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पढ़िए, कैसे भूमिधरी कानून के बहाने सियासी जमीन पर फसल बोने की तैयारी में बहुगुणा
Udham-Singh-Nagar News in Hindi

Mukesh Kumar | ETV UP/Uttarakhand
Updated: September 28, 2015, 1:46 PM IST
पढ़िए, कैसे भूमिधरी कानून के बहाने सियासी जमीन पर फसल बोने की तैयारी में बहुगुणा
क्या पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा भूमिधरी कानून के बहाने अपनी राजनीतिक बिसात बिछा रहे हैं. क्या बीजापुर में लोगों के साथ जाकर सीएम से मिलना-मिलाना और फिर एक साथ दोनों नेताओं का मीडिया से रूबरू होना किसी सोची समझी रणनीति का हिस्सा है. तस्वीरें ऐसा ही कुछ बयां करती हैं.

क्या पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा भूमिधरी कानून के बहाने अपनी राजनीतिक बिसात बिछा रहे हैं. क्या बीजापुर में लोगों के साथ जाकर सीएम से मिलना-मिलाना और फिर एक साथ दोनों नेताओं का मीडिया से रूबरू होना किसी सोची समझी रणनीति का हिस्सा है. तस्वीरें ऐसा ही कुछ बयां करती हैं.

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क्या पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा भूमिधरी कानून के बहाने अपनी राजनीतिक बिसात बिछा रहे हैं. क्या बीजापुर में लोगों के साथ जाकर सीएम से मिलना-मिलाना और फिर एक साथ दोनों नेताओं का मीडिया से रूबरू होना किसी सोची समझी रणनीति का हिस्सा है. तस्वीरें ऐसा ही कुछ बयां करती हैं.

जब लोग बकरीद के मौके पर गले मिल रहे थे, तो उत्तराखंड में सियासत के दो धुरंधर एक दूसरे के सामने थे. बीजापुर गेस्ट हाउस में पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा सितारगंज के दर्जनों लोगों के साथ पहुंचे तो मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी उनके स्वागत में पलक पांवड़े बिछा दिए.

मुलाकात खत्म हुई तो दोनों नेता एक साथ मीडिया के सामने पहुंचे. संदेश देने की कोशिश की गई कि सितारगंज की समस्या का समाधान हो गया है. दरअसल इस मुलाकात के सौ फीसदी सियासी मायने भी हैं. सितारगंज में पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश से आकर बड़ी संख्या में लोग रह रहे हैं.



तकरीबन छह दशक से वो यहां रह रहे हैं, लेकिन असली हक नहीं मिल सका है. उत्तराखंड सरकार ने भूमिधरी कानून में संशोधन कर दिया है. गजट नोटिफिकेशन भी हो गया है, लेकिन अमल नहीं हो पाया है. अब विजय बहुगुणा सितारगंज से विधायक भी हैं और चुनावी बिसात भी बिछानी है, लिहाजा मुलाकात के बहाने सियासत भी हो गई और वोटों की फसल भी बो दी गई.



सियासत में चेहरे की भाव भंगिमा बहुत कुछ कहती है. विजय बहुगुणा और हरीश रावत एक दूसरे के धुर विरोधी माने जाते हैं और ये मुलाकात के दौरान साफ दिखाई दिया. मुख्यमंत्री के कमरे से निकलते ही विजय बहुगुणा के चेहरे पर तनाव था और हरीश रावत के चेहरे पर मुस्कान, लेकिन मीडिया के सामने ऐसा दिखा मानों दोनों के बीच कभी राजनीतिक दुश्मनी थी ही नहीं.

अब न जाने कौन सा दबाव था कि मुख्यमंत्री हरीश रावत को सी ऑफ तक करने के लिए खींच लाया. बहुगुणा जिस गाड़ी में सवार थे, उस तक छोड़ने के लिए पहुंचे गए सीएम हरीश रावत और गाड़ी चला रहे बेटे को नाम लेकर हाथ उठाया और सी-ऑफ किया.

मायने साफ है कि ये रंग सियासी है. बहरहाल सितारगंज के लोगों को भले ही जमीन के मामले पर अभी हक न मिला हो, लेकिन उम्मीद बंधा दी गई है और वोटों की फसल में खाद और पानी पूरी तरह से भर दिया गया है.

 
First published: September 28, 2015, 1:46 PM IST
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