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दरकती दीवारों के बीच दहशत में बैठते हैं शिक्षक, छात्र... क्या होगी पढ़ाई?

Sudhir Bhatt | News18India
Updated: October 24, 2017, 5:19 PM IST
दरकती दीवारों के बीच दहशत में बैठते हैं शिक्षक, छात्र... क्या होगी पढ़ाई?
फ़ाइल फ़ोटोः उत्तराखंड के एक खस्ताहाल स्कूल की तस्वीर

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  • Last Updated: October 24, 2017, 5:19 PM IST
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स्कूल सिर्फ़ शिक्षा का प्रतीक भर नहीं है यह वह स्थान है जहां बच्चों के मन-मस्तिष्क में शिक्षा के प्रति आदर बनता है, उसकी ज़ररूत समझ आती है लेकिन जब स्कूलों के अंदर बच्चों के मन-मस्तिष्क में शिक्षा की जगह डर और दहशत घर बनाने लगे तो यह अपने मूल उद्देश्य के ख़िलाफ़ जाने लगता है.

देवप्रयाग विधानसभा के अंतर्गत कड़ाकोट पट्टी में मौजूद राजकीय प्राथमिक विद्यालय स्यालसौड़ का  खस्ताहाल भवन कभी भी बच्चों की जान पर भारी पड़ सकता है.

इस स्कूल में आने पर आपको विद्यालय भवन में पड़ी दरारें मिलती हैं जो इतनी बड़ी हैं कि उनसे  आर-पार दिखता है. आंगन धंसा हुआ है और कमरे एक दूसरे का साथ छोड़ते नज़र आते हैं.

कीर्तिनगर ब्लॉक के दुर्गम क्षेत्र में मौजूद राजकीय प्राथमिक विद्यालय स्यालसौड़ की ये स्थिति पिछले तीन सालों से ऐसी ही है. शिक्षक इन्हीं परिस्थितियों में पढ़ाने को और छात्र पढ़ने को मजबूर हैं.

ज़रा सी बारिश पड़ने पर स्कूल की छुट्टी इस डर से कर दी जाती है कि कहीं स्कूल भर-भराकर न गिर जाय. स्थानयी ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में पढ़ रहे 17 छात्रों और 2 अध्यापकों पर विभाग की लापरवाही कभी भी भारी पड़ सकती है.

स्कूल की इस जर्जर स्थिति के लिए प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत स्कूल के नीचे की ओर बनी सड़क भी एक कारण है जिसकी बेतरतीब कटिंग के दौरान स्कूल का ध्यान नहीं रखा गया और अचानक हुए भूधंसाव की जद में स्कूल भी आया.

हालांकि ऐसा नहीं है कि स्कूल की इस स्थिति से विभागीय अधिकारियों को अवगत नहीं कराया गया हो, बल्कि कई बार लिखित सूचना के बावजूद शिक्षा विभाग के आलाधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है. विभागीय अधिकारियों का कहना है कि विभाग के पास वैकल्पिक भूमि नहीं है जिसके लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है.राजकीय प्राथमिक विद्यालय स्यालसौड़ की जीर्णशीर्ण स्थिति को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि ज्ञान बांटते शिक्षा के मंदिरों की स्थिति अगर ऐसी होगी तो उनके अंदर पढ़ने वाले छात्र कैसे शिक्षा ग्रहण कर रहे होंगे और कैसे अध्यापक पढ़ा रहे होंगे.

ऐसे में यदि शिक्षा के इन मंदिरों से भविष्य के नौनिहालों को पैदा करना है तो सबसे पहले दरकते भवनों का डर उनके दिलो दिमाग से निकालना होगा और ये तभी हो सकता है जब विद्यालयों की स्थिति को दुरुस्त किया जाए.

 

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First published: October 24, 2017, 5:06 PM IST
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