उत्तरकाशी में तार-तार हो रहे हैं सरकार के स्वरोज़गार देने के दावे... लोन ही नहीं दे रहे बैंक, कैसे करें काम शुरू

राज्य सरकार बड़े पैमाने पर स्वरोज़गार के लिए योजनाएं चलाने के दावे कर रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
राज्य सरकार बड़े पैमाने पर स्वरोज़गार के लिए योजनाएं चलाने के दावे कर रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

DM स्वीकार करते हैं कि बैंक ऋण देने में असमर्थता जता रहे हैं इसलिए उन्होंने बैंकों के साथ बैठक कर स्वरोज़गार के लिए आए आवेदनों पर ऋण देने की बात कही है.

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उत्तरकाशी. कोरोना काल में बड़ी संख्या में प्रवासियों के अपने घर वापस आने के बाद राज्य सरकार ने बड़ी संख्या में स्वरोज़गार के लिए योजनाएं शुरु की हैं. चुनाव नज़दीक देख राज्य सरकार लगातार नई योजनाओं का शिलान्यास भी कर रही है. मुख्यमंत्री स्वरोज़गार योजना और मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना सहित कई योजनाओं के माध्यम से सरकार प्रवासियों, रहवासियों को रोज़गार देने की बात कह रही है. लेकिन इसके उलट  सरकार की स्वरोज़गार योजनाओं को बैंक पलीता लगा रहे हैं. उत्तरकाशी में स्वरोज़गार की योजनाएं धरातल पर आने के बजाय बैंक और विभागों के बीच ही झूल रही हैं.

मजबूत पहल नहीं कर रही सरकार 

उत्तरकाशी में कई युवाओं ने स्वरोज़गार के लिए संबंधित विभागों में आवेदन किया है लेकिन आवेदन के बाद ऋण की फ़ाइल विभाग और बैंकों के बीच ही झूल रही हैं. आलम यह है कि बैंक ऋण देने में अक्षमता जता रहे हैं जिसके चलते रोजगार की बात न तो गले उतर रही है और न धरातल पर उतर रही है.



स्थानीय लोगों की माने तो सरकार मजबूती के साथ पहल नहीं कर रही है जिसका खामियाजा बेरोजगार युवाओं को भुगतना पड़ रहा है. स्थानीय निवासी विजेंद्र नौटियाल कहते है कि अगर बैंकों पर नकेल कसी जाए तो स्वरोज़गार की योजनाओं को अमलीजामा पहनाया जा सकता है.
डीएम ने की बैंकों से चर्चा 

उत्तरकाशी के ज़िलाधिकारी मयूर दीक्षित कहते हैं कि सरकार कई योजनाओं के तहत ऋण दे रही है और उन्होंने भी अपने ज़िले में रोज़गार देने का काम किया है. हालांकि वह स्वीकार करते हैं कि बैंक ऋण देने में असमर्थता जता रहे हैं इसलिए उन्होंने बैंकों के साथ बैठक कर स्वरोज़गार के लिए आए आवेदनों पर ऋण देने की बात भी कही है.  पूरी कोशिश है कि बेरोज़गार विभाग और बैंक के माध्यम से अपने रोज़गार शुरु कर सकें.

साफ़ है कि दावों और हकीकत में बहुत अंतर है. सरकार कितने ही दावे करे, आंकड़ों की बाज़ीगरी कर लेकिन बेरोज़गार अब भी विभाग और बैंक के बीच धक्के खा रहे हैं. यूं ही एक लाख से ज़्यादा प्रवासी फिर रोज़गार के तलाश में पलायन नहीं कर गए हैं.
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