कर्ज़ लेकर विस्थापन के लिए आंदोलन ज़िंदा रखे हैं नंदगांव के लोग, 22 लाख हुआ उधार

कृषि भूमि तबाह होने से ग्रामीणों की आजीविका का साधन भी नष्ट हो गया है. कर्ज़ लेकर और छोटी-मोटी नौकरियां कर ग्रामीण किसी तरह अपना आंदोलन जिंदा रखे हुए हैं.

Saurabh Singh | News18 Uttarakhand
Updated: June 11, 2018, 7:40 PM IST
कर्ज़ लेकर विस्थापन के लिए आंदोलन ज़िंदा रखे हैं नंदगांव के लोग, 22 लाख हुआ उधार
साल 2010 से विस्थापन की मांग को लेकर नंदगांव के ग्रामीण आंदोलन कर रहे हैं और अभी तक ग्रामीण आंदोलन के लिए 20 से 22 लाख रुपये कर्ज़ ले चुके हैं.
Saurabh Singh | News18 Uttarakhand
Updated: June 11, 2018, 7:40 PM IST
देश भर में रोज़ ही सैकड़ों की संख्या में धरने, प्रदर्शन, आंदोलन होते हैं लेकिन टिहरी ज़िले के झील प्रभावित नंदगांव के ग्रामीणों का आंदोलन लाखों का आंदोलन हो गया है. साल 2010 से विस्थापन की मांग को लेकर नंदगांव के ग्रामीण आंदोलन कर रहे हैं और अभी तक ग्रामीण आंदोलन के लिए 20 से 22 लाख रुपए कर्ज़ ले चुके हैं और विस्थापन के नाम पर इन्हें मिला है झूठा आश्वासन.

टिहरी झील के पानी के उतार-चढ़ाव के चलते नंदगांव में भारी भूस्खलन और भूधंसाव होने पर वर्ष 2002 में 97 परिवारों को पूर्णरूप से विस्थापन किया गया और करीब 47 परिवार आंशिक डूब क्षेत्र की श्रेणी में आए. झील के कारण हो रहे लगातार भूस्खलन और भूधंसाव से इन 47 परिवारों पर भी खतरा बढ़ा और मकानों में दरारें बड़ी हो गई और कई मकान पूरी तरह ज़मींदोज़ हो गए.

कृषि भूमि में धंसाव के चलते ग्रामीणों को अपने खेत छोड़ने पड़े, जिसके बाद से ग्रामीण विस्थापन की मांग करने लगे और 2010 से गांव में ही क्रमिक अनशन, धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया. 6 अगस्त, 2012 को 20 ग्रामीण डीएम से मिलने गए. जिनका गाड़ी के किराये से लेकर ज्ञापन, फोटोकॉपी, चाय पानी और भोजन का कुल खर्चा 4260 रुपये था.

उचित आश्वासन नहीं मिलने पर ग्रामीण गांव में ही धरने पर डटे रहे. 7 नवंबर, 2012 को नई टिहरी कलेक्ट्रेट में 15 दिन धरना प्रदर्शन किया गया, जिसका कुल खर्च 13,540 रुपये था. इसी तरह बार-बार 2012 से अभी तक विस्थापन की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन और आंदोलनों में ग्रामीणों का कुल 20 से 22 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं.

कृषि भूमि तबाह होने से ग्रामीणों की आजीविका का साधन भी नष्ट हो गया है. नाते रिश्तेदारों से कर्ज़ लेकर और होटलों में काम कर मेहनत मजदूरी कर ग्रामीण किसी तरह अपना आंदोलन जिंदा रखे हुए हैं. लेकिन आज तक उन्हें कोरे आश्वासन ही दिए हैं. अब भी नंदगांव के ग्रामीण 20 दिनों से नई टिहरी पुनर्वास कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे हुए हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है.
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