Lockdown: पंजाब में फंसे हैं बेटे, घर लाने के लिए प्रशासन के आगे गिड़गिड़ा रहा है गरीब पिता
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Lockdown: पंजाब में फंसे हैं बेटे, घर लाने के लिए प्रशासन के आगे गिड़गिड़ा रहा है गरीब पिता
लॉकडाउन में दो महीने से बेटे भी बेरोज़गार हैं और उनके पास जो पैसा था वह खत्म हो गया है. अब वे घर आने के लिए अपने पिता से पैसे मांग रहे हैं.

मोची का काम करने वाले 62 वर्षीय जोगू राम ने कर्ज लेकर अपने दो बेटों को होटल में काम करने के लिए पंजाब भेजा था. लेकिन अब Corona संक्रमण के चलते वहीं फंस गए हैं.

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टिहरी. लॉकडाउन (Lockdown) की सबसे अधिक मार उन लोगों पर पड़ी है जो दूसरे राज्यों में मेहनत-मज़दूरी करके अपना परिवार पालते थे. टिहरी के युवा तो बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों और विदेशों में होटल लाइन में काम करते हैं. होटल बंद होने से अब वे अपने कमरों में कैद हैं और घर वापसी के लिए घरवालों से ही पैसे मांग रहे है. ऐसा ही एक बेबस पिता टिहरी के बौराड़ी में है जो अपने दो बेटों को पंजाब से लाने में असमर्थ है और प्रशासन से बेटों को घर लाने के लिए गिड़गिड़ा रहा है.

कर्ज़ लेकर भेजा था पंजाब
नई टिहरी ज़िला मुख्यालय के पास ही बौराड़ी मार्केट के किनारे मोची का काम करने वाले 62 वर्षीय जोगू राम ने दो साल पहले कर्ज लेकर अपने दो बेटों को होटल में काम करने के लिए पंजाब भेजा था. दोनों बेटे होटल में काम करके अपने माता-पिता को पैसा भेजते थे जिससे इनकी रोज़ी-रोटी चलती थी.

पिछले साल जोगू राम की पत्नी काफी बीमार हो गई और सारी बचत उनके इलाज में लग गई लेकिन उन्हें बचा नहीं जा सका. बढ़ती उम्र में जोगू राम को भी कई बीमारियों ने घेर लिया और वह भी घर बैठ गए. बेटे पंजाब से जो पैसा भेजते रहे उससे उनका काम चलता रहा. लॉकडाउन में दो महीने से बेटे भी बेरोज़गार हैं और उनके पास जो पैसा था वह खत्म हो गया है. अब वे घर आने के लिए अपने पिता से पैसे मांग रहे हैं.
बीमारी में भी काम पर लौटे


जोगूराम का कहना है कि उसने अपने बेटों को वापस लाने के लिए नगर पालिका नई टिहरी में नाम भी लिखा दिया है लेकिन पालिका ने अभी तक इसमें कुछ आगे कार्रवाई नहीं की है. जब भी वह पालिका जाते हैं तो उन्हें बताया जाता है कि प्रशासन को लिस्ट भेज दी गई है लेकिन अभी तक कुछ हो नहीं पाया है.

tehri poor father, जोगू राम बीमारी के बावजूद भी अपने पुराने काम में लौट आए हैं लेकिन वह इतना पैसा वह नहीं जुटा पा रहे हैं कि अपने बेटों को भेज सकें और उन्हें घर ला सकें.

अपनी तकलीफ़ बताते हुए जोगू राम बेहद बेबस नज़र आते हैं. 

बेटों को वापस लाने और पैसा जुटाने के लिए जोगू राम बीमारी के बावजूद भी अपने पुराने काम में लौट आए हैं लेकिन वह इतना पैसा वह नहीं जुटा पा रहे हैं कि अपने बेटों को भेज सकें और उन्हें घर ला सकें.

क्रूर मजाक
इस मामले में टिहरी के एसडीएम फींचाराम चौहान का कहना है कि जो लोग बाहर फंसे हुए हैं उनकी लिस्ट बनाई जा रही है. यह लिस्ट शासन को भेजी जाएगी क्योंकि शासन स्तर से ही इन्हें दूसरे राज्यों से लाने की कार्रवाई की जाएगी. फींचाराम कहते हैं कि इसके लिए शासन द्वारा जारी साइट पर ऑनलाइन भी आवेदन किया जा सकता  है.

जोगू राम के लिए एसडीएम का यह बयान क्रूर मज़ाक की तरह है. उन्हें भला वेबसाइट से क्या मतलब, वह अपना काम कर चुके हैं, पालिका में बेटों का नाम-पता दर्ज करवाकर और कर रहे हैं, हर जगह गुहार लगा कर. लेकिन प्रशासन को उनकी तकलीफ़ से नहीं उन घोषणाओं से मतलब है जो आला अधिकारियों ने की हैं वरना कम से कम इतना तो किया ही जा सकता था कि जोगू राम को यह आश्वासन दिया जाता कि उनके बेटों को वापस लाने के लिए काम किया जा रहा है और उन्हें राशन-खाना भी मिलेगा, वह थोड़ा सब्र रखें.


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