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शिल्पी के एक फैसले से उत्तराखंड में सियासी हलचल, डैमेज कंट्रोल में खुद जुटे राहुल गांधी

शिल्पी के एक फैसले से उत्तराखंड में सियासी हलचल, डैमेज कंट्रोल में खुद जुटे राहुल गांधी

टिकट न मिलने से नाराज कांग्रेस नेत्री शिल्पी आरोड़ा का मामला कांग्रेस हाईकमान तक पहुंच गया है.

टिकट न मिलने से नाराज कांग्रेस नेत्री शिल्पी आरोड़ा का मामला कांग्रेस हाईकमान तक पहुंच गया है.

टिकट न मिलने से नाराज कांग्रेस नेत्री शिल्पी आरोड़ा का मामला कांग्रेस हाईकमान तक पहुंच गया है. बताया जा रहा है कि राहुल गांधी कार्यालय क्राइसिस मैनेजमेंट की भूमिका में सक्रिय हो गया है. शिल्पी अरोड़ा ने हरीश रावत पर उनका टिकट काटने का अरोप लगाया है. अरोड़ा ने किच्छा से सीएम रावत के खिलाफ बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव लड़ने का ऐलान किया है.

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उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में टिकट ना मिलने से नाराज कांग्रेस की शिल्पी अरोड़ा का मामला पार्टी हाईकमान तक पहुंच गया है. बताया जा रहा है कि राहुल गांधी कार्यालय क्राइसिस मैनेजमेंट की भूमिका में सक्रिय हो गया है.

शिल्पी अरोड़ा ने हरीश रावत पर उनका टिकट काटने का अरोप लगाया है. यहां तक कि शिल्पी ने किच्छा से मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ बतौर निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव लड़ने का ऐलान किया है.

कांग्रेस महासचिव शिल्पी अरोड़ा किच्छा से कांग्रेस का टिकट मांग रही थी. किच्छा से सीएम खुद उम्मीदवार हैं. शिल्पी अरोड़ा ने हरीश रावत पर उनका टिकट काटने का आरोप लगाते हुए किच्छा से ही बतौर निर्दलीय लड़ने की घोषणा की. इसके बाद कांग्रेस आलाकमान हरकत में आ गया है.

बताया गया है कि राहुल गांधी के कार्यालय ने शिल्पी को किया फोन किया है. अहमद पटेल भी मोर्चा संभाल संकट का समाधान करने के लिए सक्रिय हो गए हैं. शिल्पी को बड़ी जिमेदारी देने की कही जा रही है.

साथ ही बताया जा रहा है कि बागेश्वर और गदरपुर पर कांग्रेस बदलाव कर सकती है. शुक्रवार को नामांकन का आखिरी दिन है, इसलिए दोपहर तीन बजे तक कांग्रेस को फैसला करना होगा, ताकि प्रत्याशी नामांकन कर सकें.

सूत्रों का कहना है कि अगर कोई समाधान ना निकला तो हरीश रावत के खिलाफ किच्छा से लड़ने के लिए शिल्पी पूरी तरह तैयार है.

15 फरवरी को वोटिंग
उत्तराखंड की 70 विधानसभा सीटों पर 15 फरवरी को एक ही चरण में मतदान होना है. वोटों की गिनती 11 मार्च को होगी. इस बार मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच है.

हालांकि, उत्तराखंड क्रांति दल, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी सहित दूसरे सियासी दल भी अपना प्रभाव छोड़ने को बेताब हैं. ऐसे में इस बार विधानसभा चुनाव बेहद दिलचस्प होने जा रहा है.

अभी हरीश रावत की अगुवाई में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है. पिछली बार 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 32 सीटें जीती थी. भाजपा को 31, बहुजन समाज पार्टी को 3, उत्तराखंड क्रांति दल को 1 और निर्दलियों को 3 सीटें मिली थी. इस चुनाव में कांग्रेस को 33.79 और 33.13 फीसदी वोट मिले थे.

नतीजे आने के बाद कांग्रेस ने बसपा, उत्तराखंड क्रांति दल और निर्दलियों के सहयोग से विजय बहुगुणा की अगुवाई में प्रदेश में सरकार बनाई थी. बहुगुणा के इस्तीफे के बाद हरीश रावत प्रदेश में मुख्यमंत्री बने.

ये होंगे मुद्दे
केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के बाद जिस तरह से भाजपा को दिल्ली और बिहार में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है, वैसे में उत्तराखंड का चुनाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है. मुख्यमंत्री चेहरे को सामने न लाकर एक बार फिर भाजपा ने पीएम मोदी के चेहरे पर देवभूमि में दांव खेला है. इसका कितना फायदा उसे इस चुनाव में मिलेगा, वह 11 मार्च को सामने आ ही जाएगा.

इस बार उत्तराखंड चुनाव में प्रदेश की कानून-व्यवस्था, सर्जिकल स्ट्राइक, नोटबंदी और विकास का मुद्दा प्रमुख रहने वाला है. माना जा रहा है कि नोटबंदी के बाद उत्तराखंड में पर्यटन पर काफी नकारात्मक असर पड़ा है. ऐसे में यह चुनाव नतीजे को प्रभावित कर सकता है. इसके अलावा, गरीबी, बेरोजगारी और पहाड़ों से पलायन भी मुख्य मुद्दे हैं.

Tags: Uttarakhand news

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