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भारत में बड़े नोट बंद होने से नेपाल के साथ व्यापार खासा प्रभावित
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Vijay Vardhan | ETV UP/Uttarakhand
Updated: November 11, 2016, 6:34 PM IST
भारत में बड़े नोट बंद होने से नेपाल के साथ व्यापार खासा प्रभावित
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हजार और पांच सौ नोट बंद होने से भारतीय व्यापार ही नही बल्कि नेपाल का व्यापार भी प्रभावित हो रहा है. आलम ये है कि उत्तराखंड के सीमांत इलाकों का व्यापार बीते तीन दिनों से चौपट हो गया है. नेपाल से लगे इलाकों में जहां सन्नाटा पसरा है, वहीं भारतीय व्यापारियों को भी पैमेंट लाने में खासी दिक्कत आ रही है. यही नही बड़े नोट बंद होने की मार नेपाली मजदूरों पर भी पड़ी है.

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हजार और पांच सौ नोट बंद होने से भारतीय व्यापार ही नही बल्कि नेपाल का व्यापार भी प्रभावित हो रहा है. आलम ये है कि उत्तराखंड के सीमांत इलाकों का व्यापार बीते तीन दिनों से चौपट हो गया है. नेपाल से लगे इलाकों में जहां सन्नाटा पसरा है, वहीं भारतीय व्यापारियों को भी पैमेंट लाने में खासी दिक्कत आ रही है. यही नही बड़े नोट बंद होने की मार नेपाली मजदूरों पर भी पड़ी है.

उत्तराखंड में धारचूला से बनबसा तक करीब 300 किलोमीटर का इलाका नेपाल से सटा है. इन इलाकों को भले ही सरहदें बांटती हों, लेकिन यहां रोटी-बेटी के सम्बंध उसी तरह हैं, जैसे एक मुल्क के भीतर हुआ करते हैं.

आलम ये था कि नेपाल की बाजारों में नेपाली से ज्यादा भारतीय मुद्रा चलन में रहती है. इसी मुद्रा से नेपाली व्यापारी भारतीय व्यापारियों से जरूरी सामान भी खरीदते आए हैं. लेकिन अब भारत में बड़े नोट बंद से हालात पूरी तरह बदल गए हैं. जिसका खामियाजा नेपाल के साथ ही भारतीय व्यापारियों को भी उठाना पड़ रहा है. पिथौरागढ़ जिले के व्यापार संघ पवन जोशी का कहना है कि बदले हुए हालात में भारत का 85 फीसदी व्यापार प्रभावित हो चुका है।

नेपाली व्यापारी बदले हुए हालात में दोहरे संकट से जूझ रहे हैं. एक ओर जहां उन्हें भारत से सामान लेने में दिक्कत आ रही है,वहीं उनके पास जमा भारतीय करेंसी कैसे बैंकों में जमा हो, ये समझ से परे है. असल में सीमांतवासियों के दिल भले ही सरहदें नही बांटती हों, लेकिन दोनों मुल्कों के कुछ अपने कानून हैं. जिसके चलते नेपाली व्यापारियों के बैंक खाते भारत में नही हो सकते. इसी नियम की मार नेपाली मजदूरों पर भी पड़ रही है.

एक अनुमान के मुताबिक उत्तराखंड में करीब 50 हजार से अधिक नेपाली मजदूर हैं. जिन्हें मजदूरी भारतीय मुद्रा में ही दी जाती रही है. नेपीली मजदूरों के अध्यक्ष चंचल राम का कहना है कि भारत की बड़ी मुद्रा बंद होने से नेपाली मजदूर बर्बाद हो गया है. आलम ये है कि उसके पास अपने घर जाने के लिए चलायमान मुद्रा नही रही.

जारी करेंसी संकट से भले ही भारतीय व्यापारियों का व्यापार प्रभावित हो रहा हो, लेकिन करेंसी एक्सचेंज का संकट उन पर नेपाली व्यापारियों के मुकाबले कम है. ऐसे में ये तय है कि भारतीय मुद्रा को अपनी मुद्रा की तरह इस्तेमाल करने की मार पहली बार नेपाली व्यापारियों और मजदूरों पर पड़ना तय है.

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First published: November 11, 2016, 6:34 PM IST
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