वॉटर एडवेंचर के लिए पसंदीदा जगह बना टिहरी झील
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वॉटर एडवेंचर के लिए पसंदीदा जगह बना टिहरी झील
ETV/Pradesh18

पर्यटन की अपार संभावनाओं को संजोए रखने वाली टिहरी झील अब पर्यटन के क्षेत्र में विश्व मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बना रही है. मेगा प्रोजेक्ट के तहत टिहरी झील को पर्यटन का केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है.

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पर्यटन की अपार संभावनाओं को संजोए रखने वाली टिहरी झील अब पर्यटन के क्षेत्र में विश्व मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बना रही है. मेगा प्रोजेक्ट के तहत टिहरी झील को पर्यटन का केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है.

राज्य सरकार द्वारा टिहरी झील में वॉटर एडवेंचर स्पोर्टस को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं तलाश की जा रही है.

एशिया की सबसे बड़ी झीलों में शुमार टिहरी झील 42 वर्ग किलोमीटर के एरिया में फैली है जिसे राज्य सरकार द्वारा अब पर्यटन के केंद्र बिन्दु के रूप में विकसित किया जा रहा है. मसूरी धनौल्टी आने वाले पर्यटकों को टिहरी झील की ओर खिंचने के लिए झील में वॉटर एडवेंचर स्पोर्टस को बढ़ावा दिया जा रहा है. जिसमें क्याकिंग, क्नाविंग, रॉफ्टिंग, स्कूटर ड्राइविंग और वॉटर जम्पिंग जैसे खेलों का आयोजन कराया जा रहा है.



राज्य सरकार द्वारा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए टूर ऑपरेटर्स और इन्वेस्टर्स मीट का भी आयोजन किया गया जिससे विश्व पर्यटन मानचित्र पर टिहरी झील को एक अलग पहचान मिल रही है. पर्यटकों की सुविधाओं को देखते हुए झील में फ्लोटिंग मैरिना जिसे चलता फिरता रेस्टोरेंट कहा जाता उसे भी उतारा गया है.
जिससे पर्यटक खाते पीते झील में बोटिंग का आनंद भी ले सकेंगे और आसपास की पहाड़ियों की खूबसूरती को भी निहार सकेंगे. जहां एक तरफ राज्य सरकार के इन प्रयासों से झील में पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों के लिए भी रोजगार के नए अवसर खुल रहे हैं.

सूबे के पर्यटन मंत्री दिनेश धनै का कहना है कि टिहरी झील को पर्यटन के क्षेत्र में विश्व मानचित्र पर अपनी अलग पहचान दिलाना उनका सपना है. इसके लिए राज्य सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और अब मैगा प्रोजेक्ट के तहत टिहरी झील के आसपास के एरिया को विकसित किया जाएगा जिसमें होटल रेस्टोरेंट, स्कूल-कॉलेज, पाथ वे, कैम्पिंग आदि शामिला है.

टिहरी झील में पर्यटन की दृष्टि से समय समय पर कई इवेंट आयोजित कराए जाते हैं और सुझाव मांगे जाते हैं. बोट संचालन की सुरक्षा को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा झील का हाईड्रोग्राफिक सर्वे भी कराया गया जिससे झील के अंदर की इमारतों और पहाड़ियों को चिन्हित कर बोटिंग के लिए पाथ तैयार किया जा रहा है.
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