Home /News /uttarakhand /

'मैदान के महारथियों' के लिए 'करो या मरो' वाला होगा मिशन विधानसभा

'मैदान के महारथियों' के लिए 'करो या मरो' वाला होगा मिशन विधानसभा

Demo Pic

Demo Pic

उत्तराखंड में मैदान की राजनीति के महारथी माने जाने वाले नेताओं के सामने यह चुनाव करो या मरो जैसा बन गया है. हरिद्वार जिले के कई भूतपूर्व विधायकों और नेताओं को अपना राजनीतिक भविष्य बचाने के लिए इस चुनाव में दमखम दिखाते हुए जीत दर्ज करनी होगी. कईं नेताओं के लिए यह चुनाव राजनीति का फाइनल है.

अधिक पढ़ें ...
उत्तराखंड में मैदान की राजनीति के महारथी माने जाने वाले नेताओं के सामने यह चुनाव करो या मरो जैसा बन गया है. हरिद्वार जिले के कई भूतपूर्व विधायकों और नेताओं को अपना राजनीतिक भविष्य बचाने के लिए इस चुनाव में दमखम दिखाते हुए जीत दर्ज करनी होगी. कईं नेताओं के लिए यह चुनाव राजनीति का फाइनल है.

कईं दलों की यात्रा कर चुके हरिद्वार के पूर्व विधायक अम्बरीष कुमार अब कांग्रेस का हाथ थामे हुए हैं. उन्हें रानीपुर विधानसभा से कांग्रेस का टिकट मिलने की उम्मीद है. उत्तराखंड राज्य बनने के बाद अम्बरीष कुमार एक भी चुनाव नहीं जीत पाये हैं.

उत्तराखंड का चौथा विधानसभा चुनाव उनके सामने खड़ा है और अम्बरीष को अगर राजनीतिक भविष्य बचाना है तो इस चुनाव में करिश्मा दिखाना होगा. अम्बरीष यह चुनाव हार गये तो हरिद्वार की राजनीति में उनके लिए स्पेस बनाना मुश्किल हो जायेगा. रुड़की के पूर्व विधायक सुरेश चंद जैन को पहले पार्टी का भरोसा जीतना है और उसके बाद जनता के बीच जाना है.

भाजपा नेता जैन 2012 में कांग्रेस के प्रदीप बत्रा से चुनाव हार गये थे. अब प्रदीप बत्रा भाजपा में शामिल हो चुके हैं और रुड़की से पार्टी टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं. ऐसे में सुरेश जैन के लिए पहले तो टिकट की राह मुश्किल होगी और टिकट मिल भी गया तो रुड़की के मतदाताओं का भरोसा जीतना उनके लिए चुनौती होगा.

बसपा के हाथी की सवारी कर बहादराबाद से विधानसभा पहुंच चुके पूर्व विधायक मौहम्मद शहजाद का राजनीतिक भविष्य भी इस चुनाव में दांव पर लगा है. दस दिन बाद परचे भरने की प्रक्रिया शुरु होने जा रही है, लेकिन अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि शहजाद किसी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे या फिर निर्दलीय ही ताल ठोकेंगे.

बसपा ने शहजाद को पार्टी से निष्कासित कर दिया था. शहजाद ने अभी तक कोई पार्टी ज्वाइन नहीं की है. पिछले चुनाव में पिरान कलियर से चुनाव लड़े थे और हार का मुंह देखना पड़ा था. शहजाद ने ये तो कह दिया कि वें पिरान कलियर से ही ये चुनाव लड़ेंगे लेकिन पार्टी और निर्दलीय के मामले में अभी तक सस्पेंस बना हुआ है.

बसपा कोटे से इकबालपुर के विधायक रहे चौधरी यशवीर सिंह भी एक कार्यकाल के वनवास के बाद फिर से विधानसभा पहुंचने की चाह रखते हैं. 2012 में परिसीमन के बाद इकबालपुर सीट खत्म हो गई थी. जिसके बाद यशवीर सिंह ने 2012 का चुनाव नहीं लड़ा था. अब यशवीर कांग्रेस के साथ हैं और खानपुर से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं.

यशवीर के लिए यह चुनाव आर-पार करने जैसा है. लालढांग से बसपा के टिकट पर विधानसभा पहुंचने वाले पूर्व विधायक हाजी तसलीम भी चुनाव मैदान में ताल ठोक सकते हैं. तसलीम को अभी तक किसी पार्टी का टिकट नहीं मिला है. ऐसे में माना जा रहा है कि तसलीम लक्सर सीट से निर्दलीय ताल ठोक सकते हैं.

2012 के बाद से राजनीतिक परिदृश्य से लगभग गायब रहे तसलीम को फिर से जनता का भरोसा जीतना होगा. मंगलौर के पूर्व विधायक काजी निजामुद्दीन के सामने परिवार की विरासत को बचाने की चुनौती है. पिछले चुनाव में कांग्रेस के निजामुद्दीन बसपा के हाजी सरबत करीम अंसारी से हार गये थे. इस चुनाव में फिर से दोनों में आमने-सामने की टक्कर होने के आसार हैं.

Tags: Uttarakhand news

विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर