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वेस्ट यूपी के बदमाशों के लिए उत्‍तराखंड बना महफूज पनाहगाह

पश्मिची उत्तर प्रदेश के बदमाशों के लिए उत्तराखंड महफूज पनाहगाह बनता जा रहा है. संगीन वारदातों को अंजाम देने के बाद बदमाश उत्‍तराखंड की शांत वादियों में छिपने चले आते हैं. लेकिन उत्‍तराखंड पुलिस को इसकी भनक तब लगती है जब बदमाश पकड़े जाते हैं या फिर मुठभेड़ में मारे जाते हैं.

पश्मिची उत्तर प्रदेश के बदमाशों के लिए उत्तराखंड महफूज पनाहगाह बनता जा रहा है. संगीन वारदातों को अंजाम देने के बाद बदमाश उत्‍तराखंड की शांत वादियों में छिपने चले आते हैं. लेकिन उत्‍तराखंड पुलिस को इसकी भनक तब लगती है जब बदमाश पकड़े जाते हैं या फिर मुठभेड़ में मारे जाते हैं.

पश्मिची उत्तर प्रदेश के बदमाशों के लिए उत्तराखंड महफूज पनाहगाह बनता जा रहा है. संगीन वारदातों को अंजाम देने के बाद बदमा ...अधिक पढ़ें

    पश्मिची उत्तर प्रदेश के बदमाशों के लिए उत्तराखंड महफूज पनाहगाह बनता जा रहा है. संगीन वारदातों को अंजाम देने के बाद बदमाश उत्‍तराखंड की शांत वादियों में छिपने चले आते हैं. लेकिन उत्‍तराखंड पुलिस को इसकी भनक तब लगती है जब बदमाश पकड़े जाते हैं या फिर मुठभेड़ में मारे जाते हैं.

    बड़ी वारदातों को अंजाम देने के बाद उत्‍तराखंड में पनाह लेने वाले पश्मिची यूपी के बदमाशों की फेहरिस्त लंबी है. दरअसल, उत्‍तराखंड पुलिस का कमजोर नेटवर्ट की एक मुख्य वजह बतायी जाती है.

    दूसरी प्रमुख वजह पुलिस का उदारवादी चेहरा भी है. वैसे अमित भूरा, सचिन खोखर राहुल खट्टा मुकीम कालिया जैसे कुख्यात बदमाशों का काफी अर्से से उत्‍तराखंड आने जाने का सिलसिला रहा है, लेकिन ऐसे बदमाशों को उत्‍तराखंड पुलिस कभी-कभार ही पकड़ सकी है.

    15 दिसम्बर 2014 को बागपत पेशी पर जा रहा 52 संगीन मामलों को अंजाम देने वाला कुख्यात बदमाश अमित भूरा फरार हो गया है. उत्‍तराखंड पुलिस जवानों के एके 47 और एसएलआर जैसे आधुनिक हथियार भी लूट ले गया, लेकिन उत्‍तराखंड पुलिस के जवानों ने कोई एक्शन नहीं लिया.

    दरअसल, जुलाई 2009 को राजधानी देहरादून के रायपुर के जंगलों में दिनदहाड़े हुए रणवीर एनकाउंटर के बाद पुलिस का मनोबल टूट गया. आज छह साल बाद भी उत्‍तराखंड पुलिस के जवान एनकाउंटर करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं और पुलिस बदमाशों से मुठभेड़ करने की हिम्मत नहीं जुटा पाती है.

    दूसरी तरफ आलम यह है कि उत्तर प्रदेश में पुलिस की सख्त की डर से बदमाश उत्‍तराखंड का रूख कर रहे हैं. फिलहाल उत्‍तराखंड के जेलों से सुनील राठी, मिंटू चौधरी सचिन खोखर अपना नेटवर्क चलाते हैं.

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