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केंद्रीय योजनाओं में कटौती का दिखने लगा असर

केंद्रीय योजनाओं में कटौती का दिखने लगा असर

केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय योजनाओं में कटौती का असर प्रदेश में दिखने लगा है। शुरुआती दौर में केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय सहायता प्राप्त राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान पर इसका प्रभाव पड़ा है। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत तैनात प्रयोगशाला सहायक और कार्यालय सहायक को 31मार्च तक हटाए जाने की तैयारी है।

केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय योजनाओं में कटौती का असर प्रदेश में दिखने लगा है। शुरुआती दौर में केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय सहायता प्राप्त राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान पर इसका प्रभाव पड़ा है। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत तैनात प्रयोगशाला सहायक और कार्यालय सहायक को 31मार्च तक हटाए जाने की तैयारी है।

केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय योजनाओं में कटौती का असर प्रदेश में दिखने लगा है। शुरुआती दौर में केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय सहायता प्राप्त राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान पर इसका प्रभाव पड़ा है। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत तैनात प्रयोगशाला सहायक और कार्यालय सहायक को 31मार्च तक हटाए जाने की तैयारी है।

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केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय योजनाओं में कटौती का असर प्रदेश में दिखने लगा है। शुरुआती दौर में केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय सहायता प्राप्त राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान पर इसका प्रभाव पड़ा है। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत तैनात प्रयोगशाला सहायक और कार्यालय सहायक को 31मार्च तक हटाए जाने की तैयारी है।

दरअसल, राज्य में चार साल पहले राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत कार्यालय सहायक व प्रयोगशाला सहायक की नियुक्ती की गई है। इन सभी की नियुक्ती ऑउट सोर्सिंग के जरिए उपनल के माध्यम से की गई। इन सभी कर्मचारियों का वेतन रमसा के तहत निकलता था। जिसमें कुछ प्रतिशत उपनल को दिया जाता था। मौजूदा वक्त में प्रदेश के इंटर कॉलेजों में ऐसे 1200 कर्मचारी कार्यरत हैं, जो कि रमसा के तहत ऑउट सोर्सिंग पर तैनात हैं।

लेकिन अब जब केन्द्र ने ऑॅउटसोर्स कर्मचारियों से अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं तो इन कर्मचारियों के भविष्य पर संकट छा गया है। शिक्षा विभाग द्वारा 31मार्च तक हटाए जाने का मामला संज्ञान में आने के बाद से कर्मचारी आक्रोशित हैं। बुधवार को भारी संख्या में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से कर्मचारी दून पहुंचे और शिक्षा निदेशालय में जोरदार प्रदर्शन किया।

कर्मचारियों का कहना है कि जब केंद्र सरकार ने जिम्मेदारी से हाथ पीछे खींच लिए् हैं तो फिर राज्य सरकार को इस दिशा में आगे आना चाहिए् क्यों कि ये सवाल अब राज्य के 1200 युवाओं के भविष्य से जुड़ा हुआ है। कर्मचारियों की माने तो प्रदेश सरकार को इस दिशा में आगे आना चाहिए और इसका व्यभार खुद उठाना चाहिए। चार सालों से रमसा के तहत तैनात सुनील चौधरी और रमेश का कहना है कि ऑॅउसोर्सिंग के जरिए उनका भविष्य अब खतरे में पड़ता दिख रहा है लिहाजा प्रदेश सरकार को आगे आकर उनकी मदद करनी चाहिए।

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