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उत्तराखंड जागो: 6 फीट का नाला बनकर रह गई 40 फीट चौड़ी नदी! क्या कल्याणी का हो पाएगा कल्याण?

उत्तराखंड जागो: 6 फीट का नाला बनकर रह गई 40 फीट चौड़ी नदी! क्या कल्याणी का हो पाएगा कल्याण?

रुद्रपुर में कल्याणी नदी की हालत दयनीय हो गई है.

रुद्रपुर में कल्याणी नदी की हालत दयनीय हो गई है.

Uttarakhand News : उत्तराखंड में स्वच्छ भारत अभियान (Swachchh Bharat Abhiyan) के साथ नदियों के संरक्षण (River Conservation) के लिए चल रहे प्रोजेक्टों पर सवालिया निशान खड़े करती है, रुद्रपुर में एक नदी. कभी रुद्रपुर की लाइफलाइन रही कल्याणी नदी गंदे नाले में बदल चुकी है और अपने कल्याण का इंतजार कर रही है. जीवनदायिनी नदियां बढ़ते प्रदूषण (Pollution) और अतिक्रमण की वजह से कैसे अस्तित्व के लिए जूझ रही हैं? ये भी जानें कि सरकारी (Government Project) और स्थानीय स्तर के प्रयासों से कल्याणी नदी का कल्याण कब तक हो पाएगा!

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चंदन बंगारी
रुद्रपुर. उत्तराखंड में नदियां कहीं खनन माफिया की भेंट चढ़ रही हैं, तो कहीं अतिक्रमण और कहीं प्रदूषण की भी. कल्याणी नदी का पानी बेहद साफ और पीने योग्य है, लेकिन सिर्फ टांडा जंगल में जहां से वह कलकल बहती है. जैसे ही नदी आबादी में प्रवेश करती है, इसकी दुर्गति शुरू हो जाती है. रुद्रपुर शहर में पहुंचते ही 40 फीट की नदी सिर्फ़ छह फीट का गंदा नाला बनकर रह जाती है. नदी पर 700 से अधिक अतिक्रमण हैं. रोज़ाना हज़ारों घरों का गंदा पानी नदी में गिरता है. नदी की दुर्दशा पर पर्यावरण संरक्षण में जुटे लोग खासे निराश हैं. सरकार के साथ ही स्थानीय लोगों से नदी को बचाने की अपील कर रहे हैं.

नगर निगम ने 2 साल पहले सामाजिक संगठनों और स्कूली बच्चों के साथ ‘कल्याणी पुनर्जीवन’ अभियान शुरू किया था. अभियान से जुड़े लोगों ने नदी पर केंद्रित डॉक्यूमेंट्री ‘मैं कल्याणी हूं’ भी बनाई थी. इस डॉक्यूमेंट्री और माध्यमों से लोगों को नदी को संरक्षित करने के बारे में जागरूकता फैलाई जा रही थी. फिर कुछ ही समय अभियान चला और कोरोना काल आ गया. अभियान पर ब्रेक लग गया. रुद्रपुर राइजिंग फाउंडेशन के अध्यक्ष विजय आहूजा स्थानीय लोगों से इस नदी को साफ करने की अपील लगातार कर रहे हैं. वहीं, प्रशासन भी इसे पुराने स्वरूप में लाने के लिए कोशिशें कर रहा है.

नमामि गंगे प्रोजेक्ट में होगा कायाकल्प!
कल्याणी नदी की सफाई और संरक्षण को लेकर सरकारी स्तर पर प्रयास हो रहे हैं. नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत पेयजल निगम डीपीआर तैयार कर रहा है. पेयजल निगम की इंजीनियर मृदुला सिंह का कहना है चूंकि नदी पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण है इस​के लिहाज़ से भी डीपीआर में कुछ तकनीकी विकल्प भी रखे जा रहे हैं.

लोगों की लापरवाही हो या प्रशासन की कछुआ चाल, हालात ये हैं कि दो दशक पहले तक रुद्रपुर के लोगों को पीने का साफ पानी देने वाली कल्याणी नदी आज अपने अस्तित्व के लिए जूझ रही है. नाले में तब्दील कल्याणी ने कुछ महीने पहले बारिश के कारण आई आपदा में खूब कहर बरपाया था. तब लोगों के साथ ही अफसरों को भी नदी की सफाई और संरक्षण की याद आई थी. अब फिर नगर निगम जल्द सफाई अभियान शुरू करने की बात कह रहा है.

Tags: Mission Paani, Uttarakhand news, Water Pollution

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