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टिहरी: ग्रामीणों ने भिलंगना नदी पर बन रहे हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट के खिलाफ खोला मोर्चा

आपदा की दृष्टि से भी भिलंगना घाटी संवेदनशील जोन है

आपदा की दृष्टि से भी भिलंगना घाटी संवेदनशील जोन है

Bhilangana Hydro Power Project: उत्तराखंड में चमोली आपदा के बाद पहाड़ों में हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट विरोध शुरू हो गया है. टिहरी के दूरस्त घुत्तु में भिलंगना नदी पर तीन 5-5 मेगावाट के हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं. ग्रामीणों के विरोध के चलते फिलहाल काम रोक दिया गया है.

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टिहरी. चमोली आपदा के बाद पहाड़ों में हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट का विरोध शुरू होने लगा है. टिहरी के घुत्त में ग्रामीणों ने भिलंगना नदी पर बन रहे हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है. टिहरी के दूरस्त घुत्तु में भिलंगना नदी पर तीन 5-5 मेगावाट के हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं और शासन प्रशासन द्वारा अब इनके निर्माण की तैयारी की जा रही है. ग्रामीणों के विरोध के चलते इनका काम फिलहाल रोक दिया गया है. आपदा की दृष्टि से भी भिलंगना घाटी संवेदनशील जोन है और घुत्तु के ऊपर खतलिंग ग्लेशियर है जो काफी विशालकाय है. इसके साथ ही खतलिंग घाटी में भीमताल, मात्री ताल, लिग ताल के अलावा कई ताल हैं. पॉवर प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए ब्लास्टिंग करने पर ये ताल टूट सकते हैं और भारी पानी भिलंगना नदी में आने से घुत्त के साथ ही आसपास के क्षेत्र और घनसाली को भी खतरा हो सकता है.

2013 की केदारनाथ आपदा में भी घुत्तु क्षेत्र में भारी तबाही मचाई थी. हालांकि जानमाल का नुकसान नहीं हुआ था लेकिन भिलंगना घाटी पूरी तरह तहस नहस हो गई थी. वहीं कुछ लोगों का मानना है कि पहाड़ों में बड़े हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट के निर्माण से प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है और पहाड़ों में छोटे पॉवर प्रोजेक्ट लगाने चाहिए जिससे विकास के साथ साथ स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल सके. प्रशासन द्वारा इस संबध में विशेषज्ञों द्वारा सर्वे कराए जाने की बात कही जा रही है.

उत्तराखंड को भले ही ऊर्जा प्रदेश बनाने की कवायद की जा रही है लेकिन प्राकृतिक और मानवजनित आपदाओं की भी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए. ऐसे में शासन प्रशासन को केदारनाथ और चमोली की आपदा से सबक लेकर ही विकास योजनाओं को आगे बढ़ाना चाहिए.
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