Lockdown का असर, टिहरी में बकरियां चरा रहा है सिंगापुर का शेफ़
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Lockdown का असर, टिहरी में बकरियां चरा रहा है सिंगापुर का शेफ़
कोरोना संकट की वजह से करोड़ों की संख्या में लोग बेरोज़गार हो गए हैं और लाखों की सैलेरी पाने वाले लोगों को खेती-पशुपालन तक करना पड़ रह है.

घनसाली, प्रतापनगर और थौलधार क्षेत्र के अधिकतर युवा विदेशों और दूसरे राज्यों में होटल्स में काम करते हैं. लॉकडाउन में उन्हें घर लौटना पड़ा है.

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टिहरी. कोरोना महामारी (COVID-19 Pandemic) और इसके चलते हुए लॉकडाउन ने भारत ही नहीं दुनियाभर में अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है. कोरोना संकट की वजह से करोड़ों की संख्या में लोग बेरोज़गार हो गए हैं और लाखों की सैलरी पाने वाले लोगों को खेती-पशुपालन तक करना पड़ रह है. टिहरी जिले के 70 सदी लोग विदेशों और अन्य राज्यों में काम करते थे. बहुत से होटल इंडस्ट्री में काम करते थे, जो कोरोना वायरस की वजह से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक है. स्थिति यह हो गई है कि कोरोना संकट से पहले सिंगापुर के एक होटल में शेफ़ रहे एक युवक को घर आकर बकरियां पालनी पड़ रही हैं.

लॉकडाउन में लौटना पड़ा घर 

टिहरी के घनसाली, प्रतापनगर और थौलधार क्षेत्र के अधिकतर युवा होटल लाइन में विदेशों और दूसरे राज्यों में काम करते हैं. लॉकडाउन के बाद होटल बंद हो गए और ज़्यादातर लोगों को घर वापस लौटना पड़ा है. तिवाड़ गांव का 28 वर्षीय आशीष डंगवाल दो साल पहले सिंगापुर गए थे और वहां होटल में बतौर शेफ़ काम करते थे.



आशीष के घर में उसकी पत्नी और 3 बच्चों के अलावा मां, पिता, विकलांग भाई भी थे. पिछले साल मां-पिता की मृत्यु हो गई जिसके बाद आशीष की ज़िम्मेदारी और बढ़ गई. लॉकडाउन के चलते हज़ारों लोगों की तरह उन्हें भी घर लौटना पड़ा. क्वारंटाइन पीरियड पूरा करने के बाद उन्हें अपने परिवार की रोज़ी रोटी की चिंता सताने लगी.



भविष्य की चिंता 

दुनियाभर में जारी अनिश्चितता के बीच ऐसा लग नहीं रहा कि चीज़ें जल्दी ही सामान्य हो पाएंगी और होटल खुल पाएंगे. यह देखते हुए आशीष ने अपने बचे खुचे पैसे से थोड़ा राशन भरा और बाकी पैसों से बकरियां खरीदीं. आशीष का कहना है कि उनके पास जितना पैसा था राशन और बकरियां खरीदने में खत्म हो गया. अब वह बकरी चराकर किसी तरह अपने परिवार की रोजी रोटी चला रहे हैं लेकिन बच्चों के भविष्य की चिन्ता उन्हें खाए जा रही है.

tehri migrants in home, जो युवा अब अपने गांव लौटे हैं उनको भी भविष्य की चिन्ता सताने लगी है और वे सरकार से गांवों में ही रोज़गार दिलाने की की मांग कर रहे हैं.
जो युवा अब अपने गांव लौटे हैं उनको भी भविष्य की चिन्ता सताने लगी है और वे सरकार से गांवों में ही रोज़गार दिलाने की की मांग कर रहे हैं.


स्थानीय युवा राजेन्द्र सिंह रावत कहते हैं कि बेरोज़गारी के चलते ही युवा गांवों से पलायन कर रहे हैं. कोरोना वायरस के चलते अब तो बाहर भी काम बंद हो गया है ऐसे में युवा कैसे अपना भविष्य बनाएंगे इसकी चिन्ता लगातार बढ़ रही है.

रोजगार की मांग 

घनसाली, प्रतापनगर और थौलधार क्षेत्र के जो युवा अब अपने गांव लौटे हैं उनको भी भविष्य की चिन्ता सताने लगी है और वे सरकार से गांवों में ही रोज़गार दिलाने की मांग कर रहे हैं. टिहरी जिले के प्रभारी मंत्री धनसिंह रावत का कहना है सरकार द्वारा प्रवासियों को लगातार लाया जा रहा है और दोबारा पलायन न हो इसके लिए गांवों में ही रोज़गार की योजना बनाई जा रही है. युवाओं को कृषि, डेयरी, पशुपालन से जो़ड़ने के लिए कई स्कीम लॉन्च की गई हैं. हालांकि चुनौती इन ढेर सारी योजनाओं को ज़मीन तक उतारना और सही लोगों को इनका फ़ायदा दिलाना है.

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