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गर्मियां आते ही अग्निशमन विभाग ने जारी किया अलर्ट, पुलिसकर्मियों की छुट्टियां भी रद्द

गर्मियां आते ही अग्निशमन विभाग ने जारी किया अलर्ट, पुलिसकर्मियों की छुट्टियां भी रद्द

गर्मी का मौसम के आते ही अग्निशमन विभाग ने एक बार फिर अलर्ट जारी कर दिया है। अधिकारियों ने बड़ी चतुराई के साथ पुलिस जवानों की छुट्टियों को रद्द करने के आदेश दे दिए हैं। जिससे किसी आपातकालीन स्थिति से निपटने में यदि कोई लापरवाही पाई जाए तो अधिकारियों के ऊपर कोई आंच न आए। लेकिन हैरत की बात यह है कि प्रदेश में पिछले 15 सालों में अग्निशमन विभाग ने अभी एक भी हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म का कोई वाहन नहीं खरीदा है।

गर्मी का मौसम के आते ही अग्निशमन विभाग ने एक बार फिर अलर्ट जारी कर दिया है। अधिकारियों ने बड़ी चतुराई के साथ पुलिस जवानों की छुट्टियों को रद्द करने के आदेश दे दिए हैं। जिससे किसी आपातकालीन स्थिति से निपटने में यदि कोई लापरवाही पाई जाए तो अधिकारियों के ऊपर कोई आंच न आए। लेकिन हैरत की बात यह है कि प्रदेश में पिछले 15 सालों में अग्निशमन विभाग ने अभी एक भी हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म का कोई वाहन नहीं खरीदा है।

गर्मी का मौसम के आते ही अग्निशमन विभाग ने एक बार फिर अलर्ट जारी कर दिया है। अधिकारियों ने बड़ी चतुराई के साथ पुलिस जवानों की छुट्टियों को रद्द करने के आदेश दे दिए हैं। जिससे किसी आपातकालीन स्थिति से निपटने में यदि कोई लापरवाही पाई जाए तो अधिकारियों के ऊपर कोई आंच न आए। लेकिन हैरत की बात यह है कि प्रदेश में पिछले 15 सालों में अग्निशमन विभाग ने अभी एक भी हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म का कोई वाहन नहीं खरीदा है।

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गर्मी का मौसम के आते ही अग्निशमन विभाग ने एक बार फिर अलर्ट जारी कर दिया है। अधिकारियों ने बड़ी चतुराई के साथ पुलिस जवानों की छुट्टियों को रद्द करने के आदेश दे दिए हैं। जिससे किसी आपातकालीन स्थिति से निपटने में यदि कोई लापरवाही पाई जाए तो अधिकारियों के ऊपर कोई आंच न आए। लेकिन हैरत की बात यह है कि प्रदेश में पिछले 15 सालों में अग्निशमन विभाग ने अभी एक भी हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म का कोई वाहन नहीं खरीदा है।

बताया जा रहा है कि कई सालों से वाहनों को खरीदने की प्रक्रिया शासन में लंबित चल रही है, जबकि लगातार पूरे प्रदेश में ऊंची-ऊंची बिल्डिंगें बनती जा रही हैं। हर साल राजधानी देहरादून में दर्जनों नई कॉलोनियां को बसाया जा रहा है, मगर अग्निशमन विभाग के पास संसाधन बड़े ही सीमित है, जिनके साथ विभाग आग की घटनाओं पर काबू पाने की बात कर रहा है। हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर और राजधानी के सेलाकुई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर औद्योगिक इकाइयां लगी हैं।

साथ ही राजधानी में मल्टीकॉम्प्लेस बिल्डिंग का कॉन्‍सेप्ट बहुत तेजी के साथ बढ़ता जा रहा है। लेकिन कुछ मुठ्ठी भर वाहनों के भरोसे अग्निशमन विभाग आग की घटनाओं पर काबू पाने की ताल ठोंक रहा है। दरअसल, जिस गति के साथ नए-नए शहर बनते जा रहे हैं। लगातार प्रदेश की आबादी बढ़ती जा रही है ऐसे में अग्निशमन विभाग का अभी तक एक्ट न होने से विभाग सफेद हाथी साबित हो रहा है। विभाग के अधिकारी महज फाइलों तक सीमित हैं।

साथ ही आग की घटनाओं से निपटने के लिए अगर कोई मानकों की अनदेखी करता है तो विभाग उसके खिलाफ नोटिस देने तक ही सीमित है। इसके अलावा विभाग कोई कानूनी कार्रवाई नहीं कर सकता है, क्योंकि 15 सालों में अभी फायर एक्ट नहीं बन सका है तो ऐसे में बड़ा सवाल है कि अग्निशमन विभाग आग की आंच से कैसे निपटेगा।

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