चंद मिनटों का रास्ता घंटों में तय करना पड़ रहा है टिहरी के हज़ारों लोगों को... THDC, पुनर्वास विभाग हैं वजह

टिहरी झील से सटे करीब दर्जन भर गांवों के लोगों के लिए शहर से जुड़ने का आसान ज़रिया रही हैं फेरी बोट. (फ़ाइल फ़ोटो)
टिहरी झील से सटे करीब दर्जन भर गांवों के लोगों के लिए शहर से जुड़ने का आसान ज़रिया रही हैं फेरी बोट. (फ़ाइल फ़ोटो)

डोबराचांठी पुल से आवागमन शुरु हुआ नहीं, टिहरी झील में फेरी बोट संचालन किया गया बंद

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टिहरी जिले में टीएचडीसी और पुर्नवास विभाग की आपसी खींचतान का खामियाजा टिहरी झील से सटे गांव के लोग भुगतने को मजबूर हैं. डोबरा चांठी पुल पर अभी आवागमन शुरू भी नहीं हुआ है और पुर्नवास विभाग ने फेरी बोट संचालन बंद कर दिया है. इसकी वजह से झील से सटे करीब एक दर्जन ग्रामीणों के सामने आवाजाही का संकट खड़ा हो गया है और उन्हें 40-45 किलोमीटर का सफ़र करना पड़ रहा है. पुनर्वास निदेशक इस बारे में पुनर्वास विभाग और टीएचडीसी के अधिकारियों से बात करने की बात कह रही हैं लेकिन ग्रामीणों को यह स्थिति कब तक झेलनी पड़ेगी इस बारे में अभी कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं.

40-45  किलोमीटर का हुआ सफ़र 

बता दें कि टिहरी डैम की झील बनने के बाद से टिहरी झील से सटे गांवों के आवागमन के लिए पुर्नवास विभाग द्वारा फेरी बोट का संचालन शुरु किया गया था जिसका खर्च टीएचडीसी द्वारा वहन किया जाता है. टिहरी झील के कोटी से प्रतापनगर के रोलाकोट, गडोली, नौताड़, डोबरा, छाम, बुल्डोगी सहित एक दर्जन से अधिक गांवों के 5 से 7 हज़ार लोग रोज़ अपने रोज़मर्रा के कामों के लिए फेरी बोट से सफ़र करते हैं. अब फेरी बोट संचालन बंद होने से ग्रामीणों की परेशानियां बढ़ गई हैं.



प्रतापनगर निवासी आनंद रावत ने कहा टिहरी झील से सटे प्रतापनगर क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांव के ग्रामीण अपने रोजमर्रा के कामों के लिए टिहरी झील में फेरी बोट से सफर करते हैं. अचानक फेरी बोट बंद होने से ग्रामीणों को 40 से 45 किलोमीटर सड़क मार्ग से सफ़र करना पड़ रहा है. इसकी वजह से पैसे के साथ-साथ समय की भी बर्बादी हो रही है.
रावत कहते हैं कि डोबरा चांठी पुल पर आवागमन शुरू होने से पहले पुर्नवास विभाग द्वारा फेरी बोट का संचालन बंद करना ग्रामीणों के साथ अन्याय है.

बात करेंगे अधिकारी 

फेरी बोट मालिकों की अलग समस्या है. फेरीबोट मालिक कुलदीप पंवार कहते हैं कि करीब 6 माह से उन्हें पुर्नवास विभाग ने भुगतान नहीं किया है. इसके चलते वह बोट बंद करने को मजबूर हैं. विभाग भुगतान को लेकर न कोई लिखित आश्वासन दे रहा है और न ही मौखिक. मजबूरन उन्हें फेरी बोट संचालन बंद करने का फ़ैसला करना पड़ा.

इस मामले में पुर्नवास निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव का कहना है कि फेरी बोट संचालन का पैसा टीएचडीसी द्वारा दिया जाता है लेकिन टीएचडीसी ने अब पैसा देना बंद कर दिया है. इसकी वजह से इस तरह की समस्या सामने आ रही है. जल्द ही टीएचडीसी के साथ बैठक की जाएगी और शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी.

Tehri ferry boats, पुनर्वास निदेशालय के भुगतान न करने की वजह से बोट मालिकों ने इनका संचालन बंद कर दिया है.
पुनर्वास निदेशालय के भुगतान न करने की वजह से बोट मालिकों ने इनका संचालन बंद कर दिया है.




टिहरी डैम की झील के बनने के बाद से झील से सटे गांवों के लोगों की परेशानियां कम होने का नाम ही नहीं ले रही है. और इन दिक्कतों को वही बढ़ाते हैं जिन पर इन्हें दूर करने की ज़िम्मेदारी है... टीएचडीसी और पुनर्वास विभाग.
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