Lockdown: न मोदी, न सोनिया किचन और न मित्र पुलिस... इन नेपाली मज़दूरों तक नहीं पहुंचा कोई, है भूख से मरने का डर
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Lockdown: न मोदी, न सोनिया किचन और न मित्र पुलिस... इन नेपाली मज़दूरों तक नहीं पहुंचा कोई, है भूख से मरने का डर
नेपाल भेजने की मांग को लेकर एसडीएम ऑफिस पहुंचे इन नेपाली मजदूरों ने कहा कि अगर उन्हें नेपाल नहीं भेजा गया तो वे भूख से मर जाएंगे.

इन गरीब मज़दूरों ने किसी तरह एक समय खाकर दो महीने गुज़ार लिए अब एक बार खाने के पैसे भी नहीं बचे हैं.

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टिहरी. कोरोना संक्रमण के चलते लाखों की संख्या में दिहाड़ी मज़दूर परेशान होकर अपने घरों को निकले तो हज़ारों की संख्या में उनकी मदद के लिए हाथ भी बढ़े. शुरुआती फजीहत के बाद सरकार ने भी ज़रूरतमंदों को राशन और खाना देना शुरु किया था. कोशिश हर भूखे तक खाना पहुंचाने की थी लेकिन टिहरी में फंसे नेपालियों तक मदद का कोई हाथ नहीं पहुंचा. विदेश में मज़दूरी कर घर चलाने वाले इन गरीब मज़दूरों ने अपने पैसों से किसी तरह एक समय खाकर दो महीने गुज़ार लिए हैं. अब ये घर भेजने की गुहार लगा रहे हैं क्योंकि अब एक तो एक बार खाने के पैसे भी नहीं बचे हैं और कोरोना से नहीं, भूख से मरने का डर लग रहा है.

एक टाइम खाकर काटे 2 महीने

लॉकडाउन में ज़रूरतमंदों को राशन पहुंचाने की होड़ भी उत्तराखंड में दिखी. बीजेपी मोदी किचन से लाखों लोगों तक खाना पहुंचाने का दावा करते हुए आंकड़े और फोटो जारी करती रही तो कांग्रेस ने भी सोनिया किचन शुरु कर गरीबों की मदद करने वालों की लिस्ट में अपना नाम लिखवा लिया. लेकिन लाखों के आंकड़ों में चंद नंबर छूट गए.  टिहरी जिले के चंबा के 45 नेपाली मजदूरों ने कहा कि लॉकडाउन के करीब दो महीने में उन्हें किसी तरह की कोई मदद नहीं मिली, न कोई उन्हें राशन देने आया.



अपने घर नेपाल भेजने की मांग को लेकर एसडीएम ऑफिस पहुंचे इन नेपाली मजदूरों ने कहा कि अगर उन्हें नेपाल नहीं भेजा गया तो वे भूख से मर जाएंगे. उनका कहना है कि ये लोग अपनी बचत के पैसों से मिलकर बारी-बारी से राशन लाते थे और फिर किसी तरह पेट की आग बुझाई. दो महीने तो ये एक दिन का खाकर ज़िंदा रहे लेकिन अब इनके पैसे और राशन दोनों ही खत्म हो गया है और अब ये और यहां नहीं रह सकते है.
पता ही नहीं चला बीजेपी को

लॉकडाउन की शुरूआत में बीजेपी ने मोदी किचन से खाना और राश किट बांटी तो थी लेकिन वे सिर्फ मुख्यालय और उसके आस-पास के ज़रूरतमंदों को ही मिलीं. चंबा और उसके आसपास के क्षेत्रों में फंसे इन नेपाली मजदूरों तक कोई मदद नहीं पहुंची.

बीजेपी ज़िलाध्यक्ष विनोद रतूड़ी का कहना है कि नई टिहरी में तो हमने नेपाली मजदूरों को राशन दिया लेकिन चंबा का हमें पता नहीं था. अब पता लगा है तो उन नेपाली मजदूरों तक मदद पहुंचाई जाएगी.

देर हो गई कांग्रेस को 

कांग्रेस ने भी राहुल-सोनिया के नाम से लॉकडाउन में ज़रूरतमंदों तक राशन पहुंचाया और फोटो खिंचवाई लेकिन इन नेपाली मजदूरों तक वह भी नहीं पहुंच सकी. कांग्रेस जिलाध्यक्ष राकेश राणा का कहना है कि उन्होंने पहले ज़िला मुख्यालय के ज़रूरतमंदों तक राशन पहुंचाया और बाद में चंबा की लिस्ट बनाई.

राणा कहते हैं कि जब तक हम चंबा राशन देने जाते तब तक प्रशासन ने खुले तौर पर राशन बांटने में पाबंदी लगा दी और इन नेपाली मजदूरों तक मदद नहीं पहुंच सकी.

समस्या नहीं बताई, कहे पुलिस

लॉकडाउन में देश भर की तरह पुलिस को भी खूब वाहवाही मिली. पुलिस राशन-पानी, दवा-केक तक पहुंचाती दिखी और तारीफ़ पाई. लेकिन चंबा में प्रशासन और पुलिस इन मजदूरों तक पुलिस और प्रशासन की मदद भी नहीं पहुंच सकी.

चंबा थानाध्यक्ष सुंदरम शर्मा का कहना है कि हमने एनएच और परिवार वाले बहुत ज्यादा गरीबों को राशन की किट बांटी. उनका कहना है कि ये नेपाली मजदूर तो दिहाड़ी कर रहे थे और इन्होंने प्रशासन और पुलिस को अपनी समस्या भी नहीं बताई.

अब तो बस घर पहुंचा दो

नेपाली मजदूर पदम बहादुर का कहना है कि लॉकडाउन के चलते उन्हें कहीं से कोई मदद नहीं मिली और अब उनके पैसे खत्म हो गए हैं. अब उन्हें मदद नहीं चाहिए वह बस घर जाना चाहते हैं. प्रशासन अब इतनी मदद कर दे कि उन्हें घर पहुंचा दे.

दूसरे नेपाली मज़दूर जीरा बहादुर का कहना है कि जब तक उनके पास पैसे थे, तब तक राशन भी आ जा रहा था. अब पैसे ही खत्म हो गए है और काम-धंधा है नहीं तो वो यहां रहकर क्या करेंगे. उन्होंने कोरोना से नहीं बल्कि भूख से मरने का डर सता रहा है.
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