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पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय में धड़ल्ले से जलाई जा रही पराली... प्रबंधन कर सकता है किसानों के साथ कांट्रेक्ट कैंसिल  

Pooran Singh Rawat | News18 Uttarakhand
Updated: November 21, 2019, 1:07 PM IST
पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय में धड़ल्ले से जलाई जा रही पराली... प्रबंधन कर सकता है किसानों के साथ कांट्रेक्ट कैंसिल  
उन्नत कृषि और कृषि संवर्धन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के कृषि फार्म में धान की पराली जलाने का काम जारी है.

धान की पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषण (Pollution) तो बढ़ता ही है साथ ही भूमि में मृदा की उपरी सतह जलने से जीवाश्म, जिंक और कार्बन के साथ ही कई सूक्ष्म तत्व भी जल जाते हैं.

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ऊधम सिंह नगर. हरित क्रांति (Green revolution) की जन्मस्थली और देश में पहले कृषि विश्वविद्यालय (India’s Fist Agriculture University) का गौरव पाने वाले पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय (Agriculture University) के कृषि फार्म में प्रतिबंध के बावजूद बड़े पैमाने पर धान की पराली जलाई जा रही है. हर साल धान कटाई के बाद पराली जलाने (Parali Burning) की वजह से बड़े पैमाने पर धुआं होने की वजह से केंद्र सरकार ने धान की पराली जलाने पर रोक लगा चुकी है. इसके अलावा पंतनगर विश्वविद्यालय भी जब ज़मीन किराए पर देता है तो उसमें शर्त होती है कि पराली जलाई नहीं जाएगी लेकिन बटाई पर खेती करने वाले किसानों को इसकी कोई परवाह नहीं है.

जलाने वाले को पता ही नहीं... 

उन्नत कृषि और कृषि संवर्धन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के कृषि फार्म में धान की पराली जलाने का काम जारी है. न्यूज़ 18 ने जब पराली जला रहे एक व्यक्ति से इस बारे में सवाल किया तो उसने कोई ज़िम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया और कहा कि वह तो सिर्फ़ आदेश का पालन कर रहा है.

पराली जलाने वाला सतपाल सिंह ने न्यूज़ 18 संवाददाता को कहा कि वह नौकरी करते हैं और जिसने ज़मीन खेती के लिए किराए पर ली है उन्होंने पराली जलाने को कहा है. सतपाल सिंह को यह भी नहीं पता था कि पराली जलाना प्रतिबंधित है.

मिट्टी के लिए भी नुक़सानदेह 

ख़ास बात यह है कि धान की पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषण तो बढ़ता ही है साथ ही भूमि में मृदा की उपरी सतह जलने से जीवाश्म, जिंक और कार्बन के साथ ही कई सूक्ष्म तत्व भी जल जाते हैं. पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के फार्म निदेशक डॉक्टर डीके सिंह कहते हैं कि खेती के लिए ज़मीन किराए पर देते समय साफ़ कर दिया जाता है कि पराली नहीं जलाई जानी.

डॉक्टर सिंह कहते हैं कि इस मामले के सामने आने के बाद पराली जलाने वाले बटिदारों को नोटिस जारी किया जाएगा. अगर उनकी ग़लती साबित हो जाती है तो उनका कांट्रेक्ट कैंसिल भी किया जा सकता है.
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First published: November 21, 2019, 1:04 PM IST
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