ढोल की थाप और गाजेबाजे के साथ चैती शक्तिपीठ पहुंचा मां बाल सुंदरी का डोला

मां बाल सुंदरी की स्वर्ण प्रतिमा को गाजे बाजे एवं ढोल नगाडों के साथ हजारों भक्त नगर मंदिर पक्काकोट से मां की पालकी को लेकर रविवार तड़के चैती मेला भवन पहुंचे.

News18 Uttarakhand
Updated: March 25, 2018, 1:54 PM IST
ढोल की थाप और गाजेबाजे के साथ चैती शक्तिपीठ पहुंचा मां बाल सुंदरी का डोला
मां बाला सुंदरी का डोला.
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Updated: March 25, 2018, 1:54 PM IST
हर साल की तरह इस बार भी उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के काशीपुर में चैत्र मास में लगने वाले कुमाऊॅ के प्रसिद्ध चैती मेले में रविवार तड़के मां बाल सुंदरी का डोला ढोल की थाप और गाजे बाजे के साथ धूमधाम के साथ मां के जयकारों के बीच काशीपुर से 5 किलोमीटर दूर मां बाल सुंदरी भवन चैती मंदिर में पहुंचा.

मां बाल सुंदरी की स्वर्ण प्रतिमा को गाजे बाजे एवं ढोल नगाडों के साथ हजारों भक्त नगर मंदिर पक्काकोट से मां की पालकी को लेकर चैती मेला भवन पहुंचे. मां बाल सुंदरी की स्वर्ण प्रतिमा मां के भवन में पहुंचते ही भक्तों मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़े.



मां का डोला पांच दिन यहां रहने के बाद वापस धूम धडाके के साथ वापस नगर मंदिर पक्काकोट पहुंचेगा. मंदिर के मुख्य पुजारी ने बताया कि चैत्र मास की अष्टमी पूजन मध्यरात्रि में ही होता है. इसके बाद मां का डोला 3 बजे नगर मंदिर से चलकर 4:30 बजे मंदिर भवन में पहुंचा.

इससे पहले देर रात्रि 10 बजे से 2:30 बजे तक मोहल्ला पक्काकोट में दूरदराज से आये श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन किये. इस दौरान भक्त मां की भक्ति में पूर्णतः सराबोर दिखे. इस मौके पर पूजारी ने बताया कि यह पौराणिक स्थान है जब शिव की अर्धांगनी सती हुई, तो उसके बाद भगवान शिव सती के शरीर को लेकर गए तो जहां-जहां मां के अंग गिरे वहां शक्तिपीठ बन गए.

यहां मां की बाईं भुजा गिरी थी इसीलिए चैती मंदिर भी शक्तिपीठ है. शक्तिपीठ होने के कारण यह स्थान जाग्रत है. चैती मंदिर से 29-30 की रात्रि को चतुर्दशी की मध्यरात्रि को विधिविधान के साथ पूजा अर्चना के बाद मां का डोला नगर मंदिर में वापस लौटेगा.
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