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उत्तरकाशी बस हादसा: मृतकों की संख्या 14 तक पहुंची, 13 लोग घायल

उत्तराखंड में यात्रियों से भरी हुई बस डामटा के करीब एक खाई में पलट गई हैै.

उत्तराखंड में यात्रियों से भरी हुई बस डामटा के करीब एक खाई में पलट गई हैै.

एसडीआरएफ प्रवक्ता प्रवीन आलोक के अनुसार दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत इलाज के दौरान हुई. बाकी सभी लोग मौके पर ही मारे गए थे.

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उत्तरकाशी में रविवार को दर्दनाक सड़क हादसे में 14 लोगों की मौत हो गई है और 13 लोग घायल हैं. दिल्ली-यमुनोत्री राष्टीय राजमार्ग एनएच 123 पर डामटा के पास सवारियों से भरी बस अनियंत्रित होकर करीब तीन सौ मीटर नीचे यमुना नदी में जा गिरी. पुलिस ने मौके पर पहुंचे स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को खाई से निकाला. गंभीर रूप से घायलों को हेलिकॉप्टर से लिफ़्ट कर ऋषिकेश के जौलीग्रांट अस्पताल और AIIMS में  भर्ती करवाया गया है.

दुर्घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, एसडीआरएफ़ मौके पर पहुंच गई थी. स्थानीय लोगों के साथ मिलकर राहत और बचाव कार्य चलाया गया. एसडीआरएफ प्रवक्ता प्रवीन आलोक के अनुसार दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत इलाज के दौरान हुई. बाकी सभी लोग मौके पर ही मारे गए थे.

दुर्घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गंभीर रूप से घायलों को हेलिकॉप्टर से लिफ़्ट करवाने के निर्देश दिए थे. उन्होंने मारे गए लोगों के परिवारों से सांत्वना जताई और घायलों के इलाज के लिए हरसंभव कदम उठाने के निर्देश दिए.

ख़बर लिखे जाने तक तीन घायलों को हेलिकाप्टर से लिफ़्ट कर ऋषिकेश के जौलीग्रांट अस्पताल में  भर्ती करवा दिया गया था. हेलिकॉ़प्टर घायलों को लिफ़्ट करने के लिए फिर दुर्घटनास्थल की ओर रवाना हो गया था.

दुर्घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य जारी है. अभी और लोगों के हताहत होने की आशंका से इनकार नहीं किया गया है.  देहरादून के आरटीओ दिनेश पठोई के अनुसार 32 सिटर बस लगभग पूरी भरी हुई थी और उसकी फ़िटनेस, पेपर्स सब दुरुस्त थे.

(जगमोहन चौहान और भारती सकलानी के साथ सुनील नवप्रभात की रिपोर्ट)

VIDEO: टिहरी बस हादसे के बाद राज्यपाल ने सड़क सुरक्षा से जुड़े अफ़सरों को तलब किया

VIDEO: उत्तरकाशी में खाई में गिरी गाड़ी, 3 महिलाओं समेत 4 की मौत, 6 घायल

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Uttarakhand News: चमोली में बादल फटने से जमकर मची तबाही, राहत व बचाव कार्य जारी

Chamoli Cloud Burst: चमोली में बादल फटने से मची तबाही.

Chamoli Cloud Burst: चमोली जिले में सुबह से हो रही बारिश से जमकर तबाही हुई है. बादल फटने से जहां नारायण बगड़ थराली मोटर मार्ग बाधित है, वहीं, कारों और अन्य वाहनों में मलबा घुसने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 20, 2021, 13:30 IST
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चमोली . उत्‍तराखंड के चमोली जिले में एक बादल फटने (Chamoli Cloud Burst) की घटना सामने आई है. जहां पंगती गांव में सोमवार सुबह भारी बरसात के बाद जमकर तबाही मची है. जनपद चमोली में भारी बारिश के चलते जहां नारायण बगड़ थराली मोटर मार्ग बाधित हो गया है. वही नाले में आए भारी मलबे के चलते यह दो पहिया वाहनों के साथ ही कई कारों में भी मलबा घुस गया है. गनीमत रही कि जब नाली में यह भारी मलबा आया उस वक्त आसपास के इलाके में कोई नहीं था. वरना यहां बड़ा हादसा हो सकता था. जिले में सुबह से ही भारी बारिश हो रही है.

आपदा से बीआरओ मजदूरों के घरों को नुकसान पहुंचाने के साथ ही कई गाड़ियां भी मलबे में दब गई हैं. मौसम विभाग ने राज्य में 23 सितम्बर तक भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है. सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं. राहत व बचाव का कार्य चल रहा है. भारी बरसात के बाद मची तबाही में अभी तक कोई जनहानि की सूचना नहीं है. भारी बारिश की वजह से चारों ओर मलबा ही मलबा बिखरा पड़ा हुआ है.

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Chamoli Cloud Burst: चमोली में बादल फटने से भारी तबाही. जनजीवन अस्त-व्यस्त, वाहनों में घुसा मलबा.

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सड़कें दल-दल में तब्दील हो गईं हैं. कई गांवों में शाम से जारी बारिश जारी है, जिसकी वजह से राहत व बचाव कार्य में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है. प्रशासन की टीमें मौके पर हैं और रेस्क्यू कार्य शुरू कर लिया गया है लेकिन, हादसे में कितना नुकसान हुआ है इसकी अभी तक कोई पुख्ता जानकारी नहीं है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस घटना का संज्ञान लिया. उन्होंने कहा स्थानीय प्रशासन राहत बचाव कार्य कर रहा है.

उत्तराखंड : भूस्खलन से गंगोत्री हाईवे बंद, बड़ेथी के पास 22 तक रूट रहेगा डायवर्ट

गंगोत्री हाईवे पर भूस्खलन हुआ.

भारी बारिश के चलते एक बार फिर गंगोत्री जाने वाला हाईवे ठप हो गया है. यहां राहत कार्य चल रहा है तो वहीं एक टनल निर्माण के कारण 22 सितंबर तक हाईवे पर रूट डायवर्ट किए जाने का प्लान बनाया गया है.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 14, 2021, 11:19 IST
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उत्तरकाशी. उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश का कहर जारी है. ताज़ा समाचार के मुताबिक लगातार हो रही भारी बारिश के चलते उत्तरकाशी ज़िले में गंगोत्री हाईवे ठप हो गया है. यहां भूस्खलन के कारण चट्टानों के टुकड़े और मलबा सड़क पर गिर गया है, जिसे हटाने का काम शुरू कर दिया गया है. इससे पहले खबर यह थी कि बड़ेथी के पास 15 से 22 सितंबर तक इस गंगोत्री हाईवे पर वाहनों का आना जाना बंद कर दिया जाना था क्योंकि यहां एक महत्वपूर्ण निर्माण कार्य होना है.

समाचार एजेंसी एएनआई ने ट्विटर पर जानकारी दी कि गंगोत्री हाईवे पर सुखी टॉप इलाके में भूस्खलन के चलते रास्ता बंद हो गया. उत्तरकाशी आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल के हवाले से कहा गया कि बॉर्डर रोड्स संगठन यानी बीआरओ की मदद से यहां रेस्क्यू करवाया जा रहा है और मलबा हटाने की कवायद शुरू कर दी गई है. खबर लिखे जाने तक यात्री और वाहन फंसे हुए थे, जबकि कुछ को दूसरे रास्ते लेने की हिदायत दी गई.

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गंगोत्री हाईवे पर भूस्खलन से रास्ता बंद होने संबंधी एएनआई का ट्वीट.

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एक हफ्ते बंद रहेगा हाईवे, रूट डायवर्ट होगा
एक अन्य खबर में बताया गया कि बड़ेथी के पास चूंकि एक ओपन टनल का निर्माण किया जाना है इसलिए 15 से 22 सितंबर के बीच यहां रास्ता बंद रहेगा. वास्तव में, करीब 9 साल पहले की आपदा के चलते यहां भूस्खलन क्षेत्र बन गया था, जिससे यह सड़क दुर्घटना के लिए आशंकित हो गई थी. इसके ट्रीटमेंट पर 29 करोड़ खर्च करने के बाद भी काम सफल नहीं हो सका था. अब यहां और 28 करोड़ की लागत से एक ओपन टनल बनवाई जा रही है, जिसकी लंबाई 310 मीटर की होगी. इस निर्माण के चलते वाहनों को मनेरा बाईपास से डायवर्ट किया जाएगा.

Uttarakhand News: मंत्री हरक सिंह रावत के बेबाक बोल, ढेंचा बीज घोटाले पर कहीं ये बात!

Uttarakhand News: मंत्री हरक सिंह रावत के बेबाक बोल

Uttarakhand Scam News: उत्तराखंड में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ढेंचा बीज घोटाले का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है. विपक्ष को बैठे बिठाए एक तरह से मुद्दा मिल गया है.

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देहरादून. उत्तराखंड की राजनीति के सबसे चर्चित ढेंचा बीज घोटाले (Dhencha Beej Scam)का जिन्न एक बार फिर से बाहर आ गया है. धामी सरकार में दिग्गज कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने न्यूज18 से बातचीत में सोमवार को बड़ा खुलासा किया है. हरक सिंह ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में हरीश रावत इससे पहले बीजेपी सरकार में कृषि मंत्री रहे त्रिवेंद्र रावत को ढेंचा बीज घोटाले के लिए जेल भेजना चाहते थे. हरक ने कहा कि उन्होंने त्रिवेंद्र के समर्थन में दो पेज की नोटिंग की थी. जिसके चलते वो जेल जाने से बच गए. उन्होंने कहा कि तब हरीश रावत ने कहा था कि तुम सांप को दूध पिला रहे हो. मंत्री हरक सिंह ने कहा कि यदि तब त्रिवेंद्र जेल गए होते तो 2017 में वो सीएम भी नहीं बन पाते.

बताते चलें कि 2007 से 12 के बीच बीजेपी की खंडूरी सरकार में त्रिवेंद्र रावत कृषि मंत्री थे, इसके बाद 2012 से 17 तक रही कांग्रेस सरकार में हरक सिंह रावत कृषि मंत्री बने. हरीश रावत मुख्यमंत्री थे. तब त्रिवेंद्र पर ढेंचा बीज खरीद में घोटाले के आरोप लगे थे. वहीं पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत का कहना है कि हरक सिंह कुछ भी बोले मुझ पर कोई फर्क नहीं पड़ता. तत्कालीन समय में हरीश रावत तब एक डेढ़ महीने दिल्ली स्थित एम्स में एडमिट रहे. ढेंचा बीज की उस फाइल को अपने सिरहाने के नीचे दबा कर रहे. त्रिवेंद्र का कहना है कि उस फाइल की बड़ी-बड़ी फोटो स्टेट कर के सचिवालय के चारों ओर चिपका दीजिए, जनता खुद फैसला कर लेगी. उसमें भ्रष्टाचार हुआ या नहीं. त्रिवेंद्र ने कहा कि हरक सिंह की आदत है कुछ भी कह देने की.

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अपने इस इंटरव्यू में हरक सिंह ने कहा कि 2016 की बगावत उन्होंने कैबिनेट मंत्री बनने के लिए नहीं की थी. उन्होंने आगे कहा कि उनको उम्मीद थी कि इसके बाद वो सीएम बन जाएंगे. लेकिन, ऐसा नहीं हो पाया. मेरी किस्मत में नहीं है सीएम बनना. बहरहाल, विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ढेंचा बीज घोटाले का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है. विपक्ष को बैठे बिठाए एक तरह से मुद्दा मिल गया है. ऐसे में हरक की ये बयानबाजी पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है.

Uttarakhand News: बीजेपी में शामिल हुए कांग्रेस विधायक राजकुमार, बोले- पीएम मोदी से हुए प्रभावित

Uttarakhand News: बीजेपी में शामिल हुए कांग्रेस विधायक राजकुमार

Uttarakhand Politics: उत्तराखंड के पुरोला से विधायक राजकुमार को पार्टी की सदस्यता दिलाते हुए केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि आगामी चुनाव में बीजेपी की जीत होगी और फिर से डबल इंजन की सरकार उत्तराखंड में बनेगी.

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दिल्ली. उत्तराखंड के पुरोला से कांग्रेस विधायक राजकुमार (Congress MLA Raj kumar) रविवार को बीजेपी में शामिल होने के बाद कहा कि वे पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के योजनाओं से प्रभावित होकर के बीजेपी का दामन थाम रहे हैं. राजकुमार का कहना है कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठा काफी बड़ी है और अब भारत को कोई आंख नहीं दिखा सकता. बल्कि भारत के साथ आंख में आंख मिला कर के दोस्ती करना चाहता है. इसी से प्रभावित होकर के बीजेपी का दामन थाम रहे हैं.

न्यूज18 से बातचीत में पुरोला विधायक राजकुमार ने कहा, ‘वह चुनाव को लेकर नहीं बल्कि बीजेपी से प्रभावित होकर के पार्टी में शामिल हो रहे हैं. उनका कहना है कि बीजेपी के नेतृत्व में प्रदेश का काफी विकास हुआ है और ऑल वेदर रोड के बनने से प्रदेश में कनेक्टिविटी बढ़ी है.’ उनका कहना है कि कनेक्टिविटी बेहतर होने से धार्मिक स्थलों की यात्रा अब सुगम हो गई है. कोरोना काल में मोदी सरकार के 80 करोड़ों लोगों को मुफ्त में अनाज देने की योजना से भी वे काफी प्रभावित हुए हैं. राजकुमार का कहना है कि इस योजना से लोगों को काफी फायदा हुआ है.

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इसके साथ ही साथ पुरोला से कांग्रेस के विधायक रहे राजकुमार आगे कहते हैं कि कांग्रेस अनुसूचित जातियों के लिए कुछ नहीं किया, लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी ने अनुसूचित जाति समाज को स्वावलंबी बनाने के लिए काफी काम किया है. उत्तराखंड के पुरोला से विधायक राजकुमार को पार्टी की सदस्यता दिलाते हुए केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि आगामी चुनाव में बीजेपी की जीत होगी और फिर से डबल इंजन की सरकार उत्तराखंड में बनेगी. उत्तराखंड के सीएम पुष्कर धामी ने राजकुमार को जनता से जुड़ा हुआ नेता बताया. इस मौके पर बीजेपी के सांसद और राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी और सह मीडिया प्रभारी संजय मयूख भी मौजूद रहे.

...जब अचानक भावुक हुए पूर्व CM हरीश रावत, Video देखकर लोगों ने किए तरह-तरह के कमेंट!

Uttarakhand News: हरीश रावत का रोता हुआ वीडियो वायरल

Harish Rawat News: जानकार मानते हैं कि हरीश रावत अपनी इन अलग कोशिशों से लोगों के करीब जाने का रास्ता निकालते हैं.

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शैलेंद्र सिंह नेगी/ उत्तराखंड. कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव, उत्तराखंड कांग्रेस की चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत (Former CM Harish Rawat) अपने बयानों से लेकर अपने काम तक से चर्चा में बने रहते हैं. शुक्रवार को हरीश रावत ने एक ऐसा वीडियो अपनी सोशल मीडिया वॉल पर पोस्ट किया जिसमें वो अपने आंसू पोछते दिख रहे हैं. दरअसल हरीश रावत जिस समय आंसू पोंछ रहे हैं उस समय वो मोबाइल पर एक उत्तराखंडी लोकगीत सुन रहे हैं. इसी दौरान इस लोक गीतों के शब्द सुनकर हरीश रावत के आंखों में आंसू छलक जाते हैं.

हालांकि वीडियो में हरीश रावत अपने भावुक होने का कारण भी बता रहे हैं. ऑडियो में सुनाई दे रहा गीत हरीश रावत के कामों को लेकर गाया गया है. बताया जा रहा है कि इसे अल्मोड़ा में रहने वाले एक लोक गायक ने गाया है. जिसमें हरीश रावत के मुख्यमंत्री रहने के दौरान किए गए अच्छे कामों को जिक्र है. जिसे सुनकर हरीश रावत भावुक हो गए हैं. हालांकि हरदा का वीडियो देख लोग तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं. हरदा के समर्थक जहां हरदा को 2022 के लिए जरूरी करार दे रहे हैं वहीं उनके विरोधी हरदा पर व्यंग कसने से बाज नहीं आ रहे.

गाने सुनकर करना पड़ेगा टाइम पास
भगवान कार्की नाम ने यूजर ने हरदा की वीडियो पर कमेंट करते हुए लिखा. ”हरदा पिछली बार भी आप पर गाने बने थे फिर भी आपको दो जगहों से हार का सामना करना पड़ा. आपको गीत नहीं आपकी नीतियां आपको जिताती हैं. नीतियां आपकी वही हैं 90 मिनट नमाज अदा करने के लिए छुट्टी देकर. आपको फिर यही गाने सुनकर टाइम पास करना पड़ेगा​.”

पॉलिटिक्स छोड़ शुरू की एक्टिंग
मुकुल पलड़िया नाम के एक शख्स ने कमेंट करते हुए व्यंग किया कि पॉलिटिक्स छोड़ हरदा ने एक्टिंग शुरू कर दी है. जबकि त्रिभुवन सिंह राणा ने हरीश रावत का समर्थन करते हुए लिखा कि निसंदेह आज संम्पूर्ण उत्तराखंड को आपकी जरूरत है. आप है तो विश्वास है कि उत्तराखंड के लोगों का बेरोजगारी का आलम, मंहगाई का आलम, शिक्षा, स्वास्थ्य, आदि की स्थिति फिर से जीने की इच्छा होगी.

हलवाई भी बन चुके हैं हरीश रावत
कांग्रेस कैंपेन कमेटी के अध्यक्ष हरीश रावत राजनीति के इतर भी चर्चाओं में रहते हैं. वो कभी मैंगो पार्टी, कभी नींबू पार्टी, कभी भुट्टा पार्टी तो कभी उत्तराखंडी पकवानों और व्यजंनों की पार्टी देते रहते हैं. यही नहीं अपने राजनीतिक दौरों के दौरान हरदा का किसी भी ढाबे में रुककर चाय बनाना, चाय पीना, जलेबी बनाना, राजमा-चावल और शिकंजी का मजा लेना चर्चाओं में बना रहता है. जानकार मानते हैं कि हरीश रावत अपनी इन अलग कोशिशों से लोगों के करीब जाने का रास्ता निकालते हैं.

गरतांग गली में स्काई वॉक पर घूमने आए, छोड़ गए 'गंदगी के निशान', मुकदमा दर्ज

नेलांग वैली में गरतांग गली के पास बने स्काई वॉक को गंदा करने पर पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा.

Uttarakhand Tourism: उत्तराखंड की नेलांग वैली में गरतांग गली के नाम से मशहूर पहाड़ के पास देवदार की लकड़ी के बने खूबसूरत स्काई वॉक पर कुछ हुड़दंगी सैलानियों ने अपने नाम लिख दिए. पुलिस ने इसको लेकर मुकदमा दर्ज किया है.

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उत्तरकाशी. आपने ट्रेनों के टॉयलेट में या ऐतिहासिक स्थलों पर प्रेमी-प्रेमिकाओं या उपद्रवी तत्वों की हरकतें देखी होंगी, जो दीवारों पर अपने नाम लिखकर उसे गंदा करते हैं. पहाड़ पर रमणीक जगहों के लिए मशहूर उत्तराखंड में भी कुछ ऐसी ही हरकत देखने को मिली है. यहां उत्तरकाशी जिले की नेलांग घाटी में लकड़ी के बने खूबसूरत स्काई वॉक पर कुछ हुड़दंगी सैलानियों ने अपने नाम के साथ-साथ तमाम तरह के मैसेज लिखकर इसे गंदा कर दिया है. गरतांग गली के नाम से मशहूर पहाड़ पर वर्षों पहले लकड़ी की सीढ़ियां बनाई गई थीं, जिसे स्काई वॉक के नाम से जाना जाता है. देवदार की लकड़ी से बने इस स्काई वॉक पर कुछ हुड़दंगी सैलानियों ने कालिख पोतकर गंदगी के निशान छोड़ दिए हैं. पुलिस ने इसको लेकर अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है.

नेलांग वैली में गरतांग गली के नाम से खड़े पहाड़ पर जाने वाला यह रास्ता भारत-चीन को जोड़ता है. 1962 की लड़ाई से पहले यहां के स्थानीय लोग इस रास्ते से तिब्बत जाते थे. दुर्गम होने की वजह से वर्षों तक यह रास्ता आम लोगों या पर्यटकों के लिए बंद था, जिसे कुछ वर्ष पहले ही खोला गया है. सरकार ने देवदार की लकड़ी की सीढ़ियां बनाकर करीब 65 लाख रुपए की लागत से इसका जीर्णोद्धार कराया, ताकि यह खूबसूरत जगह उत्तराखंड में नामी पर्यटक स्थलों की शोहरत पा सके. इसके बाद यहां बड़ी संख्या में पर्यटक आने लगे. लेकिन कुछ हुड़दंगी सैलानी इसकी खूबसूरती खराब कर अपनी गंदगी के निशान यहां छोड़ गए.

आपको बता दें कि उत्तरकाशी के गंगोत्री इलाके में भारत-तिब्बत के बीच व्यापारिक रिश्तों की गवाह रही गरतांग गली में लकड़ी की रेलिंग की भव्यता को खराब करने को लेकर अब प्रशासन सतर्क हो गया है. वन क्षेत्राधिकारी प्रमोद सिंह की तहरीर पर गंगोत्री थाने में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धारा 427 के तहत अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. इस मामले में डीआईजी गढ़वाल नीरू गर्ग ने कहा कि गंगोत्री नेशनल पार्क के फॉरेस्ट अधिकारी की शिकायत के बाद पुलिस को जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं. यहां आने वाले पर्यटक इस स्थान की खूबसूरती के साथ छेड़छाड़ न करें, इसका ध्यान रखने को कहा गया है.

Landslides in Uttarakhand : चट्टानें गिरने से उत्तरकाशी का गंगोत्री हाईवे बंद, मसूरी-देहरादून रोड ठप

उत्तरकाशी में गंगोत्री हाईवे अस्थायी तौर पर बंद हुआ.

देहरादून के अलावा पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं हो रही हैं. वहीं राज्य में गुरुवार को बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया जा चुका है. भारी बारिश के चलते मसूरी और टिहरी का रास्ता भी प्रभावित हुआ.

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उत्तरकाशी. उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के चलते भूस्खलन की घटनाएं रोज़मर्रा की बात हो गई हैं, लेकिन उत्तरकाशी से बड़ी खबर यह है कि चट्टानें सड़क पर गिर जाने के कारण गंगोत्री नेशनल हाईवे ठप हो गया है. हालांकि स्थानीय लोगों के रेस्क्यू और हाईवे को फिर से चालू करने की कवायद जारी है, लेकिन फिलहाल ट्रैफिक और कई लोग फंसे हुए हैं. गुरुवार को राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में खास तौर पर बेहद भारी बारिश का अलर्ट जारी किया जा चुका था. वहीं राजधानी देहरादून में भी भारी बारिश से खास सड़कें बंद होने की खबरें हैं.

हिमाचल के साथ ही उत्तराखंड में भूस्खलन के हादसे लगातार हो रहे हैं. समाचार एजेंसी एएनआई ने तस्वीरें जारी करते हुए बताया कि भूस्खलन के चलते उत्तरकाशी का गंगोत्री हाईवे अस्थायी तौर पर बंद हो गया है. BRO (बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन) के एक अधिकारी के हवाले से कहा गया, “हम स्थानीय लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचा रहे हैं. BRO द्वारा सड़क पर गिरे मलबे को हटाकर राजमार्ग को सुचारू किया जा रहा है.” बता दें कि राज्य में गंगा समेत कई नदियां उफान पर हैं और लोगों को मौसम के प्रति लगातार सचेत किया जा रहा है.

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एएनआई का ट्वीट

देहरादून मसूरी रोड बंद
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून और उससे सटे मशहूर पर्यटन स्थल मसूरी में भारी बारिश का दौर जारी है. खबरों की मानें तो दोनों जगहों पर 100 मिलीमीटर बारिश हुई है. वहीं, देहरादून में शिव मंदिर और गलोगी पावर स्टेशन के पास बुधवार को भूस्खलन की घटनाएं भी हुईं, जिसके चलते मसूरी की रोड ठप हो गई. यही नहीं, मसूरी और टिहरी के मार्ग पर भी अंदाखेत के पास भूस्खलन होने से कुछ समय के लिए यह रास्ता भी अवरुद्ध रहा. गौरतलब है कि मसूरी के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल केम्प्टी फॉल भी जलस्तर बढ़ने से विकराल हो रहा है.

International Tiger Day 2021: आज है अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस, जानिए देश के 5 मशहूर टाइगर सेंचुरी के बारे में

अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस: भारत के विभिन्न राज्यों में कई अहम बाघ अभयारण्य हैं. (Image: Shutterstock)

International Tiger Day 2021: बाघों को वन्यजीवों (Wildlife) की लुप्त होती प्रजाति की सूची में रखा गया है और इनके संरक्षण के लिए 'सेव द टाइगर' जैसे राष्ट्रीय अभियानों (National Campaigns) को चलाया गया है.

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International Tiger Day 2021: हर साल दुनिया भर में 29 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया जाता है. इसे मनाने का मकसद यही है कि लोगों में बाघों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास को बचाने के लिए जागरूकता (Awareness) पैदा की जाए. बाघों को वैसे भी वन्यजीवों (Wildlife) की लुप्त होती प्रजाति की सूची में रखा गया है और इनके संरक्षण के लिए ‘सेव द टाइगर’ जैसे राष्ट्रीय अभियानों (National Campaigns) को चलाया गया है. बाघ संरक्षण को प्रोत्साहित करने और बाघों की घटती संख्या के प्रति जागरूक के लिए 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में एक सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाने की घोषणा की गई थी. इसमें 2022 तक बाघों की संख्‍या को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया था.

भारत में विभिन्न राज्यों में बड़ी संख्या में बाघ अभयारण्य (Tiger Sanctuary) हैं. अगर आपको बाघों को देखने का जुनून है, तो इस टाइगर डे के मौके पर आप इन सबसे अच्छे बाघ अभयारण्यों की सैर की योजना बना सकते हैं. जानिए देश के 5 मशहूर बाघ अभयारण्यों के बारे में-

जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व, उत्तराखंड
हिमालय की तलहटी में बसा जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व भारत का एक अहम टाइगर रिजर्व है. 500 वर्ग किमी के विशाल क्षेत्र में फैले इस राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना 1936 में हुई थी. उत्तराखंड में मौजूद इस जिम कॉर्बेट जैसे हरे-भरे कुछ ही बाघ अभयारण्य हैं. तो इस बार आप एक आकर्षक जंगल सफारी या जंगल के बीच एक रोमांचकारी सफर का आनंद ले सकते हैं.

रणथंभौर टाइगर रिजर्व, राजस्थान
कभी जयपुर के महाराजाओं का शिकार स्थल रहा रणथंभौर आज भारत के सबसे बड़े बाघ अभयारण्यों में से एक है. बाघों की एक बड़ी संख्‍या यहां है और यह 1.134 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है. यह विशेष रूप से बंगाल टाइगर्स के निवास के रूप में जाना जाता है. आप यहां बाघों के अलावा अन्य प्रजातियों को भी देख सकते हैं, जिनमें भालू, लकड़बग्घा, लोमड़ी और सियार शामिल हैं.

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, मध्य प्रदेश
बांधवगढ़ बाघ अभयारण्य भारत में सर्वश्रेष्ठ बाघ अभयारण्यों की सूची में उच्च स्थान पर है. हर दिन हजारों पर्यटक यहां आते हैं. यहां रॉयल बंगाल टाइगर्स का सबसे अधिक है. 820 वर्ग किमी की दूरी में फैले इस राष्ट्रीय उद्यान में प्राचीन बांधवगढ़ किला भी है. अपनी समृद्ध जैव विविधता, प्राकृतिक सुंदरता और गौरवशाली इतिहास के साथ बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की यात्रा लोगों को यहां आने के लिए आकर्षित करती है.

पेरियार टाइगर रिजर्व, केरल
अगर आप केरल में मनमोहक सुंदरता और अद्भुत वन्य जीवन का आनंद लेना चाहते हैं तो पेरियार टाइगर रिजर्व आपके लिए बेस्‍ट ऑप्‍शन हो सकता है. यह भारत के प्रसिद्ध बाघ अभयारण्यों में से एक है और इसमें बंगाल के बाघ, सफेद बाघ, एशियाई हाथी, जंगली सूअर और सांभर की बड़ी आबादी है. लगभग 777 वर्ग किमी के कुल क्षेत्रफल के साथ इसमें एक कृत्रिम झील भी है, जो इसकी सुंदरता और आकर्षण को बढ़ाती है.

सुंदरबन टाइगर रिजर्व, पश्चिम बंगाल
सुंदरबन टाइगर रिजर्व एक विश्व धरोहर स्थल और रॉयल बंगाल टाइगर का अहम स्‍थान है. इस टाइगर रिजर्व की खासियत यह है कि इसमें जलीय स्तनधारियों, पक्षियों और सरीसृपों सहित लुप्तप्राय प्रजातियों की एक महत्वपूर्ण संख्या भी है. हालांकि देश के अधिकांश राष्ट्रीय उद्यानों के विपरीत सुंदरबन में जीप सफारी की सुविधा नहीं है. इसके बजाय आपको क्षेत्र के आस-पास के परिवहन और दर्शनीय स्थलों की यात्रा के लिए नाव का सहारा लेना होगा.

उत्तराखंड में एक महीने में दूसरी बार भूकंप, अब उत्तरकाशी में लगे झटके

प्रतीकात्मक तस्वीर

Earthquake in Uttarakhand : जून के आखिरी हफ्ते में प्रदेश के एक और पहाड़ी ज़िले में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे और अब उत्तरकाशी में भूकंप का केंद्र पाया गया. हालांकि यह घातक साबित नहीं हुआ.

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उत्तरकाशी. उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके में एक महीने के भीतर ही दूसरी बार भूंकप का झटका महसूस किया गया. इस बार भूकंप का केंद्र उत्तरकाशी ज़िले में होना बताया गया है. उत्तरकाशी में शुक्रवार व शनिवार की दरमियानी रात करीब डेढ़ बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए, हालांकि ये झटके तेज़ नहीं थे, लेकिन एक थराथराहट जैसी थी. इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.4 मापी गई. विशेषज्ञों, स्थानीय इकाइयों और आपदा प्रबंधन ने अब तक किसी जान या माल के नुकसान की पुष्टि नहीं की है.

स्थानीय लोगों के मुताबिक उत्तरकाशी में देर रात हल्के झटके महसूस किए गए. रात करीब 1 बजकर 28 मिनट पर ये झटके लगने की खबरें हैं. भूकंप का केंद्र उत्तरकाशी से करीब 23 किलोमीटर की दूरी पर माना गया जबकि राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (National Centre for Seismology) का कहना है कि केंद्र ज़मीन के भीतर 10 किलोमीटर की गहराई में था.

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गौरतलब है कि इससे पहले उत्तराखंड के एक और पहाड़ी ज़िले पिथौरागढ़ में भी बीती 28 जून को 3.7 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया था. तब इस भूकंप का केंद्र पिथौरागढ़ से 55 किलोमीटर दूर पाया गया था. पिथौरागढ़ में 28 जून की दोपहर झटके महसूस किए गए थे और उस समय भी किसी किस्म के जान माल का नुकसान नहीं हुआ था.

उत्तराखंड : चंपावत में भूस्खलन, दर्जनों फंसे रहे, उत्तरकाशी में पीड़ितों से मिले CM

चंपावत में आठ जगह भूस्खलन के बाद ट्रैफिक कई जगह फंस गया. (File Photo)

भारी बारिश के कहर के बाद उत्तरकाशी के कंकराडी गांव जाकर सीएम धामी ने पीड़ितों को मदद देने के साथ ही एक गांव के विस्थापन के आदेश दिए. वहीं, चंपावत में नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक सुचारू नहीं हो सका.

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चंपावत/उत्तरकाशी. उतराखंड के चंपावत ज़िले में भारी बारिश के चलते भूस्खलन की लगातार घटनाओं के बाद टनकपुर घाट नेशनल हाईवे पर जैसे मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा. हाईवे जगह जगह बंद हो जाने के चलते करीब 150 लोग रास्ते में फंस गए. वहीं, राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तरकाशी ज़िले का दौरा किया और उन परिवारों से मुलाकात की, जिनके परिजन बादल फटने के हादसे के शिकार हुए थे. इन परिवारों से मुलाकात करते हुए धामी ने कई तरह की मदद देने की बात कही. वहां, चंपावत में प्रशासन को खासी मशक्कत करना पड़ी.

ज़िला आपदा प्रबंधन अधिकारी मनोज पांडेय ने बुधवार को करीब 150 लोगों के चंपावत में फंसे होने की जानकारी देते हुए कहा कि मलबा हाईवे पर गिर जाने के चलते विश्रामघाट के रास्ते में ट्रैफिक जाम रहा. मंगलवार से बुधवार के बीच इस हाईवे पर आठ जगहों पर भूस्खलन की घटनाएं हुईं, जिनमें करीब 150 लोग अटक गए. पांडेय का दावा है कि मंगलवार शाम तक सात जगहों पर मलबा हटा दिया गया था.

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देवीधुरा से हल्द्वानी के रास्ते निकाले गए लोग
चंपावत के हाईवे पर जगह जगह फंसे हुए लोगों को देवीधुरा होते हुए हल्द्ववानी के रास्ते से डायवर्ट कर निकाला गया. हालांकि विश्रामघाट की तरफ रास्ता अवरुद्ध होने के चलते लोग फंसे रहे. पांडेय के हवाले से आखिरी अपडेट खबरों के मुताबिक करीब दो दर्जन लोग फंसे हुए थे. यह भी गौरतलब है कि चंपावत समेत उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में मौसम विभाग ने भारी बारिश के आसार भी जताए.

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सीएम ने कहा, विस्थापित करो गांव
दूसरी तरफ, बुधवार को सीएम धामी उत्तरकाशी के मंडो गांव में बादल फटने के पीड़ित परिवारों से मिले और हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया. कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के साथ गांवों में पहुंचे सीएम ने ज़िले के कलेक्टर को मंडो गांव को विस्थापित करने के आदेश भी दिए. यहां दो गांवों में लोगों के घर घर जाकर सीएम ने मुलाकात और बातचीत की. इस दौरान सीएम ने मृतकों के परिजन को 1 लाख रुपये की मदद सीएम रिलीफ फंड से और 4 लाख की मदद आपदा राहत फंड से देने की बात कही.

उत्तराखंड : सड़क पर गिरी चट्टान, गंगोत्री नेशनल हाईवे 10 दिन में दूसरी बार बंद

भूस्खलन के लिए प्रतीकात्मक तस्वीर

Heavy Rains in Uttarakhand : एक सप्ताह पहले भी भूस्खलन के चलते यह हाईवे बंद हो गया था. हाल में राज्य के पहाड़ी इलाकों में हुई मूसलाधार बारिश के बाद इन इलाकों में सैकड़ों सड़कें बंद हो गई थीं.

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उत्तरकाशी. उत्तराखंड के कई पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश का दौर जारी है. भारी बारिश के चलते या उसके बाद भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है और इस बारे में मौसम विभाग ने 22 जुलाई तक के लिए अनुमान जारी करते हुए चेतावनी भी जारी की थी. ताज़ा खबर यह है कि भूस्खलन के चलते गंगोत्री नेशनल हाईवे ब्लॉक हो गया है. यह वही उत्तरकाशी ज़िला है, जहां दो दिन पहले सोमवार को बादल फटने के कारण तबाही ​मची थी. मांडो गांव में तीन लोगों की मौत हुई थी और कई मकान भारी बारिश की चपेट में आ गए थे.

समाचार एजेंसी एएनआई ने बुधवार सुबह के ताज़ा ट्वीट में बताया गया कि उत्तरकाशी ज़िले के सूनागढ़ इलाके के पास भूस्खलन के चलते नेशनल हाईवे ब्लॉक हो गया है. इस साल भारी बारिश में गंगोत्री नेशनल हाईवे का अवरुद्ध हो जाना एक समस्या बन चुका है. इससे पहले 12 जुलाई को भी यह हाईवे इसी कारण से बंद हो गया था. हालांकि तब यह भूस्खलन दाबरानी क्षेत्र में हुआ था.

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एक हफ्ते पहले हुए इस भूस्खलन के चलते करीब आधा दर्जन गांव मुख्यालय से कट गए थे. हालांकि आठ से दस घंटों के राहत कार्य के बाद इस हाईवे को तब खोला जा सका था. यह भी गौरतलब है कि बीते सोमवार को ही पहाड़ी ज़िलों में हुई मूसलाधार बारिश के बाद 250 सड़कें बंद हो गई थीं, जिनमें से कई सड़कें अब तक नहीं खुल सकी हैं.

Uttarkashi Cloud Burst: उत्तरकाशी में बादल फटने से 3 लोगों की मौत, सीएम धामी ने रेस्क्यू ऑपरेशन में तेजी के दिए आदेश

उत्तरकाशी में बादल फटने से कई गांवों को नुकसान हुआ है.

Uttarkashi Cloud Burst: उत्तराखंड के उत्तरकाशी के मांडो गांव में कल बादल फटने से 3 लोगों की मौत हुई है. जबकि चार लोग अभी लापता हैं. वहीं, राज्‍य के सीएम पुष्‍कर सिंह धामी (CM Pushkar Singh Dhami) ने रेस्क्यू ऑपरेशन में तेजी लाने के आदेश दिए हैं.

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उत्तरकाशी. उत्तराखंड में पिछले काफी दिनों से भारी बारिश (Heavy Rain) का दौर जारी है. इस वजह से न सिर्फ पहाड़ों पर नदियां उफान पर हैं बल्कि बादल फटने की भी घटनाएं लगातार हो रही हैं. इस बीच उत्तरकाशी में कल देर रात बादल फटने (Uttarkashi Cloud Burst) के कारण तीन लोगों की मौत हो चुकी है, तो अभी चार लोग लापता बताए जा रहे हैं. हालांकि अभी रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है. जबकि सीएम पुष्‍कर सिंह धामी (CM Pushkar Singh Dhami) ने बचाव और राहत कार्य में तेजी लाने के आदेश दिए हैं.

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, बादल फटने की ये घटना उत्तरकाशी के मांडो गांव में कल देर रात हुई, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई है. वहीं, अब भी चार लोग लापता हैं. इसके अलावा निराकोट, पनवाड़ी और कंकराड़ी के आवासीय घरों में पानी घुसने से भी हड़कंप मचा हुआ है.

सीएम धामी ने कही ये बात
उत्तराखंड के सीएम पुष्‍कर सिंह धामी ने कहा कि रविवार शाम उत्तरकाशी जनपद के ग्राम कंकराड़ी, मांडों में अतिवृष्टि/बादल फटने की दुःखद घटना हुई है. जिला प्रशासन, एसडीआरएफ, पुलिस मौके पर पहुंच गयी है. डीएम को राहत और बचाव कार्य शीर्ष प्राथमिकता पर करने के निर्देश दिए हैं. ईश्वर से प्रभावितों की कुशलता की कामना करता हूं.



बता दें कि उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण भागीरथी नदी समेत गाड़-गदेरे उफान पर आ गए हैं. जबकि बादल फटने से गांव मांडो, निराकोट, पनवाड़ी और कंकराड़ी के आवासीय घरों में पानी घुस गया. इस दौरान तीन लोगों की मौत होने से हड़कंप मच गया. जबकि चार लोगों के लापता होने से भी ग्रामीण दहशत में हैं. इस बारे में एसडीआरएफ के इंस्‍पेक्‍टर जगदंबा प्रसाद ने कहा कि इस घटना में तीन लोगों की मौत हुई, तो चार लोग लापता हैं. हमारा ऑपरेशन अभी जारी रहेगा.

उत्तराखंड में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी
मौसम विभाग के मुताबिक, अगले 24 घंटे में देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और पौड़ी जैसे जिलों में अत्यंत भारी बारिश की संभावना है. वहीं, उत्तरकाशी समेत राज्य के बाकी हिस्सों में भी भारी से बहुत भारी बारिश के आसार है. इस बाबत मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है.

उधर, प्रदेश के ज्यादातर स्थानों पर पिछले तीन दिन से रूक-रूक कर लगातार जारी बारिश से गंगा, यमुना, भागीरथी, अलकनंदा, मंदाकिनी, पिंडर, नंदाकिनी, टोंस, सरयू, गोरी, काली, रामगंगा आदि सभी नदियां उफान पर हैं जिनकी सतत निगरानी की जा रही है. वहीं, अनेक स्थानों पर भारी बारिश से भूस्खलन होने से अनेक मार्ग यातायात के लिए अवरूद्ध हैं जिन्हें खोलने के प्रयास जारी हैं. जबकि कई स्थानों पर अतिवृष्टि से मकानों और खेतों में मलबा भी घुस आया है.

Eid-Ul-Adha 2021 Date: देश भर में 21 जुलाई को मनाई जाएगी ईद-उल-अज़हा, जानें क्‍यों दी जाती है कुर्बानी

Eid 2021 Date: ईद-उल-अज़हा 21 जुलाई को मनाई जाएगी. Image/shutterstock

Eid-Ul-Adha 2021 Date: ईद-उल-फित्र की तरह ईद-उल-अज़हा पर भी लोग मस्जिदों में जाकर नमाज़ (Namaaz) अदा करते हैं. साथ ही इस दौरान मुल्‍क (Country) और लोगों की सलामती की दुआ मांगते हैं.

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Eid-Ul-Adha 2021 Date: ईद-उल-अज़हा का त्‍योहार इस साल 21 जुलाई को मनाया जाएगा. इस्लामिक कैलेंडर (Islamic Calendar) के मुताबिक ईद-उल-अज़हा 12वें महीने की 10 तारीख को मनाई जाती है. इस्लाम मजहब में इस माह की बहुत अहमियत है. इसी महीने में हज (Hajj) यात्रा भी की जाती है. ईद-उल-फित्र की तरह ईद-उल-अज़हा पर भी लोग सुबह जल्‍दी उठ कर नहा धोकर साफ कपड़े पहनते हैं और मस्जिदों में जाकर नमाज़ (Namaaz) अदा करते हैं. साथ ही इस दौरान मुल्‍क (Country) और लोगों की सलामती की दुआ मांगते हैं. ईद के इस मुबारक मौके पर लोग गिले-शिकवे भुला कर एक-दूसरे के घर जाते हैं और ईद की मुबारकबाद देते हैं. इस ईद पर कुर्बानी देने की खास परंपरा है.

जानें क्यों की जाती है कुर्बानी
इस्लाम मजहब में कुर्बानी को बहुत अहमियत हासिल है. यही वजह है कि ईद-उल-अज़हा के मुबारक मौके पर मुसलमान अपने रब को राजी और खुश करने के लिए कुर्बानी देते हैं. इस्लाम धर्म की मान्यताओं के मुताबिक एक बार अल्लाह ने हज़रत इब्राहिम की आज़माइश के तहत उनसे अपनी राह में उनकी सबसे प्रिय चीज कुर्बान करने का हुक्म दिया. क्‍योंकि उनके लिए सबसे प्‍यारे उनके बेटे ही थे तो यह बात हज़रत इब्राहिम ने अपने बेटे को भी बताई. इस तरह उनके बेटे अल्‍लाह की राह में कुर्बान होने को राज़ी हो गए. और जैसे ही उन्‍होंने अपने बेटे की गर्दन पर छुरी रखी, तो अल्लाह के हुक्‍म से उनके बेटे की जगह भेड़ जिबह हो गया. इससे पता चलता है कि हज़रत इब्राहिम ने अपने बेटे की मुहब्‍बत से भी बढ़ कर अपने रब की मुहब्‍बत को अहमियत दी. तब से ही अल्लाह की राह में कुर्बानी करने का सिलसिला चला आ रहा है.

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कुर्बानी के भी हैं कुछ नियम
ईद उल अज़हा के पवित्र त्‍योहार पर बकरा, भेड़ और ऊंट की कुर्बानी दी जाती है. कुर्बानी ऐसे पशु की दी जा सकती है, जो शारीरिक तौर पर पूरी तरह ठीक हो. वहीं कुर्बानी के बारे में भी इस्‍लाम में कुछ नियम बनाए गए हैं. यानी कुर्बानी सिर्फ हलाल कमाई के रुपयों से ही की जा सकती है. ऐसे रुपयों से जो जायज तरीके से कमाए गए हों और जो रुपया बेईमानी का या किसी का दिल दुखा कर, किसी के साथ अन्‍याय करके न कमाया गया हो. वहीं कुर्बानी के गोश्त के तीन हिस्से होते हैं, जिसमें अपने घर के अलावा अपने रिश्‍तेदारों और गरीबों को कुर्बानी का गोश्‍त बांटा जाता है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

बारिश का असर: उत्तरकाशी के डबरानी में लैंडस्लाइड से नेशनल हाईवे पर यातायात बंद

उत्तरकाशी में लैंडस्लाइड के कारण आवाजाही बंद हो गई है.

UK News: उत्तराखंड के उत्तरकाशी (Uttarkashi) जिले के डबरानी क्षेत्र में भारी बारिश के कारण भूस्खलन (Landslide) हो गया है.

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उत्तरकाशी. उत्तराखंड के उत्तरकाशी (Uttarkashi) जिले के डबरानी क्षेत्र में भारी बारिश के कारण भूस्खलन (Landslide) हो गया है. बीते सोमवार को गंगोत्री नेशनल हाईवे पर भूस्खलन के कारण यातायात बंद करना पड़ा. जिसके चलते इस राजमार्ग से आने-जाने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. जिला प्रशासन के अधिकारियों के मुताबिक सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) राजमार्ग को बहाल करने का प्रयास कर रहा है. जल्द ही यातायाता व्यवस्था सुचारू होने की उम्मीद है. राजमार्ग से चट्टान व मिट्टी हटाने का काम तेजी से हो रहा है.

बता दें कि भारी बारिश के कारण उत्तराखंड के कई इलाकों में जन जीवन प्रभावित हो रहा है. चीन सीमा को जोड़ने वाले पिथौरागढ़ (Pithoragarh) जिले के कुलागाड़ पुल (Kulagad Bridge) बहने से हजारों की आबादी कैद हो गई है. हालात यह हो गये हैं कि ब्यास, दारमा और चौदांस घाटी के छह दर्जन से अधिक गांव बाकी दुनिया से पूरी तरह कट गए हैं. ऐसे में जिन लोगों को मजबूरी में आवाजाही करनी पड़ रही है उनके लिए कुलागाड़ को पार करना मौत को मात देने से कम नहीं है.

रस्सियों के सहारे आवाजाही
बता दें कि नीचे उफनती नदी और नदी के ऊपर रस्सियों के सहारे आवाजाही हो रही है. जरा सी चूक होने पर इंसान सीधा मौत के मुंह में समा जाएगा. कुलागाड़ में पुल बहने के बाद हर दन लोग ऐसे ही आर-पार आने-जाने को मजबूर हैं. कुछ को रस्सियों के सहारे उनकी मंजिल तक पहुंचाया जा रहा है तो वहीं, कुछ तेज बहाव की नदी में बिजली के पोल के सहारे आर-पार आ-जा रहे हैं. कुलागाड़ में बीआरओ ने 45 करोड़ की लागत से आरसीसी पुल बनाया था. लेकिन बीते आठ जुलाई की रात आई आसमानी आफत ने पुल को ध्वस्त कर दिया. ब्यास घाटी के निवासी अश्विन नपलच्याल कहते हैं कि लोगों को अपनी जिंदगी खतरे में डालनी पड़ रही है. यह पुल बॉर्डर की तीनों घाटियों की लाइफलाइन था.

बड़ी खबर : उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला, तीन जिलों के लोगों के लिए चारधाम यात्रा खोलने का आदेश स्थगित

बद्रीनाथ चारों धामों में प्रमुख हैं.

Chardham Yatra: उत्तराखंड सरकार ने राज्‍य के तीन जिले के लोगों के लिए चारधाम यात्रा खोलने के अपने आदेश को स्थगित कर दिया है. इससे पहले सरकार ने चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी के लोगों के लिए यात्रा शुरू करने का ऐलान किया था.

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देहरादून. उत्तराखंड सरकार ने चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी के लोगों के लिए चारधाम यात्रा (Char Dham Yatra) खोलने के अपने आदेश को स्थगित कर दिया है. इस बाबत तीरथ सिंह रावत सरकार के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा, 'चारधाम यात्रा को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट (Nainital High Court) में सुनवाई चल रही है. 16 जून के बाद राज्य सरकार यात्रा खोलने पर फिर से विचार करेगी.

बता दें कि इससे पहले सरकार द्वारा चारधाम यात्रा को जिलास्तर पर अनुमति दी गई थी, लेकिन आरटी-पीसीआर निगेटिव रिपोर्ट जरूरी थी. सरकार ने जिन जिलों को यात्रा की अनुमति दी थी उनमें चमोली जिले के यात्री बद्रीनाथ धाम के दर्शन, रुद्रप्रयाग जिले की केदारनाथ धाम के दर्शन और उत्तरकाशी जिले के यात्री गंगोत्री यमुनोत्री धाम के दर्शन करने का नियम बनाया था. हालांकि सरकार ने अब आदेश स्थगित कर दिया है. फिलहाल केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में ​केवल पुजारियों को पूजा अर्चना संबंधी गतिविधियां कर पाने की अनुमति है.

उत्तराखंड में रियायतों के साथ 22 जून तक बढ़ा कोरोना कर्फ्यू
कोरोना संक्रमण के मामलों में कमी देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने 15 से 22 जून तक कुछ छूट के साथ कोरोना कर्फ्यू को बढ़ाने का ऐलान किया है. सरकार द्वारा दी गई छूट के तहत राजस्व कोर्ट में 20 केस तक की सुनवाई हो सकेगी. इसके अलावा, शादी और अंत्येष्टि में 50 लोगों की संख्या को अनुमति दी गई है. विक्रम ऑटो को चलाने की अनुमति दी गई है. 16, 18 और 21 जून को परचून, जनरल मर्चेंट की दुकानों के साथ ही शराब समेत अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठान भी खोले जाएंगे. इन दुकानों को खोलने का समय सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे तक रखा गया है. इसके अलावा, फल, सब्जी डेयरी और मिठाई की दुकानें रोज खुल सकेंगी. इन दुकानों की टाइमिंग भी सुबह आठ बजे से लेकर शाम पांच बजे तक होगी. इसके अतिरिक्त 16 और 21 जून को स्टेशनरी और किताबों की दुकानें भी खुली रहेंगी.

चट्टान गिरने से ऋषिकेश-गंगोत्री नेशनल हाईवे हुआ बंद, जानिए कब तक खुलेगा

हाईवे से मलबा हटाया जा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

मानसून से पहले राज्य में भारी बारिश हुई है जिसके चलते संवेदनशील पहाड़ी इलाकों और रास्तों पर भूस्खलन की घटनाएं होने के अंदेशे पहले ही जानकारों ने जताए थे. भूस्खलन की इस घटना से करीब एक दर्जन इलाकों का संपर्क कट गया.

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उत्तरकाशी. भारत और चीन के बॉर्डर तक जाने वाला महत्वपूर्ण नेशनल हाईवे दुर्घटना के कारण ठप हो गया. भूस्खलन होने के कारण सोमवार की अलसुबह ऋषिकेश से गंगोत्री जाने वाले हाईवे पर आवागमन बंद हो जाने से लोगों के साथ ही तीर्थयात्रियों और सुरक्षा बलों को भी काफी परेशानी होने की खबरें हैं. आधिकारिक सूचनाओं में यह भी बताया गया कि जल्द ही इस अवरुद्ध मार्ग को फिर शुरू किए जाने के लिए ज़रूरी काम तेज़ी से किया जा रहा है.

सीमा सड़क संगठन के अधिकारियों के हवाले से समाचारों में कहा गया कि भूस्खलन की घटना के कारण इस नेशनल हाईवे के बंद होने से सिर्फ गंगोत्री ही नहीं बल्कि 11 गावों का सड़क मार्ग से संपर्क पूरी तरह कट गया. अधिकारियों ने बताया कि इस मार्ग पर चट्टानों के जो टुकड़े और मलबा आ गया है, उसे पूरी तरह साफ ​करवाया जा रहा है. बीआरओ की मानें तो मंगलवार की रात तक यह रास्ता दोबारा शुरू हो पाने की उम्मीद है.

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भूस्खलन से गंगोत्री और 11 स्थानों का सड़क संपर्क टूटा.


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चारधाम यात्रा का प्रमुख मार्ग
यह नेशनल हाईवे ​केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि तीर्थ के लिहाज़ से भी काफी महत्वपूर्ण है. चार धाम यात्रा के लिए जो दो लेन का एक्सप्रेस नेशनल हाईवे निर्माणाधीन है, उसमें भी ऋषिकेश से गंगोत्री तक के लिए यह रास्ता अहम है. धारासू होते हुए जाने वाला यह रास्ता पुराने रूट जैसा ही है, जिस पर चार धाम के लिए सड़क हाईवे के साथ रेलवे भी शुरू होगा. बहरहाल, यह रास्ता बॉर्डर से लगी नेलांग घाटी तक जाता है. इस हाईवे के ज़रिये मुख्य तौर पर गंगोत्री तक ही ट्रांसपोर्ट किया जाता है.

लगातार चेतावनियों से भी चेता नहीं उत्तराखंड, चाइल्ड सेक्स रेशो में सबसे फिसड्डी राज्य

उत्तराखंड में सबसे कम रहा शिशु जन्म लिंग अनुपात.

स्टडीज़ में अंदेशे सामने आने के बावजूद बच्चों के लिंग अनुपात के मामले में उत्तराखंड 2011 के मुकाबले और 50 पॉइंट नीचे चला गया. खतरे की घंटियां कैसे सुनाई दी थीं? यह भी जानिए कि कौन से राज्य इस इंडेक्स में अव्व्ल रहे.

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नई​ दिल्ली/देहरादून. उत्तराखंड समय पर नहीं चेता और उसने उचित कदम नहीं उठाए, नीति आयोग के ताज़ा जारी किए गए आंकड़ों से यह साबित हुआ. आयोग ने हाल में, सस्टेनेबेल डेवलपमेंट गोल्स (SDG) को लेकर जो डेटा जारी किया, उसके मुताबिक शिशु जन्म में लिंग अनुपात के मामले में सबसे पिछड़े राज्य के तौर पर उत्तराखंड ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई. एसडीजी के आंकड़ों के हिसाब से बालक बालिका लिंग अनुपात के मामले में उत्तराखंड में केवल 840 का औसत है, यानी राज्य में प्रति 1000 बालकों पर सिर्फ़ 840 बालिकाएं जन्मती हैं. हैरत और दुख की बात यह है कि 2021 में ऐसे आंकड़े होंगे, यह अनुमान विशेषज्ञों ने पांच साल पहले ही लगा लिया था!

एसडीजी ने जो आंकड़े जारी किए, उनके मुताबिक शिशु जन्म के समय बाल लिंगानुपात के सबसे बेहतर आंकड़े छत्तीसगढ़ में दिखाई दिए, जहां यह अनुपात 1000:958 रहा. साफ तौर पर यह राष्ट्रीय औसत से कहीं ज़्यादा है. 957 के अनुपात के साथ केरल इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर रहा. यही नहीं, पंजाब में 890 और हरियाणा में 843 का औसत चिंताजनक ज़रूर है, लेकिन पहले कम सेक्स रेशो के शिकार इन राज्यों के आंकड़े इस बार बेहतर दिखे. लेकिन उत्तराखंड में यह सूरत नहीं दिखाई दी.

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सेक्स रेशो के मामले छत्तीसगढ़ और केरल अव्वल राज्य रहे.

'इंसानियत की मौत', अब कुत्ते खा रहे हैं उत्तराखंड में घाट पर लगी अधजली लाशें

उत्तराकाशी में नदी किनारे मिलीं अधजली लाशें.

कुछ ही दिन पहले पिथौरागढ़ में नदी में लाशें तैरती दिखी थीं और अब उत्तरकाशी से और वीभत्स तस्वीर सामने आई. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन से लाख कहने के ​बावजूद क्रियाकर्म ठीक से नहीं हो रहा.

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उत्तरकाशी. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में नदी में लाशें मिलने के बाद और भयानक तस्वीर यह है कि उत्तरकाशी में नदी में बह रही लाशों को आवारा कुत्ते खाते हुए एक वीडियो में दिखाई दिए. कुत्तों के लाशें चबाने और नोचने का यह वीडियो भागीरथी के केदार घाट पर लगीं लाशों का बताया जा रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल में कुछ दिनों से बारिश होने के चलते नदी का जलस्तर बढ़ गया है, जिसके कारण वो अधजली लाशें किनारों तक आ गई हैं, जिन्हें नदी में फेंक दिया गया होगा. इस घटना के एक प्रत्यक्षदर्शी ने इस वीभत्स तस्वीर को 'मानवता की मौत' करार दिया.

एक और स्थानीय व्यक्ति ने आशंका जताई कि हो सकता है कि ये लाशें कोविड ग्रस्त मृतकों की रही हों, जो नदी किनारे लगी हैं. 'नगरीय प्रशासन को फौरन और कारगर एक्शन लेना चाहिए ताकि लाशों के ज़रिये संक्रमण फैलने की आशंका पैदा न हो.' इस डर के साथ ही स्थानीय व्यक्तियों ने इस बात पर नाराज़गी भी ज़ाहिर की कि नगर पालिका और ज़िला प्रशासन से बार बार शिकायतें किए जाने के बावजूद शवों का अंतिम संस्कार उचित तरीके से नहीं करवाया जा रहा है.

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उत्तरकाशी में घाट पर अधजली लाशें मिलने के बाद इनका ठीक से क्रियाकर्म करवाने के आदेश दिए गए.


चश्मदीद ने क्या कहा?
नदी किनारे पड़ी लाशों को कुत्तों द्वारा कुतरे जाने वाले दृश्य को एक स्थानीय व्यक्ति ने अपनी आंखों से देखने का दावा किया. समाचार एजेंसी एएनआई ने अपनी रिपोर्ट में इस व्यक्ति के हवाले से लिखा 'मैं यहां पेंटिंग कर रहा था, तभी मैंने यहां कुत्तों को कुछ अधजली लाशें खाते हुए देखा. ज़िला प्रशासन और नगर पालिका को फ़ौरन इसका संज्ञान लेना चाहिए और ज़रूरी कदम उठाने चाहिए. यह चिंता का विषय है और मुझे लगता है कि 'इंसानियत की मौत' का चित्र है.

प्रशासन ने क्या कहा?
नगर पालिका के प्रेसिडेंट रमेश सेमवाल ने इस मामले में कहा कि स्थानीय व्यक्तियों से इस तरह की शिकायतें मिलने पर केदार घाट पर अधजली लाशों के ​क्रियाकर्म और किनारे को धोने के लिए एक व्यक्ति की ड्यूटी लगाई गई है. 'पिछले कुछ दिनों में हमारे इलाके में मौतें बढ़ीं और मुझे भी पता चला कि शवों को ठीक ढंग से जलाया नहीं गया.'

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गौरतलब है कि इससे पहले, उत्तर प्रदेश और बिहार में गंगा नदी में लाशों के मिलने संबंधी कई तरह की खबरें लगातार आई थीं. यही नहीं, हाल में, पिथौरागढ़ में भी नदी में लाशें तैरती हुई देखी गई थीं, जिन पर स्थानीय लोगों ने काफी नाराज़गी जताई थी और पीने के पानी के दूषित व संक्रमित होने का डर भी ज़ाहिर किया था.

संस्‍मरण: सिर्फ वृक्ष मित्र ही नहीं मनुष्‍य मित्र भी थे सुंदरलाल बहुगुणा, पत्‍नी विमला देवी ऐसे देती थीं साथ

मशहूर पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा और विमला बहुगुणा.

सुंदरलाल जितने जुझारू और क्रांतिकारी व्‍यक्ति रहे हैं उतने ही सरल, सौम्‍य और चिंतन-मनन करने वाले रहे हैं. संसार भर के मंचों पर बोलने वाले बहुगुणा बहुत ही विनम्र थे. प्रकृति के उपासक सुंदर लाल बहुगुणा ने अपना पूरा जीवन पर्यावरण की रक्षा के लिए समर्पित किया. इसीलिए उन्हें वृक्षमित्र और हिमालय के रक्षक के रूप में जाना गया.

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नई दिल्‍ली. उत्‍तराखंड या जहां कहीं भी जल-जंगल पहाड़ और प्रकृति पर कोई आंच आई तो सबसे पहले पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा याद आए. कई बार फोन पर ही उन्‍होंने अपनी बेशकीमती राय हम लोगों तक पहुंचाई. स्‍वभाव से बेहद सहज और सौम्‍य सुंदरलाल जब प्रकृति के संबंध में बातें करते थे तो लगता था जैसे अपने बच्‍चों के बारे में बता रहे हैं.

इसी प्रकार जब पहाड़, पेड़ और जंगलों की दुर्दशा पर विचार रखते थे तो उनकी पीड़ा उनकी आवाज में स्‍पष्‍ट सुनाई देती थी. बेहद सहजता से बोलते हुए कई बार लगता था कि ये सिर्फ वृक्ष मित्र नहीं हैं बल्कि मनुष्‍य मित्र भी हैं. उनके यही संस्‍कार उनके परिवार में भी देखने को मिले. खासतौर पर उनकी पत्‍नी विमला देवी जो उनकी इस सहजता को और भी बढ़ाती रही हैं.

सबसे ताजा संस्‍मरण अभी फरवरी का ही है. जब उत्‍तराखंड के चमोली और जोशीमठ में ग्‍लेशियर फटने की घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया था. उसी दौरान मैंने सुंदरलाल बहुगुणा जी के नंबर पर फोन लगाया कि शायद इस पर वे कुछ बोलें. हालांकि फोन उनकी पत्‍नी विमला देवी ने उठाया. सुंदरलाल जी से बात करने के निवेदन पर बड़े ही सौम्‍य अंदाज में उन्‍होंने कहा कि वे अब फोन पर सुन नहीं पाते हैं. बेटा उनसे तो बात नहीं हो पाएगी.

मेरे ये कहने पर कि थोड़ा जरूरी बात करनी थी, वे बोलती हैं कि बताओ तुम्‍‍हें उनसे क्‍या कहना है, मैं बता दूंगी. जब मैंने कहा कि मुझे उन्‍हें बताना नहीं दरअसल उनसे ही कुछ पूछना है तो वे कहती हैं कि अच्‍छा. सुनो थोड़ा ठहरकर फोन करना, तुम मुझे बताती चलना, मैं उनसे बात करके तुम्‍हें बता दूंगी.

उसके बाद मैं उन्‍हें फोन नहीं कर पाई, हालांकि इस अवस्‍था में विमला देवी जी की इस सौम्‍यता ने यह तो बता दिया कि उनके यहां किसी के लिए मना नहीं थी. यह पूरे परिवार का ही संस्‍कार था.

वहीं वरिष्‍ठ पत्रकार वेद विलास उनियाल बताते हैं कि सुंदरलाल जितने जुझारू और क्रांतिकारी व्‍यक्ति रहे हैं उतने ही सरल, सौम्‍य और चिंतन-मनन करने वाले रहे हैं. जब भी वे मिले हमेशा कहते थे कि ये प्रकृति मनुष्‍य के लिए है लेकिन मनुष्‍य इसे इस्‍तेमाल करना नहीं जानता. इसे नुकसाना पहुंचाकर मनुष्‍य अपने जीवन को ही नुकसान पहुंचा रहा है. उनकी चिंता प्रकृति के साथ-साथ मनुष्‍य के भावी जीवन को लेकर भी थी जो इसी प्रकृति पर टिका है.

संसार भर के मंचों पर बोलने वाले बहुगुणा बहुत ही विनम्र थे. प्रकृति के उपासक सुंदर लाल बहुगुणा ने अपना पूरा  जीवन पर्यावरण की रक्षा के लिए समर्पित किया. इसीलिए उन्हें वृक्षमित्र और हिमालय के रक्षक के रूप में जाना गया. चिपको आंदोलन की गूंज पूरी दुनिया में हुई. इन्‍होंने पत्र पत्रिकाओं में गंभीर लेख लिए. लंबी लंबी जन जागृति की पद यात्राएं की. दुनिया केभर में घूम घूम कर प्रकृति को बचाने का संदेश दिया. टिहरी बांध के निर्माण के खिलाफ उन्होंने लंबा संघर्ष किया. जेल यात्राएं की. जिंदगी की तमाम मुश्किलों को सहते हुए वह अपने कर्तव्य पर डटे रहे. उन्होंने अपना गांधीवादी जीवन अपनाया. पर्यावरण पर उनके विचारों को गंभीरता से सुना गया. उन्होंने जिन जिन मुद्दों पर आवाज उठाई उस पर गौर किया गया.

ऐसा था वृक्षमित्र का जीवन

बता दें कि सुंदर लाल बहुगुणा का जन्म 9 जनवरी 1927 को उत्तराखंड के टिहरी में हुआ था. वह विलक्षण प्रतिभा के व्‍यक्ति थे. युवावस्था से ही सामाजिक क्षेत्र और जन सरोकारों के प्रति रुझान रहा. 18 साल की उम्र में उन्हें पढने के लिए लाहौर भेजा गया. वहां डीएवी कालेज में उन्होंने पढ़ाई की. महान क्रांतिकारी शहीद श्रीदेव सुमन उनके मित्रों थे जिनके कहने पर उन्होंने सामाजिक क्षेत्र से जुड़ने का निश्चय किया था.

बहुगुणा छात्र जीवन में गांधीवादी विचारों की ओर प्रभावित हुए और सादा जीवन उच्च विचार के ध्येय वाक्य पर अपने जीवन को ढालने का प्रण किया. 1956 में 23 साल की उम्र में बिमला देवी के साथ विवाह होने के बाद उन्होंने अपनी जीवन की दिशा बदल ली. वह प्रकृति की सुरक्षा और सामाजिक हितों से जुड़े आंदोलनों में अपना योगदान देने लगे.  उन्होंने मंदिरों में हरिजनों को प्रवेश के अधिकार दिलाने के लिए आंदोलन किया. सुंदर लाल बहुगुणा ने विवाह के बाद गांव में रहने का फैसला किया और पहाड़ियों में एक आश्रम खोला. बाद में उन्होंने टिहरी के आसपास के इलाके में शराब के खिलाफ मोर्चा खोला. 1960 के दशक में उन्होंने अपना ध्यान वन और पेड़ की सुरक्षा पर केंद्रित कर दिया.

उत्तराखंड में गंगोत्री धाम के कपाट खुले, PM नरेंद्र मोदी के नाम से पहली पूजा

विधि विधान के साथ आज सुबह गंगोत्री धाम के कपाट खोल दिए गए.

Gangotri Dham News: पारंपरिक विधि-विधान के साथ खुले गंगोत्री धाम के कपाट. पंडा-पुरोहितों ने प्रधानमंत्री मोदी और सीएम तीरथ सिंह रावत के नाम से पहली पूजा कर भेंट चढ़ाई. कोरोना से देश-दुनिया को निजात दिलाने के लिए हुआ विशेष पाठ.

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उत्तरकाशी. आज विश्व प्रसिद्ध गंगोत्री धाम के कपाट विधि विधान और पूजा अर्चना के साथ खोल दिए गए. मां गंगा की डोली आज सुबह भैरव घाटी से गंगोत्री के लिए रवाना हुई. ठीक सुबह 7:30 पर विशेष मंत्र उच्चारणों के साथ गंगोत्री के पंडा पुरोहितों ने सीमित संख्या में पहुंच कर गंगोत्री मंदिर के कपाट खोल दिए. गंगोत्री धाम के कपाट खुलते ही मां गंगा का परिसर जयकारों से गूंज उठा. खास बात यह रही कि गंगोत्री के पंडा पुरोहितों ने पहली पूजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के नाम से की और भेंट भी चढ़ाई. पुरोहितों ने देश और दुनिया को कोरोना महामारी से निजात दिलाने के लिए विशेष पाठ का आयोजन किया.

इससे पहले मां गंगा की डोली अपने शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा गांव से गंगोत्री के लिए रवाना हुई. कोरोना संक्रमण की वजह से इस साल भी मुखबा गांव के लोग दूर से ही मां गंगा की डोली का दर्शन कर पाए. हर्षिल, धराली समेत अन्य स्थानों के लोगों ने भी दूर से ही मां गंगा के दर्शन किए. भैरव घाटी में रात्रि विश्राम के बाद आज सुबह 7:30 बजे मां गंगा के उद्गम स्थल के रूप में मशहूर गंगोत्री धाम के कपाट विधि विधान के साथ खोल दिए गए. इस साल आर्मी के बैंड की धुन भी गंगोत्री धाम में नहीं सुनाई दी. गंगोत्री मंदिर समिति के रविंद्र सेमवाल ने कहा कि कोरोना की वजह से सीमित संसाधनों के साथ गंगोत्री धाम में पूजा पाठ और मां गंगा की आरती का आयोजन हर दिन किया जाएगा. आम लोगों को न तो इस धाम की यात्रा और न ही मंदिर में दर्शन की अनुमति दी गई है.

गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने कहा कि साल 2020 की तरह इस साल भी गंगोत्री धाम के कपाट बड़े सादगी से खोले गए. कोरोना गाइडलाइन के हिसाब से मंदिर परिसर में पुरोहित और प्रशासन के कुछ लोगों ने शिरकत की. मंदिर के कपाट विधि विधान के साथ खोल तो दिए गए हैं, लेकिन हर साल की तरह गंगोत्री धाम में ना तो आर्मी के बैंड दिखे और ना भक्तों का उत्साह अब धाम के व्यापारियों और पंडा पुरोहितों को उम्मीद है कि जल्द ही कोरोना महामारी समाप्त होगी और धामों में फिर से चहल-पहल के साथ चार धाम यात्रा शुरू हो पाएगी.
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