VIDEO : झील में से झांक रही है पुरानी टिहरी, हरे हो गए इनके ज़ख्म

गर्मी के कारण टिहरी झील का जलस्तर कम हो गया है. झील में पानी कम होने के कारण इसमें डूबी पुरानी टिहरी की कुछ इमारतें दिखने लगी हैं. इन इमारतों को देखकर पुरानी टिहरी के विस्थापित लोग पुरानी यादों में खो गए हैं.

Saurabh Singh | News18 Uttarakhand
Updated: May 7, 2018, 7:41 PM IST
Saurabh Singh | News18 Uttarakhand
Updated: May 7, 2018, 7:41 PM IST
टिहरी झील का जलस्तर कम क्या हुआ, मानो यादों का समंदर उमड़ पड़ा. भीषण गर्मी में झील का जलस्तर कम हो गया है. पानी कम होते ही इसमें से पुरानी टिहरी की इमारतें दिखने लगी हैं. टिहरी डैम निर्माण के लिए अपना घर बार छोड़ने वाले पुरानी टिहरी के विस्थापित इन्हें देखकर यादों में खो गए हैं.
टिहरी डैम की झील का जलस्तर अपने न्यूनतम 749 आरएल मीटर पर पहुंच गया है. इतना कम पानी होने के कारण इसमें डूब चुकी पुरानी टिहरी की इमारतें बाहर झांकने लगी हैं. कौशल दरबार और रानी के महल का कुछ हिस्सा दिखाई दे रहा है. टिहरी के राजा कीर्तिशाह ने 1890 में  रानीबाग के पास कौशल दरबार बनाया था, इसे नया दरबार भी कहा जाता है. इसके एक हिस्से में राजपाठ होता था और दूसरे में रानी का महल था. पारंपरिक शिल्प और उड़द की दाल से बनी यें इमारतें इतनी मज़बूत हैं कि झील में डूबने के बावजूद  ज्यों की त्यों खड़ी हैं. कौशल दरबार के नीचे भूमिगत तहखाना था. दूसरे हिस्से में राज परिवार के गहने और धन रखा जाता था. 1949 में टिहरी के स्वतंत्र भारत में विलय के राजपरिवार नरेन्द्रनगर शिफ्ट हो गया था. बाद में इन इमारतों में सरकारी दफ्तर खोल दिए गए.

2005 में टिहरी डैम बनने से पुरानी टिहरी झील में समा गयी थी.पुरानी टिहरी के लोग आज भी ग़मगीन हो जाते हैं, कहते हैं वो शहर कभी दोबारा नहीं बसाया जा सकता. झील के पानी में पुरानी टिहरी के साथ हमारी संस्कृति और धरोहर भी डूब गयी.
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