टीडीसी प्रबंधन की 87 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को जबरन रिटायरमेंट की तैयारी... कर्मचारी संगठनों का विरोध

कर्मचारी संगठनों ने अब टीडीसी प्रबंधन द्वारा 87 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को एकतरफा कार्रवाई के तहत जबरन रिटायरमेंट देने की प्रक्रिया का विरोध करने का ऐलान कर दिया है.
कर्मचारी संगठनों ने अब टीडीसी प्रबंधन द्वारा 87 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को एकतरफा कार्रवाई के तहत जबरन रिटायरमेंट देने की प्रक्रिया का विरोध करने का ऐलान कर दिया है.

कर्मचारियों का कहना है कि टीडीसी के घाटे में जाने की वजह चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नहीं प्रबंधन है जिसकी गलत नीतियों की वजह से यह नौबत आई है.

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पंतनगर. 30 करोड़ रुपये के घाटे में चल रहे पंतनगर बीज व तराई विकास निगम (टीडीसी) के 87 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को टीडीसी प्रबंधन ने जबरन सेवानिवृत्ति देने की फाइल तैयार कर ली है. बड़े पैमाने पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को जबरन रिटायरमेंट दिए जाने की योजना की जानकारी मिलने के बाद तराई बीज निगम के कर्मचारी संगठन इसके ख़िलाफ़ खड़े हो गए हैं. कर्मचारी संगठन पूछ रहे हैं कि जबरन सेवानिवृत्ति की कार्रवाई केवल कर्मचारियों के ख़िलाफ़ ही क्यों की जा रही है? अधिकारियों को जबरन रिटायरमेंट की कार्रवाई से दूर क्यों रखा जा रहा है?

गलत नीतियों की वजह से घाटा 

कर्मचारी संगठनों ने अब टीडीसी प्रबंधन द्वारा 87 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को एकतरफा कार्रवाई के तहत जबरन रिटायरमेंट देने की प्रक्रिया का विरोध करने का ऐलान कर दिया है. कर्मचारियों का कहना है कि टीडीसी के घाटे में जाने की वजह चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नहीं प्रबंधन है जिसकी गलत नीतियों की वजह से यह नौबत आई है.



सब पर हो कार्रवाई
इंटक की टीडीसी इकाई के रामकिशोर यादव कहते हैं कि अगर छंटनी की नौबत आ ही गई है तो सरकार, शासन और टीडीसी प्रबंधन को सभी कर्मचारियों-अधिकारियों पर एक समान कार्रवाई करनी चाहिए. सबसे कमज़ोर वर्ग और सबसे कम तनख्वाह पाने वाले चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को हटाने से क्या होगा?

यादव कहते हैं कि अगर एकतरफ़ा कार्रवाई कर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को हटाया जाएगा तो वह इसका सड़क पर उतरकर विरोध करेंगे. किसी भी स्थिति में प्रबंधन का यह फ़ैसला स्वीकार नहीं किया जाएगा.

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