लाइव टीवी

भैयादूज पर बंद हुए केदारनाथ धाम के कपाट, 6 महीने तक बाबा होंगे ओंकारेश्वर मंदिर में विराजमान

News18Hindi
Updated: October 29, 2019, 12:40 PM IST
भैयादूज पर बंद हुए केदारनाथ धाम के कपाट, 6 महीने तक बाबा होंगे ओंकारेश्वर मंदिर में विराजमान
मुख्य पुजारी केदार लिंग द्वारा बाबा के स्वयंभू ज्योतिर्लिंग को समाधि रूप देकर भष्म से ढक दिया गया.

सेना की बैंड धुनों के साथ बाबा की पंचमुखी भोगमूर्ति को चल उत्सव विग्रह डोली में बैठाया गया और शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर के लिए रवाना किया गया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 29, 2019, 12:40 PM IST
  • Share this:
भैयादूज के दिन यानी आज केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए. केदारनाथ धाम के कपाट लग्न अनुसार सुबह 8 बजकर 30 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए. आपको बता दें कि सेना की बैंड धुनों के साथ बाबा की पंचमुखी भोगमूर्ति को चल उत्सव विग्रह डोली में बैठाया गया और शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर के लिए रवाना किया गया. बाबा की डोली आज पहले पड़ाव पर रामपुर में विश्राम करेगी. 31 अक्टूबर को बाबा की भोगमूर्ति ओंकारेश्वर मंदिर में 6 महीने तक की पूजा-अर्चना के लिए विराजमान हो जाएगी.

इसे भी पढ़ेंः Bhai Dooj 2019: क्‍यों मनाते हैं भैया दूज? इस दिन भाई-बहन क्या करें और क्या न करें

बाबा के स्वयंभू ज्योतिर्लिंग को समाधि रूप देकर भष्म से ढक दिया गया

बीकेटीसी ने कपाट बंद करने की सभी तैयारियां पहले ही पूरी कर ली थीं. मुख्य पुजारी केदार लिंग द्वारा बाबा के स्वयंभू ज्योतिर्लिंग को समाधि रूप देकर भष्म से ढक दिया गया. वहीं पंचमुखी भोग मूर्ति का श्रृंगार कर उसे चल विग्रह उत्सव डोली में विराजमान किया गया. परंपरानुसार सुबह 6.30 बजे भगवान केदारनाथ की पंचमुखी मूर्ति को डोली में विराजमान कर मंदिर परिसर में भक्तों के दर्शन के लिए रख दिया गया था. यहां पर अन्य धार्मिक औपचारिकताओं को पूरा किया गया और उसके बाद ऊखीमठ प्रशासन व श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अधिकारियों की मौजूदगी में केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद कर दिए और ताले को सील करते हुए चाबी उपजिलाधिकारी वरुण अग्रवाल को सौंप दी गई.

बाबा का दूसरा पड़ाव विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी होगा

इसके बाद बाबा केदार की डोली ने मंदिर की तीन परिक्रमा कर श्रद्धालुओं के जयकारों के बीच अपने शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान किया. बाबा की मूर्ति रुद्रा प्वाइंट, लिनचोली, रामबाड़ा, भीमबली, जंगलचट्टी, गौरीकुंड, सोनप्रयाग में भक्तों को आशीष देते हुए रात्रि निवास के लिए पहले पड़ाव रामपुर पहुंचेगी. वहीं 30 अक्टूबर को डोली रामपुर से प्रस्थान करते हुए रात्रि प्रवास के लिए दूसरे पड़ाव विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी पहुंचेगी. यहां बाबा केदार की डोली के आगमन पर एक दिवसीय मेला भी आयोजित किया जाता है. 31 अक्टूबर को बाबा केदार की पंचमुखी भोग मूर्ति अपने शीतकालीन पंचकेदार गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में विराजमान हो जाएगी.

इसे भी पढ़ेंः जानिए क्यों पूजा में इस्तेमाल किया जाता है गेंदे का फूल, क्या है इसकी अहमियत
Loading...

आज दोपहर यमुनोत्री मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद होंगे

इसके बाद 6 महीने तक श्रद्धालु बाबा की पूजा यहीं करेंगे. दूसरी तरफ आज सुबह आठ बजे खरसाली से मां यमुना के भाई शनि महाराज समेश्वर देवता की डोली यमुना जी को विदा कराकर लाने के लिए यमुनोत्री रवाना हुई है. दोपहर 12.25 बजे अभिजित मुहूर्त में यमुनोत्री मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर यमुना जी की उत्सव मूर्ति को डोली यात्रा के साथ खरसाली लाया जाएगा. यहां विधि विधान एवं अनुष्ठान के साथ यमुना जी की मूर्ति को यमुना मंदिर में स्थापित किया जाएगा.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देहरादून से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: October 29, 2019, 11:59 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...