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उत्तराखंड: 70 सीटों वाली विधानसभा में तीसरे मोर्चे के दलों को चाहिेए 160 सीटें!

प्रदेश के 70 विधान सभा सीटों पर कांग्रेस और भाजपा को मात देने के लिए यूकेडी, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी जैसे दल सपने संजो रहे हैं

प्रदेश के 70 विधान सभा सीटों पर कांग्रेस और भाजपा को मात देने के लिए यूकेडी, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी जैसे दल सपने संजो रहे हैं

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव का शंखनाद हो चुका है. कांग्रेस और भाजपा के साथ क्षेत्रीय दल भी चुनावी रणनीति बनाने में जुट गये हैं. क्षेत्रीय दल एक बार फिर तीसरे मोर्चे को बनाने का दावा कर रहे हैं. मगर सीटों के बटवारे पर दलों में आम सहमति नहीं बन पा रही है. प्रदेश के 70 विधान सभा सीटों पर कांग्रेस और भाजपा को मात देने के लिए यूकेडी, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी जैसे दल सपने संजो रहे हैं.

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उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव का शंखनाद हो चुका है. कांग्रेस और भाजपा के साथ क्षेत्रीय दल भी चुनावी रणनीति बनाने में जुट गये हैं. क्षेत्रीय दल एक बार फिर तीसरे मोर्चे को बनाने का दावा कर रहे हैं. मगर सीटों के बटवारे पर दलों में आम सहमति नहीं बन पा रही है. प्रदेश के 70 विधान सभा सीटों पर कांग्रेस और भाजपा को मात देने के लिए यूकेडी, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी जैसे दल सपने संजो रहे हैं.

यूकेडी, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी और वाम दलों के साथ तीसरे मोर्चे के गठन की बात कर रही है, जबकि सपा वाम दलों को अपने मंच पर लाने के लिए आतुर नजर आ रही है. यूकेडी सपा के किसी मोर्चे का हिस्सा नहीं बनाना चाहती है.

दूसरी तरह यूकेडी 40 से 50 सीटों की मांग कर रही है. यही हाल उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी का भी है, जिससे 30 सीट से कम मंजूर नहीं है. वाम दल भी 25 सीटों पर अपनी दावदारी ठोक रहे हैं. फिलहाल प्रदेश में बसपा किसी मोर्चे से दूरी बनाये हुए है.

वहीं सपा 55 सीट की मांग कर रही है. जिस तरह से सभी दल सीटों की मांग कर रहे हैं ऐसे 160 सीट भी कम है जबकि प्रदेश में महज 70 विधान सभा सीटे ही है. वही परिवर्तन पार्टी का दावा है कि वे अपनी सिद्धातों के साथ समझौता नहीं करेंगी. फिलहाल 15 फरवरी को प्रदेश में मतदान होने जा रहा है जैसे जैसे मतदान की घंडी नजदीक आ रही है वैसे वैसे सभी दलों का समीकरण और भी उलझता नजर आ रहा है.

दरअसल 2012 के विधान सभा चुनाव में यूकेडी ने 55 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे जिसमें एक सीट पर पार्टी को जीत हासिल हुई थी. जबकि सपा ने 60 सीटों पर चुनाव लड़ा था मगर पार्टी खाता भी नहीं खुल सका था. वहीं वाम दल तो महज एक दर्जन सीट में ही सिमट कर रह गये थे. जिस तरह यूकेडी, वाम दल और उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी जैसे दल कांग्रेस और भाजपा को टक्कर देने के सपने देख रहे हैं. वे आपस में तालमेल नहीं बना रहे हैं.

दूसरी तरफ यूकेडी 37 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार चुकी है, जबकि सपा 20 सीटों पर प्रत्याशी को चुनावी मैदान में उतार दिया है. जिस तरह से मोर्चे के गठन को लेकर आम सहमति नहीं बन पा रही है, ऐसे में क्षेत्रीय दल कांग्रेस और भाजपा को चुनौती देने का सपना शायद ही कभी पूरा कर पाएंगे.

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