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टिहरी में विस्थापन बना समस्या : 2005 से बाट जोह रहे ग्रामीण, कई बार उठ चुका है मामला

टिहरी में विस्थापन बना समस्या : 2005 से बाट जोह रहे ग्रामीण, कई बार उठ चुका है मामला

टिहरी डैम

टिहरी डैम

Tehri Dam: टिहरी डैम की झील के पानी के उतार चढ़ाव के चलते झील से सटे आसपास के 17 गांवों में भूस्खलन और भूधसांव हो रहा है इसलिए ग्रामीणों 2005 से विस्थापन (displacement) की मांग कर रहे हैं. टीएचडीसी (THDC) और पुर्नवास विभाग बीच तालमेल ना हो पाने से ग्रामीण परेशान हो रहे हैं. विस्थापन के लिए केंद्र सरकार (central government) की स्वीकृति मिल चुकी है.

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टिहरी. कई बार समस्याओं का समाधान कागज़ों पर तो हो जाता है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही होती है. ऐसा ही एक मामला है टिहरी डैम की झील से प्रभावित गांव वालों का. दरअसल 2005 से गांव के लोग विस्थापन की मांग कर रहे हैं जबकि केंद्र सरकार की स्वीकृति भी मिल चुकी है. विस्थापन के लिए टीएचडीसी और पुर्नवास विभाग के बीच तालमेल की कमी के कारण ग्रामीण विस्थापन की बाट जोह रहे हैं. गांव वालों के अनुसारर टीएचडीसी और पुर्नवास विभाग उन्हें सिर्फ गुमराह कर रहा है.

क्यों पड़ी विस्थापन की जरूरत
दरअसल टिहरी डैम की झील के पानी के उतार चढ़ाव के चलते झील से सटे आसपास के 17 गांवों में भूस्खलन और भूधसांव हो रहा है. जिससे मकानों में दरारें आ चुकी है, वहीं कई मकान बल्लियों के सहारे टीके हैं और खेती योग्य भूमि धंस चुकी है. इस समस्या के कारण ग्रामीणों के सामने रोजी रोटी का भी संकट पैदा हो गया है.

नंदगांव, भटकंडा, उठड़, पिपोला, खांड, रोलाकोट सहित 17 गांव के ग्रामीण 2005 से विस्थापन की मांग कर रहे हैं. कई सरकारें इस ​दौरान आईं और गईं लेकिन ग्रामीणों को उनकी समस्या का समाधान नहीं मिला हां, उन्हें झूठे आश्वासन जरूर मिले.

ग्रामीण कर चुके हैं आंदोलन
जब प्रशासन आंखें मूंद ले तो अक्सर लोग आंदोलन का सहारा लेते हैं. यहां भी ग्रामीणों ने अपनी समस्या के हल के लिए कई बार आंदोलन किए लेकिन उनकी समस्या जस की तस बनी हुई है. अब केंद्र सरकार द्वारा टीएचडीसी को विस्थापन के लिए पैसा देने की शर्त पर डैम का जलस्तर 830 किए जाने की अनुमति दी गई लेकिन अभी तक ग्रामीणों के विस्थापन की कार्रवाई शुरू नहीं हो पाई है.

बैठक, सर्वे सब हुआ पर नहीं हुआ विस्थापन
उधर, पुर्नवास विभाग द्वारा कई बार एक्सपर्ट कमेटी द्वारा गांवों का सर्वे कराया जा चुका है लेकिन सर्वे रिपोर्ट पर आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई, वहीं इस मामले को लेकर केंद्र सरकार के स्तर पर भी बैठक हो चुकी है और टीएचडीसी से पैसा देने को कहा गया है लेकिन ग्रामीण टीएचडीसी और पुर्नवास विभाग के आपसी तालमेल की कमी का खामियाजा भुगत रहे हैं.

पुर्नवास निदेशक का कहना है कि जल्द ही नंदगांव से विस्थापन की कार्रवाई शुरू की जाएगी. टिहरी डैम की झील से प्रभावित ग्रामीण विस्थापन की राह में लंबे समय से आंखे बिछाए बैठे हैं लेकिन टीएचडीसी और पुर्नवास विभाग में आपसी तालमेल न होने विस्थापन की कार्रवाई केंद्र सरकार के निर्देश के बावजूद अभी तक शुरू नहीं हो पाई है.

Tags: Tehri Dam, Uttrakhand

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