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VIDEO : टिहरी 1949 तक रहा राजशाही में

पूरे भारत में जब अंग्रेजों की गुलामी के खिलाफ लड़ाई लड़ी जा रही थी तब टिहरी रियासत और उत्तरकाशी के लोग दोहरी गुलामी से जूझ रहे थे. अंग्रेजों की गुलामी और राजशाही.देश की आजादी के बाद भी टिहरी के लोग राजा के गुलाम रहे.

पूरे भारत में जब अंग्रेजों की गुलामी के खिलाफ लड़ाई लड़ी जा रही थी तब टिहरी रियासत और उत्तरकाशी के लोग दोहरी गुलामी से जूझ रहे थे. अंग्रेजों की गुलामी और राजशाही.देश की आजादी के बाद भी टिहरी के लोग राजा के गुलाम रहे.

पूरे भारत में जब अंग्रेजों की गुलामी के खिलाफ लड़ाई लड़ी जा रही थी तब टिहरी रियासत और उत्तरकाशी के लोग दोहरी गुलामी से जूझ रहे थे. अंग्रेजों की गुलामी और राजशाही.देश की आजादी के बाद भी टिहरी के लोग राजा के गुलाम रहे.

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    पूरे भारत में जब अंग्रेजों की गुलामी के खिलाफ लड़ाई लड़ी जा रही थी तब टिहरी रियासत और उत्तरकाशी के लोग दोहरी गुलामी से जूझ रहे थे. अंग्रेजों की गुलामी और राजशाही.देश की आजादी के बाद भी टिहरी के लोग राजा के गुलाम रहे.
    गढ़वाल रियासत सन 1815 में विभाजित होकर टिहरी और ब्रिटिश पौड़ी गढ़वाल में बंट गया था. तब टिहरी और उत्तरकाशी के लोग राजा के अधीन हो गए थे.विभाजन के बाद पौड़ी,चमोली,रूद्रप्रयाग के लोग ब्रिटिश गुलामी में चले गए थे.टिहरी रियासत के लोगों ने राजशाही के खिलाफ 23 जनवरी 1939 को देहरादून में टिहरी राज्य प्रजामंडल का गठन किया.
    टिहरी में जन्मे श्रीदेव सुमन को इसका पहला मंत्री बनाया गया.राजा ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया सुमन ने राजशाही के खिलाफ बिगुल छेड़ दिया.22 नवंबर 1942 को सुमन फिर से गिरफ्तार किए गए और राजा ने ब्रिटिश सरकार के साथ मिलकर उन्हें आगरा सेंट्रल जेल भेज दिया. रिहा होने के बाद सुमन ने सामंत्री शासन को जड़ से उखाड़ने के लिए लोगों को जागरुक करना शुरू कर दिया. 25 जुलाई 1944 को 84 दिन की ऐतिहासिक भूख हड़ताल के बाद श्रीदेव सुमन टिहरी जेल में शहीद हो गए.सुमन की शहादत के बाद क्रान्ति के निर्णायक दौर का नेतृत्व नागेन्द्र सकलानी और दौलतराम ने किया.
    इसी बीच 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ लेकिन टिहरी गढ़वाल की रियासत सामंती व्यवस्था की गुलाम रही.रियासत के खिलाफ आखिरी जंग सकलाना शुरू हुई.1948 में सत्याग्रहियों ने कीर्तिनगर में कब्जा किया. गोली कांड में नागेन्द्र सकलानी और मोलाराम नौटियाल शहीद हो गए. 14 जनवरी 1948 को उनके शवों को जब टिहरी लाया गया. तब तक राजा और उसकी फौज हथियार डाल चुकी थी.15 जनवरी को पंचायत ने टिहरी गढ़वाल राज्य की सत्ता संभाली.1 अगस्त 1949 तक पंचायत का शासन कायम रहा. फिर टिहरी गढ़वाल का तत्कालीन संयुक्त प्रांत में एक संधि के तहत विलय किया गया. तभी से टिहरी रियासत टिहरी और उत्तरकाशी अखंड भारत का हिस्सा बना. (सौरभ सिंह की रिपोर्ट)

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