Home /News /uttarakhand /

गजब! वन भूमि पर बसा गांव बना सांसद आदर्श गांव, हाईकोर्ट ने कहा- खाली करो

गजब! वन भूमि पर बसा गांव बना सांसद आदर्श गांव, हाईकोर्ट ने कहा- खाली करो

एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने तीन महीने में बग्गा 54 गांव को खाली करने के निर्देश दे दिए हैं.

एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने तीन महीने में बग्गा 54 गांव को खाली करने के निर्देश दे दिए हैं.

विधायक पुष्कर धामी के अनुसार सांसद आदर्श ग्राम बनने के बाद बग्गा 54 में विभिन्न विकास कार्यों में 10 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं.

    उत्तराखंड में सिस्टम की लापरवाही और न्यायपालिका की सख्ती से एक अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई है. नैनीताल हाईकोर्ट ने  एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अगले तीन महीने में खटीमा के बग्गा 54 गांव को खाली करवाने का आदेश दिया है. मज़ेदार बात यह है कि इस गांव को सांसद के आदर्श गांव का दर्जा दिया गया है और इसमें सरकार बड़े पैमाने पर विकास कार्य करवाती रही है.

    दरअसल वन विभाग की 617 हेक्टेयर ज़मीन पर बसा हुआ है बग्गा 54 गांव. 1970 के दशक में टोगियां पद्धति में बसे इस गावं में मौजूदा समय में 1,000 परिवार रह रहे हैं. लेकिन जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने तीन महीने में गांव खाली करने के निर्देश दे दिए हैं. अब ग्रामीण चौपाल लगा कर विचार कर रहे हैं कि जीवन भर मेहनत की पूंजी से बनाए गए अपने घर-ज़मीन को बचाने के लिए क्या किया जा सकता है.

    ऐसी चर्चाओं में स्थानीय जन प्रतिनिधि भी शरीक हो रहे हैं. जिला पंचायत सदस्य धर्म सिंह बताते हैं कि स्थानीय लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपना भी पक्ष सुने जाने का आग्रह किया था लेकिन हाईकोर्ट ने उस याचिका को ख़ारिज कर दिया. धर्म सिंह कहते हैं कि अब वे लोग सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार कर रहे हैं.

    VIDEO: ‘3 महीने में हटाएं तालाब भूमि पर बने होटल, पुलिस चौकी, कॉम्प्लेक्स’

    क्षेत्रीय विधायक पुष्कर धामी भी ऐसी ही एक चौपाल में शामिल हुए. उन्होंने भी हाईकोर्ट के फ़ैसले पर असहमति जताते हुए कहा कि सांसद आदर्श ग्राम बनने के बाद प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना के तहत बग्गा 54 में विभिन्न विकास कार्यों में 10 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं. वह कहते हैं गांव को उजाड़ने से बचाने के लिए, फ़ैसले को चुनौती देने समेत, सभी प्रयास करेंगे.

    बहरहाल अब सबकी नज़रें इस पर हैं कि चार दशक पहले जंगल के बीच में बसे बग्गा 54 के ग्रामीणों को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलती है या नहीं. हालांकि बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक सरकारें  वोट के लिए लोगों को फुसलाती रहेंगी और पर्यावरण कानूनों की धज्जियां उड़ाती रहेंगी?

    तालाब और पोखरों में अतिक्रमण पर हाईकोर्ट सख्त, 1951 स्थिति बहाल करने दिए निर्देश

    चोपता की वादियों में अतिक्रमण पर प्रशासन सख्त, 130 लोगों को थमाया नोटिस

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर