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मिशन 2017: तो क्या उत्तराखंड में बन पाएगा तीसरा मोर्चा!

मिशन 2017: तो क्या उत्तराखंड में बन पाएगा तीसरा मोर्चा!

सपा प्रदेश अध्यक्ष एसएन सचान

सपा प्रदेश अध्यक्ष एसएन सचान

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की सभी राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं. वहीं एक बार फिर क्षेत्रीय दल चुनाव के ऐन वक्त पर तीसरे मोर्चे के गठन की वकालत कर रहे हैं. मगर सीटों का बंटवारा तीसरे मोर्चे की बात कर रहे सभी दलों के लिए टेडी खीर साबित हो रहा है. यूं तो 2007 और 2012 में क्षेत्रीय दलों के समर्थन से ही सरकारें बनी हैं.

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उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की सभी राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं. वहीं एक बार फिर क्षेत्रीय दल चुनाव के ऐन वक्त पर तीसरे मोर्चे के गठन की वकालत कर रहे हैं. मगर सीटों का बंटवारा तीसरे मोर्चे की बात कर रहे सभी दलों के लिए टेडी खीर साबित हो रहा है.

यूं तो 2007 और 2012 में क्षेत्रीय दलों के समर्थन से ही सरकारें बनी हैं. ऐसे में किंग मेकर की भूमिका के लिए क्षेत्रीय दल एक फिर जद्दोजहद कर रहे हैं. यूकेडी ने क्षेत्रीय दलों को एक मंच पर आने के लिए न्योता दिया है. मोर्चा बनाने की सभी क्षेत्रीय दल बात कर रहे है. मगर सपा के साथ यूकेडी नहीं आना चाहती है. यूकेडी के साथ उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी हिचकिचा रही है. क्योकिं यूकेडी के छह गुट हो चुके हैं.

सभी गुट एक मंच पर आने से कतरा रहे हैं. राज्य आन्दोलनकारी संगठनों का भी यहीं हाल है. यूकेडी का मौजूदा विधान सभा में एक विधायक है. वाम दल और परिवर्तन पार्टी का विधान सभा चुनाव में अभी तक खाता भी नहीं खुला है.

70 विधान सभा वाले राज्य उत्तराखंड में सभी क्षेत्रीय दल 50 सीट से कम नहीं चाहते हैं ऐसे में मोर्चे का गठन बहुत मुश्किल हो जा रहा है. क्योकिं दलों की मांग को हिसाब से प्रदेश में करीब विधान सभा की 300 सौ सीट होनी चाहिए .2012 के विधान सभा चुनाव में यूकेडी को 1.90 फीसदी मत मिले थे सपा भी 1.80 फीसदी मत पर लुढ़क गई थी.

उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी और वाम दलों की स्थिति तो और खराब रही है. पिछले विधान सभा चुनाव में यूकेडी ने 65 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे जबकि सपा 40 सीटों पर बाकी दल 15 से 20 सीटों पर ही अपने प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतार पाये थे.

परिवर्तन पार्टी का कहना है कि जो कांग्रेस और भाजपा का समर्थन करेगा वह तीसरे मोर्चे में शामिल नहीं होगी. जबकि यूकेडी 2007 में भाजपा और 2012 में कांग्रेस पार्टी को समर्थन किया है. ऐसे में भला मोर्चा का गठन कैसे हो पायेगा. यूपीपी ( उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ) के पीसी तिवारी का कहना है कि नीतियों के आधार पर मोर्चे का गठन होना चाहिए.

सपा प्रदेश अध्यक्ष एसएन सचान का कहना है कि अगर मोर्चे का गठन नहीं होता है तो पार्टी अकेले चुनाव मैदान में उतरेंगी. प्रदेश में क्षेत्रीय दल मोर्चे के गठन की बात जरूर कर रहे हैं, लेकिन एक मंच को साझा करने से भी कतरा रहे हैं.

Tags: Udham Singh Nagar news, Uttarakhand news

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