बद से बदतर होती जा रही है देवभूमि की उच्च शिक्षा व्यवस्था

उत्तराखंड में उच्च शिक्षा की हालत लगातार बद से बदतर होती जा रही है. विगत कई वर्षों से राज्य सरकार नए कॉलेजों का एलान तो कर देती है लेकिन उसके बाद कॉलेज बिना भवन और शिक्षक के घोषणा मात्र साबित हो रही है.

Sandeep Gusai | ETV UP/Uttarakhand
Updated: October 24, 2016, 10:44 PM IST
बद से बदतर होती जा रही है देवभूमि की उच्च शिक्षा व्यवस्था
CM Harish Rawat
Sandeep Gusai
Sandeep Gusai | ETV UP/Uttarakhand
Updated: October 24, 2016, 10:44 PM IST
उत्तराखंड में उच्च शिक्षा की हालत लगातार बद से बदतर होती जा रही है. विगत कई वर्षों से राज्य सरकार नए कॉलेजों का एलान तो कर देती है लेकिन उसके बाद कॉलेज बिना भवन और शिक्षक के घोषणा मात्र साबित हो रही है. इतना ही नहीं गुणवत्ता सुधारने के प्रयास तो दूर नियमित शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पर भी विराम लगा हुआ है.

प्रदेश में उच्च शिक्षा की स्थिति किसी से छिपी नहीं है. हालात इतने खराब हैं कि कई कॉलेजों में छात्र संख्या प्राथमिक विद्यालयों जैसी है. इसके बावजूद लगातार नए कॉलेज राज्य सरकार खोल रही है.

प्रदेश में कुल 94 डिग्री कॉलेज संचालित हो रहे हैं और मात्र 44 कॉलेज ऐसे हैं जिनके पास अपने भवन हैं. आंकड़े चौकाने वाले ही नहीं अचंभित भी करते हैं कि आखिर उच्च शिक्षा किस दिशा में जा रही है.

प्रदेश में ऐसे कॉलेज जिनके पास भूमि है लेकिन भवन नहीं- 10

प्रदेश में ऐसे कॉलेज जिनके पास भूमि है और भवन निर्माणाधीन है- 25
प्रदेश में ऐसे कॉलेज जिनके पास भूमि ही नही है- 15

ये तो भवनों की स्थिति है अब जरा शिक्षकों की स्थिति भी देख लीजिए

प्राचार्य- स्वीकृत पद- 94, कार्यरत- 61, रिक्त- 33
शिक्षक- स्वीकृत पद- 1819, कार्यरत- 699, रिक्त-1020

शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के स्थान पर संविदा और गेस्ट फैकल्टी से प्रदेश के डिग्री कॉलेज में शिक्षण कार्य संचालित किया जा रहा है. शिक्षकों की तरह नॉन टीचिंग स्टाफ के लगभग 1252 पद रिक्त चल रहे हैं.

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि संसाधनों की कमी के कारण कई डिग्री कालेज के भवन अभी तैयार नहीं हुए हैं. सीएम रावत ने कहा कि इसके बावजूद उनके कार्यकाल में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने के लिए प्रयास किए गए.

हरीश रावत सरकार ने प्रदेश में डिग्री कॉलेज खोल तो दिए लेकिन बिना शिक्षक और भवन के ये कॉलेज शो पीस बने हुए हैं. प्रदेश के दर्जनों कॉलेज ऐसे हैं जहां छात्र छात्राओं की संख्या 50 भी नहीं है.

पहाड के युवाओं ने राज्य गठन के बाद सुनहरे भविष्य का सपना देखा था लेकिन उच्च शिक्षा की बिगड़ती स्थिति ना सिर्फ युवाओं को अंधकार की ओर धकेल रही है बल्कि रोजगार मुहैया कराने में नाकाम साबित हो रही है.
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