी तस्वीर का मतलब यही है कि कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है. स्थानीय लोग कहते हैं कि बरसात में मकान गिरने की चिंता के कारण वो रात भर सो भी नहीं पाते. लोगों का कहना है कि कई बार डीएम से लेकर तमाम अफसरों को शिकायत की जा चुकी है.

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क्या कहते हैं ज़िम्मेदार?
पुर्नवास निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव का कहना है कि ग्रामीणों को नुकसान से हुए भुगतान की कार्रवाई शुरू कर दी गई है. श्रीवास्तव ने कहा कि संबंधित विभाग से स्वीकृति भी आ चुकी है और लोगों की ज़रूरत पूरी की जा रही है. वहीं आपदा प्रबंधन और पुनर्वास मंत्री धनसिंह रावत ने कहा कि जिस गांव को भी विस्थापन की ज़रूरत होगी, किया जाएगा. इस मामले में बजट की कोई दिक्कत नहीं है, जिस ज़िले से रिपोर्ट आएगी, वहां विस्थापन की कार्रवाई की जाएगी.

Success Story: पिता देश तो पुत्री महिला किसानों को बना रही आत्मनिर्भर

27 वर्षीय निधि हरीश पंत (Nidhi Harish Pant) की कहानी

Success Story: 27 वर्षीय निधि हरीश पंत (Nidhi Harish Pant) की कहानी दिलचस्प है. जानिए उत्तराखंड (Uttarakhand) के एक गांव से आने वाली निधि महिला किसानों को प्रशिक्षित कर रही हैं.

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पिता (Father) एक वैज्ञानिक (Scientist) के तौर पर देश को सक्षम और आत्मनिर्भर बनने में सहयोग कर रहे हैं तो पुत्री महिला किसानों को सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने में जुटी हैं. हम बात कर रहे हैं 27 वर्षीय निधि हरीश पंत (Nidhi Harish Pant) की. उत्तराखंड (Uttarakhand) के एक गांव से आने वाली निधि एक केमिकल इंजीनियर (Chemical Engineer) होते हुए भी पूरे जज़्बे और जुनून (Passion) से महिला किसानों (Women Farmers) को एक नए स्तर पर ले जाने का प्रयास कर रही हैं. इस प्रयास में अब उन्हें सरकारों के साथ-साथ प्राइवेट कंपनियों का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है. आइए जानते हैं निधि हरीश पंत की सक्सेस स्टोरी (Success Story).

पिता पहले किसान थे, अब हैं वैज्ञानिक:
निधि हरीश पंत उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल (Garhwal) के एक छोटे गांव स्यानरी (Syanri) से हैं. उनके पिता हरीश जगत पंत पहले किसानी (Farming) करते थे. इसके बाद वे वैज्ञानिक (Scientist) बने. वर्तमान में निधि के पिता भाभा ऑटोमिक रिसर्च सेंटर में न्यूक्लियर साइंटिस्ट (Nuclear Scientist) हैं. पिता ने ही निधि को हमेशा कुछ नया करने के लिए सपोर्ट किया.

साल 2000 में महाराष्ट्र से जुड़ा नाता:
निधि के पिता श्री हरीश जगत पंत एक साइंटिस्ट के तौर पर वर्ष 2000 में महाराष्ट्र, (Maharashtra) मुम्बई आ गए. इसके बाद निधि की स्कूलिंग और हायर एजुकेशन मुम्बई से ही हुई. निधि ने केमिकल इंजीनियरिंग में बैचलर डिग्री हासिल की.

गांव वालों ने की आपत्ति:
चूंकि निधि उत्तराखंड के एक गांव से हैं, इसलिए उन्हें कई दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा. गांव और समाज वाले निधि की उच्च शिक्षा और उनके रहन-सहन को लेकर पिता को टोकने लगे, यहां तक कि कम उम्र में उनकी शादी करने की बात भी हुई. लेकिन पिता ने इन सब बातों को दरकिनार करते हुए निधि का साथ दिया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया.

फूड प्रोसेसिंग से कर रही महिला किसानों को सशक्त:
निधि बताती हैं कि उन्होंने केमिकल इंजीनियरिंग के बाद साल 2013 में अपने दोस्तों की मदद से 'साइंस फॉर सोसाइटी' (S4S) नाम की कंपनी शुरू की. इस कंपनी के तहत उन्होंने महिला किसानों को फ़ूड प्रोसेसिंग (Food Processing) क्षेत्र में बढ़ावा देना शुरू किया. वो महिला किसानों को उनके द्वारा उत्पन्न किए गए सब्जियों को फ़ूड प्रोसेसिंग के जरिए एक्स्ट्रा इनकम (Extra Income) करने में मदद करती हैं.
अभी 3 प्रदेशों में कर रही हैं काम:
निधि S4S के तहत फिलहाल 3 राज्यों में काम कर रही हैं. इनमें महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और ओडिशा राज्य शामिल हैं. वे इन 3 राज्यों में अभी तक 500 से ज्यादा महिला किसानों को फ़ूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में सशक्त कर चुकी हैं. इसके अलावा उनके साथ 800 से अधिक सरकारी और प्राइवेट कंपनियां भी जुड़ गई हैं.
सिर्फ 5 सब्जियों पर करती हैं काम:
निधि की कंपनी फिलहाल सिर्फ 5 सब्जियों पर काम करती है. इनमें प्याज, अदरक, लहसुन, टमाटर और मक्का शामिल हैं. वे इस संख्या को हर साल बढ़ाना चाहती हैं.

वर्ष 2025 है बड़ी सफलता का लक्ष्य:
निधि के मुताबिक अभी तक उनका 50 प्रतिशत लक्ष्य ही पूरा हो सका है. उनका लक्ष्य है कि वे वर्ष 2025 तक अपने साथ कम से कम 10 हजार महिला किसानों को जोड़ सकें. फिलहाल वे 3 राज्यों में काम करती हैं, 2025 तक वे कम से कम 10 राज्यों में काम करने का लक्ष्य लेकर काम कर रही हैं. उनकी कंपनी का वार्षिक टर्नओवर अभी 20 करोड़ है जिसे वर्ष 2025 तक वे एक हजार करोड़ तक ले जाना चाहती हैं.

टिहरी के इस गांव में लोगों ने आज तक नहीं खाई दवा, सिर्फ जड़ी-बूटियों का ही करते हैं सेवन

सीमान्त क्षेत्र गंगी के लोगों की आजीविका का साधन मुख्य रूप से खेती और पशुपालन है

नई टिहरी जिला मुख्यालय से करीब 120 किलोमीटर की दूरी पर भारत-तिब्बत सीमा पर स्थित है टिहरी जिले का सीमान्त गांव गंगी है. करीब 150 की आबादी वाले इस गांव में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, लेकिन प्राकृतिक खूबसूरती और दुर्लभ जड़ी- बूटियों का यहां खजाना है.

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टिहरी. टिहरी जिले (Tehri District) में एक गांव ऐसा भी है जहां आज भी लोग बीमार होने पर दवा नहीं खाते हैं. यहां के लोग वर्षों से जड़ी- बूटियों से अपना इलाज कर रहे हैं. भारत- तिब्बत सीमा (Indo-Tibetan Border) पर स्थित इस गांव का नाम है गंगी. गंगी गांव (Gangi village) में ऐसी दुर्लभ जड़ी-बूटियों का खजाना है जो शायद ही कहीं और पाया जाता हो. यही वजह है कि यहां के लोग बीमार पड़ने पर अंग्रेजी दवाई खाने के बजाए जड़ी-बूटियों का ही सेवन करते हैं और उनकी तबीयत में सुधार भी हो जाती है. खास बात यह है कि इस गांव के लोग कोरोना वायरस फैलने के बाद भी अंग्रेजी दवा का न के बराबर सेवन किया. इन लोगों ने इन्ही जड़ी- बूटियों से अपना इलाज किया और ठीक हो गए.

जानकारी के मुताबिक, नई टिहरी जिला मुख्यालय से करीब 120 किलोमीटर की दूरी पर भारत- तिब्बत सीमा पर स्थित है टिहरी जिले का सीमान्त गांव गंगी है. करीब 150 की आबादी वाले इस गांव में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. लेकिन प्राकृतिक खूबसूरती और दुर्लभ जड़ी- बूटियों का यहां खजाना है. और यहां के लोगों ने आज तक ऐलोपैथिक दवाइयां नहीं खाई है. यहां अतीस, कूट, कुटकी, चिरायता, छतवा, और सिंगपरणी जैसी दुर्लभ जड़ी- बूटियां होती हैं जो बुखार, खांसी, पेट से संबधित बीमारी, सूगर और लीवर से संबधित बीमारियों में काफी फायदेमंद हैं. कोरोना महामारी के दौर में भी यहां के लोगों ने दवाइयां नहीं खाई और कोरोना के लक्षण होने पर इन्ही जड़़ी बूटियों का काड़ा पीकर अपना इलाज खुद किया.

स्वस्थ्य रहना का कारण भी यही जड़ी बूटियां हैं
सीमान्त क्षेत्र गंगी के लोगों की आजीविका का साधन मुख्य रूप से खेती और पशुपालन है. गंगी के लोगों का कहना है कि पीढ़ियों से वो इन्ही जड़ी- बूटियों के सहारे अपना इलाज करते आ रहे हैं. और यहां अभी कई जड़ी- बूटियां ऐसी हैं, बारे में उन्हें भी नहीं पता है. अनदेखी के चलते आज गंगी क्षेत्र उपेक्षा का भी शिकार हो गया है और विकास से पिछड़ता जा रहा है. हैल्थ एक्सपर्ट का भी मानना है कि गंगी क्षेत्र में ऐसी ऐसी दुर्लभ जड़ी- बूटियां हैं जिन्हें कई बीमारियों में यूज किया जा सकता है. और गंगी के लोगों के स्वस्थ्य रहना का कारण भी यही जड़ी बूटियां हैं.

उत्तराखंड: टिहरी झील में फिर से बोटिंग शुरू, 72 घंटे पहले का कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट जरूरी

टिहरी झील आने वाले पर्यटकों को कोरोना गाइडलाइंस फॉलो करना होगा.

तकरीबन दो महीने बाद वीरान पड़ी टिहरी झील Tehri lake में फिर से  बोटिंग गतिविधियां शुरू कर दी गई है. कोविड गाइडलाइंस का पालन करते हुए 72 घंटे पहले का कोविड नेगेटिव रिपोर्ट (Corona Negative Report) लेकर सैलानियों को आना होगा.

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टिहरी. उत्तराखंड (Uttarakhand) में कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए 30 अप्रैल 2021 से टिहरी झील (Tehri Lake Boating) में बोट का संचालन बंद कर दिया गया था. इससे कोविड की दोहरी मार झेल रहे बोट व्यवसायी ऑपरेटरों के सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया था. अब प्रशासन ने कोरोना प्रोटोकॉल के तहत एक बार फिर टिहरी झील में बोटिंग शुरू करने की अनुमति दे दी है. पर्यटन सीजन के दौरान  मार्च से जून में ही टिहरी झील में दूर दराज से सैलानी पहुंचते थे. इसी सीजन में बोट व्यवसायी अपने पूरे साल का व्यवसाय करते थे. पिछले साल भी कोविड के चलते और इस बार भी पर्यटन सीजन में कोविड की दोहरी मार झेल रहे बोट व्यवसायी कोविड की नई गाइडलाइन के मुताबिक बोटिंग शुरू करने की मांग कर रहे थे.

इसके बाद जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग ने शर्तों के साथ 72 घंटे पहले की कोविड नेगेटिव रिपोर्ट और गाइडलाइन का पालन कराते हुए बोटिंग शुरू करने की अनुमति दे दी है. इस फैसले के बाद बोट व्यवसायियों को भी राहत मिली है.

पर्यटकों को कोरोना टेस्ट रिपोर्ट दिखाना होगा

टिहरी झील बोट यूनियन द्वारा भी मेन गेट पर पर्यटकों की कोविड नेगेटिव रिपोर्ट चैक की जा रही है और सैनिटाइजेशन के साथ मास्क को अनिवार्य किया गया है. हालांकि पहले दिन पर्यटक कम ही संख्या में पहुंचे, लेकिन जो पर्यटक टिहरी झील पहुंच रहे है उनका भी कहना है कि वो कब से टिहरी झील में बोटिंग शुरू होने का इंतजार कर रहे थे. अब वो परिवार के साथ कोविड नेगेटिव रिपोर्ट के साथ ही गाइडलाइन का पालन कर रहे है.


प्रदर्शन का ऐलान




 इधर, उत्तराखंड कांग्रेस ने शनिवार को धमकी दी कि अगर उच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश से हरिद्वार कुंभ मेले के दौरान कथित फर्जी कोविड-19 जांच घोटाले  की छानबीन नहीं कराई गई तो पार्टी विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘अगर उच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश की अध्यक्षता में इस घोटाले की जांच के आदेश नहीं दिए गए तो कांग्रेस राज्यव्यापी प्रदर्शन करेगी और इसकी शुरुआत 25 जून को हरिद्वार में गंगा नदी के किनारे अनशन से होगी.’’ सिंह ने कहा, ‘‘ यह भाजपा का पाप है जो खुद को सनातन हिंदू धर्म के सरंक्षक के रूप में पेश करती है. यह घोटाला इस सरकार के तहत कोविड जैसी महामारी के समय हुआ.’’



तेज़ बारिश में कहां तक टिकेंगी उत्तराखंड की ऑल वेदर सड़कें? टिहरी में मिला जवाब

टिहरी में नेशनल हाईवे पर ऑल वेदर रोड की तस्वीर

राज्य में खास तौर से बेहतर कनेक्टिविटी और सख्त मौसम की मार को ही मद्देनज़र रखते हुए इस तरह की सड़कें बनाई गईं, लेकिन टिहरी गढ़वाल की एक सड़क टूटने से चिंता बढ़ गई है, वहीं स्थानीय लोग खतरे के साये में हैं.

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टिहरी. प्रदेश में खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बारिश के चलते नदियों के उफान पर होने और भूस्खलन की खबरों के बीच एक और खतरा पैदा हो गया है. बारिश की मार सड़कों पर पड़ रही है और खराब क्वालिटी के चलते कई इलाकों में सड़कें टूटने लगी हैं. यही नहीं, नेशनल हाईवे पर बनाई गई ऑल वेदर सड़कों तक का यह हाल कि बारिश का एक सीज़न नहीं झेल पा रहीं. टिहरी में एनएच-94 पर टनल को जोड़ने वाली सड़क का एक बड़ा हिस्सा टूट जाने और पुश्तों में दरारें पड़ने से अब आसपास के करीब एक दर्जन मकानों के लिए भी खतरा पैदा हो गया है. दावा था कि यह सड़क हर मौसम में लंबे समय तक कारगर होगी, लेकिन अब गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

टिहरी में ऑल वेदर प्रोजेक्ट के तहत एनएच-94 का चौ़ड़ीकरण किया गया और चंबा में 440 मीटर टनल का निर्माण किया गया, लेकिन जिस संस्था का ठेका मिला, अब उसकी लापरवाही आसपास के लोगों पर भारी पड़ रही है. 19 जून को हुई बारिश ने टनल को जोड़ने वाली सड़क का बड़ा हिस्सा गुल्डी गांव के पास टूट गया. बारिश के कारण पुश्तों में भी दरारें बढ़ने लगी हैं और आसपास के करीब एक दर्जन मकानों को खतरा पैदा हो गया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार बीआरओ और ज़िला प्रशासन से शिकायत की थी, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया.

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एक बारिश नहीं झेल पाई ऑल वेदर सड़क
करोड़ों के प्रोजेक्ट के तहत ऋषिकेश-गंगोत्री को जोड़ने के लिए बनाई गई टनल की सड़क का विधिवत उद्घाटन भी नहीं हुआ था और पहली ही बारिश में सड़क टूट गई है. गुल्डी गांव के पास लगातार सड़क टूट रही है. पुश्तों में दरारें बढ़ रही हैं, जिससे स्थानीय लोगों को अपने मकान ध्वस्त होने तक का खतरा नज़र आ रहा है. लोगों ने बताया कि सड़क निर्माण के समय ही आपत्ति ली गई थी क्योंकि इससे सटे करीब एक दर्जन मकानों में दरारें दिख रही थीं. पहले एक मीटर की दीवार का विकल्प दिया गया, फिर इसे और बढ़ाया गया, लेकिन खतरा अब तक टला नहीं है. इस बारे में लोगों की शिकायतों और आरोपों पर एसडीएम का कहना है कि बीआरओ के साथ बैठक की गई है और संभावित क्षेत्र का एक्सपर्ट टीम द्वारा सर्वे कराया जाएगा.

स्थानीय लोगों की मानें तो ऑल वेदर प्रोजेक्ट की सड़क की पहली ही बारिश में जो हालत हुई, उसने कार्यदायी संस्था की कार्यप्रणाली और गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इसके बाद ज़िले की ही नहीं, बल्कि प्रदेश की कई ऐसी सड़कों को लेकर चिंता बढ़ रही है.

उत्तराखंड : जल्द हो बचाव कार्य, इसलिए टिहरी ने बनाई अपनी आपदा रिस्पांस फोर्स

टिहरी गढ़वाल में आपदा की स्थिति से निपटने के लिए क्विक रिस्पॉंस टीमें तैनात की गईं.

Tehri Response Force: आपदा की घटना होने पर क्विक रिस्पांस कर सकेगी डीडीआरएफ की टीम. इस टीम में तैनात जवानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है. दावा है कि इस टीम के बाद राहत कार्यों में देर होने की समस्या पेश नहीं आएगी.

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टिहरी. मानसून के दौरान आपदा की स्थि​ति में राहत और बचाव कार्यों के लिए एसडीआरएफ की तर्ज पर डिस्ट्रिक्ट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स यानी डीडीआरएफ का गठन किया गया है. ये टीमें सभी तहसीलों में तैनात कर दी गई हैं, जिसमें पीआरडी और होमगार्ड के 5-5 जवान शामिल हैं. आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा इन पीआरडी और होमगार्ड के जवानों को खोज, बचाव और फर्स्ट एड की ट्रेनिंग दी गई थी. ट्रेनिंग में सफल जवानों को लेकर जिला प्रशासन द्वारा डीडीआरएफ का गठन किया गया और ज़िले की सभी 10 तहसीलों में इन्हें तैनात कर दिया गया.

आपदा की घटनाओं में राहत बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ टीम को घटनास्थल तक पहुंचने में समय लग जाता है, जिससे राहत बचाव कार्य देरी से शुरू हो पाता है. इसके मद्देनज़र ज़िला स्तर पर ऐसी फोर्स का गठन किया गया है, जो सभी तहसीलों में तैनात होगी और क्विक रिस्पांस दे सकेगी.

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कंट्रोल रूम से की जा रही है पूरे ज़िले की स्थिति की निगरानी.


कब और कैसे रिस्पांस करेगी डीडीआरएफ?
आपदा की दृष्टि से टिहरी ज़िले के घनसाली, नरेन्द्रनगर क्षेत्र सबसे अधिक संवेदनशील हैं. हालांकि घनसाली में एसडीआरएफ की टीम पहले से मौजूद है लेकिन बड़ा और सीमान्त क्षेत्र होने के चलते कई बार दूरस्थ इलाकों तक पहुंचने में एसडीआरएफ की टीम को काफी समय लग जाता था, जिससे बचाव कार्य में देरी होती थी. लेकिन डीडीआरएफ की टीम तहसीलों में तैनात होने से आपदा की स्थिति में तुरंत बचाव कार्य हो सकेगा, ऐसा दावा किया गया है. मानसून के चलते आपदा की दृष्टि से जिला आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम द्वारा ज़िले की मॉनीटरिंग की जा रही है और अधिकारियों व कर्मचारियों को भी अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं.

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मानसून में किसी भी अप्रिय घटना होने पर कंट्रोल रूम द्वारा संबधित क्षेत्र में डीडीआरएफ की टीम सहित अधिकारियों को सूचना देकर क्विक रिस्पॉंस के लिए निर्देशित किया जा सकेगा. ज़िला आपदा प्रबंधन अधिकारी बृजेश भट्ट का कहना है कि डीडीआरएफ टीम में शामिल जवानों को आपदा राहत बचाव कार्य आदि की ट्रेनिंग दी जा चुकी है.

Uttarakhand News: ट‍िहरी के इस शाप‍ित राजमहल में भटकती हैं आत्‍माएं और आश‍िक...

उत्‍तराखंड के ट‍िहरी में है ये शापित राजमहल

Uttarakhand News: उत्‍तराखंड के टिहरी में राजा प्रताप शाह ने प्रतापनगर की सुंदरता को देखते हुए प्रतापनगर में ऐतिहासिक राजमहल का निर्माण कराया, जहां ग्रीष्मकाल में उनका राजदरबार चला करता था और इसके ठीक सामने रानी का महल भी बनाया गया.

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आज हम आपको उत्‍तराखंड के टिहरी के एक ऐसे राजमहल के बारे में बताने जा रहे है जिसे शापित राजमहल कहा जाता है. राजशाही खत्म होने के बाद प्रताप शाह के इस ऐतिहासिक राजमहल में अब सिर्फ आत्माएं भटकती है और आशिक अपने टूटे हुए दिल का दर्द इसकी दीवारों पर लिखते है. पढ़ें ये पूरी रिपोर्ट...

महाराजा सुदर्शन शाह ने टिहरी को अपनी राजधानी बनाया था और उसके बाद उनके उत्तराधिकारियों प्रताप शाह ने प्रतापनगर, कीर्तिशाह ने कीर्तिनगर और नरेन्द्रशाह ने नरेन्द्रनगर को अपनी राजधानी बनाया और 1815 से 1949 तक शासन किया. राजा प्रताप शाह ने प्रतापनगर की सुंदरता को देखते हुए प्रतापनगर में ऐतिहासिक राजमहल का निर्माण कराया, जहां ग्रीष्मकाल में उनका राजदरबार चला करता था और इसके ठीक सामने रानी का महल भी बनाया गया.

स्थानीय निवासी मनीष राणा ने बताया क‍ि 1949 में राजशाही का अंत होने के बाद इस ये राजमहल वीरान पड़ गया और खंडहर में तब्दील हो गया. उस समय के इस ऐतिहासिक राजमहल में जाने से आज डर लगता है और आत्माओं के होने आभास होता है. वहीं इसकी दीवारों पर आपकों आशिकों के टूटे हुए दिल का दर्द साफ दिखाई देता है.

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उत्‍तराखंड के राजमहल में आशिक अपने टूटे हुए दिल का दर्द इसकी दीवारों पर लिखते है.


प्रतापनगर ब्लाक प्रमुख प्रदीप रमोला ने बताया क‍ि प्रताप शाह के इस ऐतिसाहिक राजमहल अब आवारा पशुओं का भी ठीकाना बन गया है. आवारा पशु दिन भर राजमहल के आसपास चरते है और गोबर और विश्राम करने इसी रामहल में आते है. जहां राजशाही के समय यहां राजदरबार लगता था वहीं आज ये भूत प्रेत आत्माओं का बसेरा माना जाता है और दिन में जाने में भी यहां डर लगता है. इस ऐतिहासिक धरोहर को अब पर्यटन की दृष्टि से डेवलेप किए जाने की योजना चल रही है जिससे स्थानीय युवाओं को भी रोजगार मिलेगा.

जहां राजशाही के समय राजा प्रताप शाह का ये राजमहल प्रतापनगर की पहचान हुआ करता था. वहीं आज ये भूत प्रेत आत्माओं का ठीकाना माना जाता है. जहां दिन के उजाले में भी जाने से लोग डरते है ऐसे में इस ऐतिहासिक धरोहर को टिहरी झील पर्यटन सर्किट से जोड़ने से इसे एक नई पहचान मिलेगी.

Positive India: उत्तराखंड का गांव बना प्रेरणा, कोरोना से लड़ने के लिए खड़े हुए ग्रामीण, दूसरे कर रहे नकल

थान गांव में बनाया गया आइसोलेशन सेंटर.

Good Initiative: उत्तराखंड में कोरोना के मामले घटते दिख रहे हैं, लेकिन पिथौरागढ़ समेत पहाड़ी ज़िलों में हालात अब भी चिंताजनक हैं. कोरोना गांवों तक पहुंच रहा है, लेकिन इस महामारी से निपटने जागरूकता और हिम्मत भी ग्रामीण इलाकों में कम नहीं है.

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टिहरी. आप हर काम के लिए सरकार या प्रशासन का मुंह नहीं ताक सकते. हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने और इंतज़ार करते रहने से अच्छा होता है कि आप अपनी समस्या के हल के लिए खुद खड़े हो जाएं. बस यही सोचकर ज़िले के नरेन्द्रनगर ब्लॉक के थान गांव के लोगों ने जब देखा कि कोरोना गांवों में पैर पसार रहा है और क्वारेंटाइन व आइसोलेशन (Quarantine And Isolation Center) सेंटरों में लोड बढ़ने लगा है तो ग्रामीणों ने वक्त बगैर ज़ाया किए अपने गांव में अपने ही श्रम और संसाधनों से ये सेंटर बना दिए. कोविड गाइडलाइन (Covid Guidelines) का पालन करते हुए बनाए गए इन सेंटरों से आसपास के कई गांव प्रेरणा ले रहे हैं.

थान गांव के एक स्कूल में 5-5 बैड का क्वारेंटाइन और आइसोलेशन सेंटर बनाया गया है, जहां प्रवासियों को गांव लौटने पर क्वारेंटाइन किया जा रहा है. किसी घर में यदि कोरोना संक्रमित व्यक्ति है, तो उसे भी यहां आइसोलेशन सेंटर में रखा जाएगा, जिससे उसके परिवार और अन्य ग्रामीणों को संक्रमण का खतरा न हो. थान में इस तरह की पहल को देखकर आसपास के ग्रामीण भी अब अपने गांवों में ऐसी व्यवस्था कर रहे हैं.

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कैसे हुईं तमाम व्यवस्थाएं?
थान में इस पहल को देखकर सामाजिक कार्यकर्ता भी मदद का हाथ बढ़ा रहे हैं. ब्लाक स्तर से सेनेटाइज़ेशन मशीन, सेनेटाइज़र, मास्क दिए गए हैं तो वहीं खाड़ी के ही एक सामाजिक संगठन द्वारा इन्हें ज़रूरी दवाईयां, थर्मल स्कैनर, आक्सीमीटर आदि भी उपलब्ध कराए गए हैं. ग्रामीण इन सेंटरों पर ड्यूटी भी कर रहे हैं और ज़रूरत पड़ने पर आसपास के अस्पताल के डॉक्टरों से लगातार संपर्क रखा जा रहा है.

कैसे हुई यह पहल?
पिछले दिनों गांवों में कोरोना संक्रमण के मामले एकाएक बढ़ गए थे, जिसके बाद से ग्रामीणों के बीच जागरूकता बढ़ी. चूंकि यहां प्रशासन की ओर से मदद पहुंचने में काफी वक्त लग जाता, इसलिए थान गांव ने अपने स्तर पर ही पहल की. इसकी देखा-देखी आसपास के गांवों के लोग भी जागरूक होकर कोरोना कंट्रोल के लिए अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं. खाली पड़े स्कूलों और पंचायत भवनों को इन सेंटरों के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है.

Positive Story : उत्तराखंड का यह कस्बा अपने बूते बना मिसाल, 14 महीनों में कोई कोरोना केस नहीं

टिहरी का कोटी कस्बा.

उत्तराखंड में 15-16 मार्च 2020 को पहला कोरोना वायरस पॉज़िटिव केस पाया गया था, तबसे 14 महीनों के बाद एक छोटा सा कस्बा ऐसा है, जहां अब तक संक्रमण नहीं पहुंचा है. टिहरी के इस इलाके ने अपने दम पर कमाल कैसे किया? जानिए.

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टिहरी. कोविड महामारी के दौर में सरकार से लेकर विशेषज्ञों तक सभी यह हिदायत पिछले करीब डेढ़ साल से दे रहे हैं कि सावधानी और सतर्कता ही सुरक्षा है. लोगों से यही अपील लगातार की जा रही है और ऐसी भी खबरें लगातार हैं कि लोग इन बातों को गंभीरता से नहीं ले रहे. लेकिन उत्तराखंड के एक कस्बे ने सावधानी बरतने की मिसाल इस तरह कायम की है कि जबसे कोरोना महामारी का कहर देश में टूटा है, यानी पिछले करीब सवा साल से यहां कोविड डेथ तो दूर की बात है, कोई पॉज़िटिव केस भी अब तक नहीं आया है.

टिहरी के कोटी कस्बे के लोगों ने कोविड के शुरूआती दौर से अब तक लगातार सावधानियां बरती हैं और पुलिस व प्रशासन के साथ मिलकर इस तरह सामंजस्य बनाया है कि अभी तक यहां कोई संक्रमण केस नहीं है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां से दूसरे शहरों या राज्यों में काम करने लोग जाते हैं और बाहर से लोग आते भी हैं, बावजूद इसके यहां इस तरह की सफलता बड़ी बात है.

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कोटी में पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर लोगों ने नियम कायदे बनाए और पालन किया.


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कोटी ने आखिर कैसे किया कमाल
टिहरी झील से सटे कोटी कस्बे में करीब 300 की आबादी है, जिसमें कई समुदायों और राज्यों के लोग शामिल हैं. ज़्यादातर लोग यहां टीएचडीसी में नौकरी करने के साथ ही व्यवसाय पर निर्भर करते हैं. पिछले साल कोविड संक्रमण शुरू होते ही यहां के लोगों ने पक्का इरादा किया कि वो सभी सावधानियां बरतेंगे और गाइडलाइन का पूरी तरह पालन करेंगे. मास्क, सेनेटाइजेशन और सोशल डिस्टेसिंग अपनाते हुए इन लोगों ने बाहरी लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी. यही नहीं, इन लोगों ने आसपास के लोगों को भी जागरूक करने का काम किया.

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'किसी को समझाने से पहले देना पड़ता है उदाहरण'
कोटी जागरूकता की अलख घरों से जगी, फिर व्यापार मंडल और पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर लोगों ने गाइडलाइन को हर कीमत पर मानने का संकल्प लिया. इन दिनों भी कोटी के लोग अपने इलाके के साथ ही, आसपास के लोगों को गाइडलाइन समझा रहे हैं. महिलाओं की इसमें बड़ी भूमिका है और वो मास्क ठीक से पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग रखने के बारे में टोकती रहती हैं. ये लोग निजी संसाधनों से लगातार सेनेटाइजेशन करवा रहे हैं. सभी का कहना है कि पहले उन्हें खुद जागरूक दिखना पड़ेगा तभी और लोग उनकी बात मानेंगे.
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