VIDEO: जानिए, पहाड़ का रक्षाबंधन कहे जाने वाले 'दुबडी पर्व' की खासियत

टिहरी जिले के जौनपुर इलाके के नैनबाग ब्लॉक में मनाया जाने वाला दुबडी त्योहार अपने आप में बेहद अनूठा पर्व है. यूं तो इस त्योहार को इलाके में आने वाले मौसम में अच्छी फसल के लिए मनाया जाता है.

News18 Uttarakhand
Updated: September 6, 2018, 3:03 PM IST
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Updated: September 6, 2018, 3:03 PM IST
उत्तराखंड में टिहरी का जौनपुर इलाका अपनी अनूठी परंपराओं और त्योहारों के लिए जाना जाता है. ऐसा ही एक त्योहार दुबडी है, जिसकी परंपराओं और रीतियों पर अगर गौर करें तो इसे पहाड़ का रक्षाबंधन कहा जा सकता है. इसे मैदानी इलाकों से बिल्कुल ही अलग तरह से मनाया जाता है.

पर्व की खासियत

टिहरी जिले के जौनपुर इलाके के नैनबाग ब्लॉक में मनाया जाने वाला दुबडी त्योहार अपने आप में बेहद अनूठा पर्व है. यूं तो इस त्योहार को इलाके में आने वाले मौसम में अच्छी फसल के लिए मनाया जाता है, लेकिन इसकी खासियत कुछ इस तरह की है कि इसे पहाड़ का रक्षाबंधन भी कहा जाता है. दरअसल, इस दिन गांव की सभी बहनें अपने मायके आती हैं और दुबडी के दिन वो अपने भाई की खुशहाली के लिए पूजा करती हैं. हालांकि इसे मनाने का तरीका थोड़ा अलग होता है. गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि भाद्रपद के शुक्ल पक्ष में जिस गांव में बालिका का जन्म होता है, उस गांव में ये त्योहार मनाया जाता है.

जानकारों की मानें तो दुबडी अलग-अलग फसलों से मिलाकर बनाया जाता है, जिसे खंबे जैसे आकार देकर तैयार किया जाता है. इसमें गांव की फसलों को भरा जाता और बाहर से भांग के पत्तों से लपेटा जाता है. इसको गांव के लोग तैयार करते हैं. इसके बाद इसे लाकर गांव के मंदिर के आंगन में लगाते हैं. गड्ढा खोदकर इसे वहां पर खड़ा कर दिया जाता है. इसके बाद इसकी पूजा अर्चना की जाती है. ये आने वाले मौसम में फसल अच्छी होने का प्रतीक होता है और साल की शुरुआत में इस इलाके का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है.

बता दें कि जब महिलाएं दुबडी की पूजा कर रही होती हैं, ठीक उस समय गांव के दूसरे कोने में पुरुष नाचते-गाते हुए गांव के उस पवित्र आंगन की तरफ बढ़ते हैं, जहां दुबडी लगाई गई हो. दुबडी के चारों तरफ घूम घूमकर ये पारंपरिक नृत्य करते हैं, जिसे रासो कहा जाता है. रासो करते करते अचानक ये सभी दुबडी को गिरा देते हैं. ऐसा माना जाता है इससे वो भगवान का आशिर्वाद प्राप्त करते हैं. इसके पीछे पौराणिक मान्यता भी है.
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