मान्यताः Corona से रक्षा को टिहरी में इस देवता की शरण में पहुंच रहे हैं लोग
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मान्यताः Corona से रक्षा को टिहरी में इस देवता की शरण में पहुंच रहे हैं लोग
माना जाता है कि औलिया देवता बीमारियों को क्षेत्र में नहीं आने देते.

उत्तराखंड के टिहरी क्षेत्र में COVID-19 संक्रमण की दर सबसे अधिक होने के बावजदू औलिया देवता के क्षेत्र में कोरोना के न पहुंचने के पीछे लोग देवता का आशीर्वाद मान रहे हैं.

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टिहरी. देवभूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड की अपनी अलग परंपरा है. यहां के प्रत्येक गांव का अपना एक कुल देवता होता है, जिसके पूजन से एक मान्यता जुड़ी होती है. ऐसे ही एक देवता हैं टिहरी में, जिनके बारे में मान्यता है कि ये लोगों को बीमारियों से बचाते हैं. माना जाता है कि औलिया देवता बीमारियों को क्षेत्र में नहीं आने देते. विश्वव्यापी कोरोना महामारी (COVID-19 Epidemic) के इस दौर में जब उत्तराखंड के कई इलाकों में लोग बीमारी की चपेट में आ रहे हैं, यह इलाका अभी तक सुरक्षित है. टिहरी में संक्रमण की दर प्रदेश में सबसे अधिक है, लेकिन इस इलाके के लोग अब तक सेफ हैं.

पुजारी बोले- कोरोना से बचाएंगे औलिया देवता

कोरोना महामारी के इस दौर में भी इन क्षेत्रों में अभी तक कोई कोरोना की चपेट में नहीं आया है, जिसे स्थानीय लोग औलिया देवता का प्रताप मान रहे हैं. औलिया देवता के पुजारी जगदम्बा दास का कहना है कि उनके पूर्वज औलिया देवता की पूजा करते आ रहे हैं. उन्हीं के आशीर्वाद से नई टिहरी, कुलना, मोलधार ओर बौराड़ी क्षेत्र में महामारी नहीं पहुंचती है. पुजारी का दावा है कि कोरोना महामारी के दौर में भी हम औलिया देवता की शरण में हैं और उन्हीं के आशीर्वाद से अभी तक इन क्षेत्रों में कोरोना महामारी नहीं पहुंची है. विज्ञान के तथ्यों से इतर औलिया देवता की मान्यता की पुष्टि के सटीक प्रमाण नहीं मिलते, लेकिन लोगों को अपनी परंपरा पर पूरा भरोसा है.



ऐसी है देवता की मान्यता
राजशाही के दौर से ही टिहरी, कुलणा, मोलधार और सारज्यूला क्षेत्र के लोग औलिया देवता को अपना आराध्य मानते रहे हैं. नई टिहरी शहर के बीचों-बीच स्थित है औलिया देवता का मंदिर. कहा जाता है कि औलिया देवता के आशीर्वाद से हैजा, मलेरिया, डेंगू जैसी बीमारियां आज तक इन क्षेत्रों में नहीं पहुंचतीं.

मान्यता यह भी है कि जब इस बात का पता टिहरी के राजा को चला तो उन्होंने औलिया देवता के पुजारी को बुलाया और उसे एक तांबे का गड़ुवा सम्मान के तौर पर दिया. यह बात भी अनूठी है कि औलिया देवता के पुजारी हरिजन होते हैं, जिनकी पीढ़ियां अब भी देवता के पूजा-पाठ में लगी हैं.

 

पूरे विश्व को बचाने की प्रार्थना 

नई टिहरी निवासी दिनेश डोभाल का कहना है कि औलिया देवता हम सभी के आराध्य देव हैं. कोरोना से बचाव के लिए हम फिर से उनकी शरण में आए हैं. इस महामारी से औलिया देवता ही हमें बचा सकते हैं. हम औलिया देवता से प्रार्थना करते हैं कि वे पूरे विश्व को इस महामारी से बचाएं.

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